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सुरेश भाई

 

महान पर्यावरण यौद्धा सुन्दर लाल बहुगुणा के निधन से मानव और प्रकृति को बचाने की एक मजबूत आवाज खामोश हो गई है।वही एक मात्र यौद्धा रहे हैं जिन्होंने टिहरी बांध का विरोध करते समय अपने देश को-गंगा को अविरल बहने दो,गंगा को निर्मल रहने दो का मंत्र अस्सी के दशक में दे दिया था।

चिपको जैसे आन्दोलन को विचार, संघर्ष, साहित्य देने का काम उन्होंने ब्यास के समान भूमिका निभाई है। सुंदर लाल बहुगुणा एक महात्मा थे और वे महात्मा गांधी के विचार के अनुसार ही पर्यावरण बचाने की अहिंसक लडाई लडते रहें हैं।उन्होंने कई बार सफतलाएं हासिल की और सरकारें हारती रही हैं विशेषकर तब जब उनके द्वारा किये गये धरने, प्रदर्शन, उपवास के समय सरकार उनकी आवाज को दबाने के लिए उनकी मांगो को मान लेती थी।लेकिन फिर सरकार कुछ ही समय में फैसले वापस लेकर हार जाती थी।सुंदर लाल बहुगुणा कही बार कहते थे कि हिमालय का विकास मैदानी विकास के माडल से संचालित करेंगे तो कुछ ही समय में हिमालय की जलवायु जैसे-हवा,पानी, मिट्टी की बर्वादी बढने लगेगी, वह आज हो रही है। उनकी एक विशेषता यह रही है कि उन्होंने ने कभी भी पर्यावरण बचाने के काम के लिए सरकारी तंत्र का स्तेमाल नहीं किया है, वे कहते थे कि जब तक समाज अपनी प्रकृति की अहमियत को नहीं समझेगा तब तक सरकारी मशीनरी से प्रकृति विनाश नहीं रोका जा सकता है।इसके लिए उन्होंने जीवन भर संघर्ष किया है।

टिहरी बांध विरोध सन् 1994 -1997 के दौरान हम उनके साथ भागीरथी के किनारे धरने पर रहे। इसी दौरान दो बार पुलिस की बर्वरता पूर्ण लाठियां हमारे उपर पडी और पुलिस हिरासत में भी रहना पड़ा है।मैंने उनसे आशीर्वाद लेकर टिहरी बांध के प्रभावित क्षेत्र का दो बार 15-15 दिन का भ्रमण किया था।और टिहरी में बांध के खिलाफ कई रैलियां आयोजित करवाई गई थी।सुंदर लाल बहुगुणा के उपवास की सूचना हर रोज मिडिया को उपलब्ध कराने का काम भी हमने किया था। देश की आजादी के बाद बहुगुणा जी ने हरिजनों को मंदिर प्रवेश, छुआछूत निवारण, शराब बंदी, चिपको और बडे बांधों के खिलाफ उनका संघर्ष हमेशा याद किया जायेगा। समाज और पर्यावरण के लिए दर्जनों बार जेल, उपवास जैसे महान कार्यों के बल पर ही वे विश्व में एक बडे पर्यावरण नेता के रूप में उभर आये हैं। जीवन भर एक सामान्य कार्यकर्ता की तरह उपेक्षा, अपमान, असहयोग, अलगाव सहन करते हुए उन्होंने हिमालय की घाटियों से लेकर चौटी तक की यात्रा की है। नई पीढी को उनको समय रहते पढ लेना चाहिए ताकि बहुगुणा जैसा तपस्वी जीवन जीकर पर्यावरण की रक्षा की जा सके। उत्तरकाशी में उन्होंने सन् सत्तर के दशक में सर्वोदय आश्रम की स्थापना उजेली में की थी।इसी दौरान गांधी आश्रम और घनश्याम शैलानी के साथ मिलकर गंगोत्री ग्राम स्वराज्य मंडल और सुरेंद्र भट्ट के साथ मिलकर पुरोला ग्राम स्वराज्य मंडल की स्थापना की थी।चंडी प्रसाद भट्ट ,भवानी भाई उनके साथ हर यात्रा में शामिल रहे । जिसके द्वारा प्राकृतिक संसाधनों से आजीविका और खादी का काम चलता था। बाद में इन सब लोगों ने मिलकर कई स्थानों पर चिपको आंदोलन भी किया।

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