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फिर से शुरू हुई NPS और OPS पर बहस

लंबे समय से देशभर में पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) और नई पेंशन स्कीम को लेकर बहस होती रही है। जब भी देश में चुनावी माहौल होता है तो ये मुद्दा और गर्माने लगता है। कांग्रेस ने जिस तरीके से हिमाचल प्रदेश में पुरानी पेंशन योजना  (OPS) को चुनावी मुद्दा बनाकर सत्ता हासिल की है। उसके बाद आने वाले 2024 के लोकसभा चुनाव में ये मुद्दा काफी मजबूत तरीके से उभर सकता है।

देश में जब से नई पेंशन स्कीम यानी एनपीएस (NPS) लागू की गई है, इसका विरोध तब से अब तक जारी है। इसको वापस लेने की मांग वर्तमान में भी जोरों से उठ रही है और पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग की जा रही है।

हाल में कई राज्यों में पुरानी पेंशन स्कीम को लागू कर दिया गया है, जिनमें छत्तीसगढ़, राजस्थान आदि शामिल हैं। लेकिन बचे कुछ राज्यों में सरकारें पुरानी पेंशन योजना लागू करने का वादा कर रही हैं। एनपीएस (NPS) को लेकर लोगों का कहना है कि यह सरकारी कर्मचारियों के लाभदायक नहीं है। और तो और कई राज्यों के केंद्रीय कर्मचारी तक यह मानते हैं कि इस योजना में उनका भविष्य असुरक्षित हो जाएगा।

पुरानी और नई पेंशन योजना में में अंतर

 

नई पेंशन योजना कब लागू हुई?

2004 से पहले पुरानी पेंशन योजना के तहत कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद एक निश्चित पेंशन के हकदार थे। यह पेंशन सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी के वेतन पर आधारित थी। इस योजना के तहत सेवानिवृत्त कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार के सदस्यों को पेंशन देने का प्रावधान था। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार ने अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को बंद कर दिया था। इसके स्थान पर नई पेंशन योजना लाई गई। इसके बाद राज्यों ने भी नई पेंशन योजना को अपनाया।

 

यह है पुरानी पेंशन योजना (OPS)

1. इस योजना में सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी के वेतन का आधा हिस्सा पेंशन के रूप में दिया जाता है।
2. पुरानी पेंशन योजना के अंतर्गत जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) का प्रावधान है।
3. इस योजना के तहत 20 लाख रुपये तक की ग्रेच्युटी राशि मिलती है।
4. पुरानी पेंशन योजना में सरकारी खजाने से भुगतान किया जाता था।
5. सेवानिवृत्त कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार को पेंशन राशि मिलती है।
6. पुरानी पेंशन योजना में पेंशन के लिए कर्मचारियों के वेतन से कोई पैसा नहीं काटा जाता था।
7. छह माह बाद डीए (महंगाई भत्ता) मिलने का प्रावधान है।

यह भी पढ़े : हिमाचल में पेंशन क्यों बना चुनावी मुद्दा

नई पेंशन योजना ( NPS) में क्या है खास?

1. नई पेंशन योजना (एनपीएस) में कर्मचारी के मूल वेतन का 10% + डीए काटा जाता है।
2. यह योजना शेयर बाजार पर आधारित है। इसलिए यह पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।
3. इस योजना में सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन पाने के लिए पेंशन योजना कोष का 50 प्रतिशत निवेश करना होता है।
4. सेवानिवृत्ति के बाद निश्चित पेंशन की कोई गारंटी नहीं है।
5. चूंकि नई पेंशन योजना शेयर बाजार पर आधारित है, इसलिए यहां कर का भी प्रावधान है।
6. छह माह बाद डीए मिलने का प्रावधान नहीं है।

इसका असर राज्यों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा

अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि नई पेंशन योजना से पुरानी पेंशन योजना की ओर लौटने से राज्यों की वित्तीय स्थिति पर विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है। भारत का संवैधानिक लेखा परीक्षक नियंत्रक  (सीएजी) पुरानी पेंशन योजना के कारण राज्यों के वित्त पर बोझ की जांच कर रहे है। इस बीच कैग का एक वर्ग दीर्घकालिक और अल्पकालिक प्रभावों का पता लगाने के लिए पुरानी पेंशन योजना पर वापस जाने के विभिन्न पहलुओं पर गौर कर रहा है।

श्रमिक संगठनों ने नहीं लिया ऑनलाइन मीटिंग में हिस्सा

लगातार विरोध और जनता के आक्रोश के मद्देनजर राजस्थान और छत्तीसगढ़ सरकार ने लागू पुरानी पेंशन योजना को लागू कर दिया है। दूसरी तरह पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार भी पुरानी पेंशन योजना को लागू करने की तैयारी में है। लेकिन विरोध के बीच केंद्र सरकार की ओर से इस पर कोई टिप्पणी या जवाब सामने नहीं आया है। हाल ही में श्रमिक संगठनों द्वारा केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल करने की मांग की गई थी। इस मुद्दे पर श्रमिक संगठनों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ सामने बैठकर बात करने की मांग की थी। लेकिन इस बैठक को ऑनलाइन रखा गया तो श्रमिकों ने इस मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया।

तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने 2003 में पुरानी पेंशन योजना को बंद करने का फैसला किया और 1 अप्रैल 2004 से ‘नई पेंशन प्रणाली एनपीएस’ शुरू की गई। यह योजना केंद्र सरकार की सेवा (सशस्त्र बलों को छोड़कर) में शामिल होने वाले सभी नए कर्मचारियों के लिए लागू की गई थी। जिसे अब राष्ट्रीय पेंशन योजना कहा जाता है।

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