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पशुपति नाथ के पथ पर पशुओं से अत्याचार

गत वर्ष चारधाम यात्रा पर खच्चरों की मौत पर हाईकोर्ट नैनीताल द्वारा सरकार से जवाब तलब किया गया। साथ ही इस बाबत नीति बनाने के भी निर्देश दिए। चारधाम यात्रा शुरू होने से 6 महीने पहले ही इस बाबत 16 बार समीक्षा बैठक की गई जिसके बाद 25 सदस्यों की रेवेन्यू, डॉक्टर और पुलिस के जवानों की एक टीम बनाई गई और दावा किया गया कि यात्रा में पशुओं के साथ क्रूरता नहीं होने दी जाएगी, बावजूद इसके घोड़ा-खच्चरों के साथ निर्ममता और अमानवीयता की हदें पार की जा रही हैं। जिसे इन दिनों वायरल हो रही वीडियो में देखा जा सकता है। जिसमें पशुओं से अधिक काम कराने के लिए जबरन सिगरेट से ड्रग्स तक पिलाई जा रही है। कई खच्चरों को बीमार हालत में जबरन यात्रियों को ढोने के काम में लगाया जा रहा है जिससे उनकी मौत हो रही है। भाजपा सांसद मेनका गांधी ने भी इस पर चिंता जाहिर की है

तेईस जून 2023 को सोशल मीडिया पर उत्तराखण्ड से जुड़ा एक वीडियो तेजी से वायरल हुई जिसमें दो लोग एक खच्चर को जबरदस्ती सिगरेट के जरिए गांजा पिला रहे थे। वह जानवर बार-बार छटपटाता है लेकिन वे लोग उसे पकड़ कर बहुत ही निर्दयता से उसे नशीला पदार्थ दे देते हैं। इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोग इन व्यक्तियों की निंदा कर इन्हें प्रशासन द्वारा कड़ी सजा देने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही अपने-अपने तर्क भी रख रहे हैं। इसके अगले दिन एक और वीडियो सामने आया जिसमें एक जगह खच्चर और उसके मालिक तो अलग थे लेकिन खच्चर के साथ हो रही क्रूरता एक जैसी थी। इस वीडियो में भी खच्चर को जबरदस्ती सिगरेट का सेवन कराया जा रहा था। इन दोनों वीडियो ने सोशल मीडिया पर हंगामा कर दिया है जिसको लेकर पुलिस और पशु सुरक्षा आयोग भी सामने आए हैं और इसकी जांच पड़ताल में जुट गए हैं।

इस मामले में रुद्रप्रयाग पुलिस ने वीडियो की पड़ताल की है। इनमें से एक वीडियो केदारनाथ धाम यात्रा के पैदल मार्ग के पड़ाव भीमबली से ऊपर छोटी लिनचोली स्थित थारू कैम्प नामक स्थान का है। इस संबंध में दी गयी शिकायत के आधार पर
संबंधित घोड़ा संचालक के विरुद्ध आईपीसी व पशु क्रूरता अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज कर किया गया है। रूद्रप्रयाग के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी अशोक पंवार के अनुसार पशु क्रूरता सिद्ध होने पर आरोपियों को कड़ी सजा दी जाएगी। इस प्रकरण में गत 26 जून को दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

