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वर्तमान सरकार किसान और मज़दूर विरोधी है : मेधा पाटकर

सरदार सरोवर बांध से जल निकासी बंद करने के गुजरात सरकार के फैसले के कारण मध्यप्रदेश के बड़वानी सहित आसपास के 192 गांवों में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। गुजरात सरकार के इस फैसले के विरोध में पाटकर स्थानीय ग्रामीणों के साथ आंदोलन कर रही थीं।
मेधा पाटकर ने गुजरात में निर्मित सरदार सरोवर बांध के विस्थापितों के उचित पुनर्वास और बांध के गेट खोलने की मांग को लेकर मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले के छोटा बड़दा गांव में आठ दिनों तक अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन किया। मेधा पाटकर के साथ आंदोलनरत हजारों ग्रामीणों की सेहत में लगातार गिरावट के बाद उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री को इस मामले में तत्काल दखल देना चाहिए।
नर्मदा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण प्रभावित इलाकों के लगभग 32 हजार परिवारों पर अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है। विकास लोगों की भलाई के लिए होना चाहिए ना कि उनका जीवन अस्थिर करने के लिए। इसके मद्देनजर ही पाटकर पिछले आठ दिन से भूख हड़ताल पर थीं। उनकी सेहत दिन प्रतिदिन बिगड़ रही थी।
मेधा पाटकर ने बड़वानी में 9 दिनों के बाद अपना अनिश्चितकालीन उपवास समाप्त किया। वह सरदार सरोवर बांध के शटर बंद करने और जल स्तर को 138.68 मीटर करने के गुजरात सरकार के कदम का विरोध कर रही थी। नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर की तबीयत बिगड़ने का हवाला देते हुए भाकपा के राज्यसभा सदस्य बिनय विस्वम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की थी।
क्या है पूरा मामला
मध्यप्रदेश के दो जिलों में सरदार सरोवर बांध के बैक वॉटर का स्तर 128 मीटर के पार पहुंचने से निचले इलाकों में जल भराव हो गया और 300 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। ये इलाके गुजरात में नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध के डूब क्षेत्र में आते हैं। धार और बड़वानी जिलों में अब तक इन इलाकों के 300 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाया जा चुका है।धार और बड़वानी जिलों में बांध के बैक वॉटर का स्तर पिछ्ले कई दिनों से धीरे-धीरे बढ़ रहा है और वहां एकाएक बाढ़ आने जैसी कोई स्थिति नहीं है। जल भराव के कारण जिन निचले इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, उनमें चिखल्दा गांव और निसरपुर कस्बा शामिल है।
बहरहाल, सूत्रों के मुताबिक बांध परियोजना से विस्थापित होने वाले हजारों लोग इस नदी के किनारों की अपनी मूल बसाहटों में अब भी डटे हैं।सरकारी अमला इन लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से डूब क्षेत्र खाली करने की गुजारिश कर रहा है।
  बड़वानी जिले के राजघाट गांव में बांध के बैक वॉटर का स्तर खतरे का निशान पार करते हुए 128 मीटर के पार पहुंच चुका है।
इस गांव में खतरे का निशान 123.28 मीटर पर है।
 जलस्तर बढ़ने से बड़वानी और धार जिलों के जोड़ने वाला राजघाट का पुराना पुल पहले ही डूब चुका है।
 गुजरात में बने सरदार सरोवर बांध में भरे पानी का स्तर भी 128 मीटर को पार कर गया है, जबकि इस बांध को लगभग 138 मीटर की अधिकतम ऊंचाई तक भरा जा सकता है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सरदार सरोवर बांध को करीब 138 मीटर की अधिकतम ऊंचाई तक भरे जाने से आने वाली डूब के कारण मध्यप्रदेश के 141 गांवों के 18,386 परिवार प्रभावित होंगे। सूबे में बांध विस्थापितों के लिये करीब 3,000 अस्थायी आवासों और 88 स्थायी पुनर्वास स्थलों का निर्माण किया गया है।नर्मदा बचाओ आंदोलन का दावा है कि बांध को करीब 138 मीटर की अधिकतम ऊंचाई तक भरे जाने की स्थिति में सूबे के 192 गांवों और एक कस्बे के करीब 40,000 परिवारों को विस्थापन की त्रासदी झोलनी पड़ेगी।
संगठन का यह भी आरोप है कि सभी बांध विस्थापितों को न तो सही मुआवजा मिला है, न ही उनके उचित पुनर्वास के इंतजाम किये गये हैं।
विस्थापन की स्थिति बनने से आक्रोशित लोगों ने नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर के नेतृत्व में छोटा बारदा गांव में जल सत्याग्रह आंदोलन किया।हालांकि सरकार की ओर से जानमाल की रक्षा सुरक्षा के लिए 12 नौका, 4 बोट और एनडीआरएएफ की टीम सक्रिय है।
नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर इस मामले में लगातार डंटी हुई है उनके द्वारा बड़वानी जिले में किए जा रहे अनशन के समर्थन में सामाजिक संगठन से जुड़े साथियों ने एक दिन का उपवास भी रखा। इस अवसर पर राजातालाब में सभा आयोजित की गई। सभा में मनरेगा मजदूर यूनियन व पूर्वांचल किसान यूनियन से जुड़े तमाम गांव के सैकड़ों मजदूर,किसान व नौजवान शामिल हुए।
 उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार केवल कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से सरदार सरोवर का जलस्तर 139 मीटर तक ले जाना चाहती है, जिसके विरोध में मेधा पाटकर पीड़ित परिवारों संग अनशन पर बैठी।  उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो हमलोग मेधा पाटकर के समर्थन में सड़को पर भी उतरेंगे।

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