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खतरे में निजी विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता

उत्तर प्रदेश के शिक्षा जगत में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। यह बदलाव उन युवाओं के सपने को चोट पहुंचाएगा, जिन्होंने अपने आइडियाज से नई दुनिया में भारतीय डंका बजाने को ठाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी यही सपना है कि देश की युवा ब्रेन पूरी दुनिया को जीत ले। मगर प्रधानमंत्री का इस सपने को उत्तर प्रदेश में ही झटका लगने वाला है। प्रदेश सरकार निजी विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को खत्म करने वाली है, जहां सबसे ज्यादा ब्रेन तराशा जाता है।
उत्तर प्रदेश सरकार ‘यूपी प्राइवेट यूनिर्सिटी बिल’ तैयार की है। जिसे पब्लिक डोमेन में रखा गया है और लोगों से सुझाव मांगा गया है। यह बिल अगर कानून बन गया तो निजी विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म हो जाएगी। उत्तर भारत में शिक्षा का हब बन रहे प्रदेश में शिक्षा का विस्तार रुक जाएगा। शिक्षा क्षेत्र में नए निवेशक का आना बंद हो जाएगा। प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों ने सरकार को पत्र लिखकर ऐसी ही चिंताएं जताई हैं। उन्होंने सरकार से अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि सरकार निजी विश्वविद्यालयों से किए गए स्वायत्तता के वादे से भी पीछे हट रही है।
निजी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों का कहना है कि एक वक्त था जब उत्तर प्रदेश में युवा बेहतर जिंदगी के लिए आधुनिक शिक्षा की तलाश में थे। इन युवाओं के सपनों को पंख नहीं लग पा रहे थे। क्योंकि प्रदेश में पर्याप्त विश्वविद्यालय नहीं थे। राज्य में उच्च शिक्षा का आधारभूत ढांचा तक नहीं था। बेहतर गुणवत्ता वाले शिक्षकों की खासी कमी थी। शिक्षा तंत्र में लालफीताशाही हावी थी।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव लाने के उद्देश्य से एक के बाद एक निजी विश्वविद्यालय प्रदेश में खुलने शुरू हुए। शैक्षिक संस्थानों में स्वायत्तता और उन्हें आजादी से संचालित किए जाने के वादे ने निजी निवेशकों में विश्वास बढ़ा। उन्होंने यूपी के शिक्षा क्षेत्र में बड़ा निवेश किया। ये विश्वविद्यालय बेहतर नतीजे देने के लिए प्रतिबद्ध थे। शिक्षा के बेहतर भविष्य को ध्यान में रख कर बनाई गई राज्य सरकार की नीति ने उनका काफी उत्साह भी बढ़ाया। हालांकि यह उत्साह ज्यादा दिन कायम नहीं रहा। राज्य सरकार के ‘यूपी प्राइवेट यूनिर्सिटी बिल’ कानून बनते ही यह खत्म हो जाएगा। प्राइवेट यूनिवर्सिटीज ऑफ उत्तर प्रदेश वेलफेयर एसोसिएशन ने हाल में उच्च शिक्षा के विशेष सचिव को इस संबंध में पत्र लिखकर अपनी चिंताओं की जानकारी दी है।
निजी विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि का कहना है कि नया ऐक्ट उन प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को रेग्युलेट और कंट्रोल करेगा, जिन्हें इंडिपेंडेंट ऐक्ट्स के तहत स्थापित और चलाया जा रहा है। प्रदेश में पिछले कई वर्षों से विशेष ऐक्ट के तहत 27 निजी विश्वविद्यालय सफलतापूर्वक चल रहे हैं। नया ऐक्ट राज्य सरकार के उस वादे के विपरीत है, जिसमें इन विश्वविद्यालयों को स्वायत्तता देने की बात कही गई थी।
एक निजी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ने कहा कि सरकार यूपी को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा का हब बनाने की बात करती है। लेकिन वह निजी विश्वविद्यालयों के हाथ-पैर बांध रही है। यह ऐक्ट लागू हुआ तो लाइसेंस राज की वापसी हो जाएगी। जब निजी विश्वविद्यालय खुल रहे थे तब उन्हें आश्वस्त किया गया था कि उनके फैसले, नियम और नीतियां सभी स्वायत्त होंगी, लेकिन नए बिल के मुताबिक, सारे फैसले लेने वाली अकैडमिक काउंसिल में एक सरकारी अधिकारी होना अनिवार्य होगा। साथ ही राज्यपाल को वाइस चांसलर को हटाने की शक्ति मिल जाएगी। इससे सारे निजी विश्वविद्यालय आशंकित है कि उनके निर्णय लेने के लिए कुछ बचेगा भी। साथ ही बिल भ्रष्टाचार को जन्म देने वाला भी साबित हो सकता है।
प्रोफेशनल कोर्सेज को मंजूरी देने वाले यूजीसी एवं अन्य निकाय यह जांचने में सक्षम हैं कि कोई कोर्स सुचारू रूप चल रहा है या नहीं। इसके अलावा वे विश्वविद्यालय के अन्य मसलों की भी पड़ताल कर सकते हैं। शिकायत होने पर राज्य सरकार किसी भी विश्वविद्यालय का निरीक्षण कर सकती है। कैंपस स्थापित करते समय विश्वविद्यालयों ने यह सहमति व्यक्त की थी। अगर यह प्रस्ताव लागू हो जाता है तो संयुक्त सचिव के स्तर का अफसर पूरे विश्वविद्यालय का संचालन करेगा और निजी विश्वविद्यालय रेग्युलेटरी बॉडी की दया पर निर्भर रहेंगे।

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