चारधाम यात्रा तीर्थयात्रा के दौरान धर्मस्थलों तक पहुंचने के लिए कई माध्यमों का उपयोग किया जाता है। केदारनाथ पहुंचने के लिए गौरीकुंड तक वाहनों के बाद तकरीबन 18 किमी की पैदल चढ़ाई होती है। जिसको पार करने के लिए पैदल, डंडी-कंडी या घोड़े-खच्चरों का इस्तेमाल किया जाता है। इन्हीं साधनों का प्रयोग वापसी के समय भी किया जाता है। इन यात्राओं मे अक्सर देखा गया है कि खच्चर, घोड़े और गधों के साथ क्रूरता की जाती है। इनके साथ होने वाली क्रूरता की वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर वायरल होती आई है, बावजूद इसके जानवरों की इन हालातों के लिए कोई पुख्ता कदम नहीं उठाए गए हैं। ऐसा नहीं है कि यह पहली बार हो रहा है, बल्कि ऐसा कई सालों से लगातार होता आ रहा है।
इस मामले को समझने के लिए 2019 का एक प्रकरण समझना जरूरी है। जब आचार्य प्रशांत (लेखक व अद्वैत शिक्षक) केदारनाथ पशुपतिनाथ के दर्शन के लिए गए थे जिसकी यात्रा के दौरान उन्होंने कुछ ऐसा देखा कि उनकी आत्मा कराह उठी। उन्होंने पहली बार इस धार्मिक यात्रा के दौरान निर्ममता देखी जिसका वीडियो बनाया और ‘पशुओं पर क्रूरता करते पशुपति तक पहुंचोगे?’ नामक शीर्षक से इस वीडियो में उन्होंने वह मंजर रिकॉर्ड करके अपलोड किया है। इसमें जब एक बेजुबान जानवर को मृत्यु तक पहुंचा दिया। उसके मालिक ने उसे लावारिस छोड़ दिया, न उसका पहले ख्याल किया और न मौत के बाद। उन्होंने ऐसे कई वाक्यों का जिक्र इस वीडियो में किया है। आचार्य ने न केवल पशु चालक, बल्कि उसकी सवारी करने वाले भक्तों को भी इसका दोषी बताया है कि किस तरह न केवल वृद्ध बल्कि युवाओं द्वारा भी यह यात्रा पशुओं की पीठ पर बैठ कर की जाती है। जबकि ईश्वर की प्राप्ति आपको तभी होती है जब आप उसे स्वयं पूर्ण करते हैं। आपकी ऊर्जा उसमंे लगती है, आप थकते हैं लेकिन यदि आप ईश्वर को प्राप्त करने के लिए मेहनत ही नहीं करेंगे तो वह कैसे मिलेगा?

उधर घोड़े-खच्चरों के साथ क्रूरतापूर्वक मामले पर पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने चिंता जताई है। मेनका गांधी की अपील पर उत्तराखण्ड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज और पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने इस घटना का संज्ञान लिया है। इसके बाद पशु अधिकार संगठन को निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई घोड़ा-खच्चर संचालक नियमों की अनदेखी करता है तो उसके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। यही नहीं संचालक की लापरवाही से किसी भी घोड़े-खच्चर की मृत्यु होती है तो उसकी बीमा राशि भी रोकी जाएगी। साथ ही एक यह भी नियम बनाया गया जिसके अनुसार केदारनाथ यात्रा में अब प्रतिदिन 50 प्रतिशत घोड़े-खच्चरों का संचालन किया जाएगा। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने भी इस बाबत सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर को निर्देश दिए कि केदारनाथ में संचालित घोड़े-खच्चरों के मामले में ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए कि भोजन करने के बाद घोड़े-खच्चरों को कम से कम तीन-चार घंटे आराम मिले। इससे यात्रा मार्ग पर इनकी संख्या नियंत्रित हो सकेगी।

पशुओं पर निर्ममता और क्रूरता के मामले में कई सामाजिक संगठन सामने आए हैं जिनमें एक है ‘नवोत्थान सोसाइटी’। इस सोसाइटी ने केदारनाथ में घोड़ों और खच्चरों की मौत से आहत होकर सरकार से इनके संचालन एवं रख-रखाव के लिए गाइड लाइन बनाने की मांग करते हुए कहा है कि गौरीकुंड से घोड़ों- खच्चरों से केदारनाथ की यात्रा में चार से पांच घंटे लगते हैं। इस पैदल मार्ग में कहीं पानी का कुंड नहीं है, खच्चरों के लिए पानी के कुंड लगाए जाएं। ज्यादा ठंड भी घोड़ों-खच्चरों की मौत का कारण बन रही है इसलिए हर 15 दिन में उनका मेडिकल चेकअप कराया जाए और पीने के लिए गर्म पानी की व्यवस्था की जाए। साथ ही उनके खान-पान की भी जांच की जाए। खच्चरों के लिए रहने की कोई समुचित व्यवस्था भी नहीं किया जाता है और न ही इनके मरने के बाद विधिवत दाह संस्कार। केदारनाथ पैदल मार्ग पर घोड़े-खच्चरों के मरने के बाद उनके मालिक उन्हें वहीं पर फेंक रहे हैं, जो सीधे मंदाकिनी नदी में गिरकर नदी को प्रदूषित कर रहे हैं। अभी तक लाखों तीर्थयात्री घोड़े-खच्चरों से अपनी यात्रा कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि रुपए कमाने के लिए घोड़े-खच्चरों से एक दिन में गौरीकुंड से केदारनाथ के 2 से 3 चक्कर लगवाए जा रहे हैं जिससे उन्हें रास्ते में पलभर भी आराम नहीं मिल पा रहा है, जिस कारण वह थकान से चूर-चूर होकर दर्दनाक मौत का शिकार हो रहे हैं।

चारधाम यात्रा मार्ग पर पशुओं के साथ क्रूरता मामले में कई सेलिब्रिटी भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर चुके हैं। फिल्म अभिनेत्री रवीना टंडन ने इस बाबत ट्वीट कर लिखा कि ‘क्या हम हमारे पवित्र स्थानों में घोड़ों के साथ होने वाले लगातार अत्याचार को रोक नहीं सकते?’ उन्होंने उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पीएमओ इंडिया को टैग करते हुए लिखा है कि ‘क्या ऐसे लोगों को अरेस्ट नहीं किया जा सकता है?’ इसके अलावा इंस्टाग्राम पर चारधाम यात्रा करने गई एक युवती ने भी एक वीडियो जारी करते हुए दावा किया है कि खच्चर मालिक अत्यधिक धन कमाने के लालच में खच्चर-घोड़ों को नशा कराते हैं ताकि खच्चर बिना दर्द महसूस करे लगातार काम करते रहे और सवारियां ढो सकें, लेकिन जैसे ही उनके के शरीर से नशे का प्रभाव उतरता है वे दर्द से कहराने लगते हैं और कभी -कभी चल भी नहीं पाते, इससे वे रास्ते में ही ढेर हो जाते हैं। न केवल खच्चर बल्कि खच्चर मालिक भी नशे में होते हुए काम करते हैं। खच्चर के काम न करने पर उन्हें बड़ी बेरहमी से पीटते हैं जिसके कारण भी खच्चर की मौत हो जाती है। यह क्रूरता जानवरों के साथ कई सालों से लगातार हो रही है। एक अन्य महिला ने अपील करते हुए लिखा कि ‘यदि आप या आपके संबंधी चारधाम यात्रा के लिए स्वस्थ नहीं हैं या वह पैदल यात्रा के लिए सक्षम नहीं हैं तो हम सबकी अपील है कि आप चारधाम की यात्रा के लिए न जाए ताकि इन जानवरों के साथ इतना दुर्व्यवहार न हो।’

क्या है पशु क्रूरता कानून
भारत में पशुओं के खिलाफ क्रूरता को रोकने के लिए साल 1960 में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम लाया गया था। साथ ही इस एक्ट की धारा-4 के तहत साल 1962 में भारतीय पशु कल्याण बोर्ड का गठन किया गया। इस अधिनियम का उद्देश्य पशुओं को अनावश्यक सजा या जानवरों के उत्पीड़न की प्रवृत्ति को रोकना है। इन मामलों को लेकर कई तरह के प्रावधान इस एक्ट में शामिल हैं। जैसे, अगर कोई पशु मालिक अपने पालतू जानवर को आवारा छोड़ देता है, या उसका इलाज नहीं कराता, भूखा-प्यासा रखता है तब ऐसा व्यक्ति पशु क्रूरता का अपराधी होगा। पशुओं को किसी भी चीज की कमी होना सही नहीं पाया गया है। पशुओं को हमेशा पर्याप्त भोजन, पानी, घर देना उचित होगा। किसी भी पशु को परेशान करना या उसको बांधे रखना दंडनीय अपराध है। इसके साथ ही कई बार पशुओं को परिवहन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है जिससे उन्हें असहनीय पीड़ा का एहसास होता है। उन्हें एक जगह से दूसरी जगह लाने ले जाने के लिए उपयोग किया जाता है। व्हीकल एक्ट और पीसी एक्ट के तहत ऐसा करना दंडनीय अपराध है।

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