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थम नहीं रहा महिलाओं के खिलाफ अपराध

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लिव इन पार्टनर श्रद्धा वॉल्कर की दिल दहला देने वाली हत्या का आरोपी आफताब पूनावाला ने अपना जुर्म तो कबूल कर लिया है लेकिन पुलिस को आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिल पाए हैं। श्रद्धा की ही तरह कई और लड़कियां ऐसी हैं जो देश के शहरों से लेकर गांवों तक ऐसी हिंसक अपराध का शिकार हो रही हैं और ये सब करने वाले उनके परिचितों में से ही हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के डाटा के अनुसार देश में 96 प्रतिशत बलात्कार के दर्ज मामलों में महिला के परिचितों ने ही इस कृत्य को अंजाम दिया है। साल 2021 के डेटा के अनुसार 30 हजार 571 मामलों में वारदात करने वाला महिला का जानकार था। 2 हजार 424 मामलों में महिला के परिवार के किसी सदस्य ने ही उसके साथ बलात्कार किया। पारिवारिक मित्र, पड़ोसी या अन्य जानकार द्वारा किए गए रेप के 15 हजार 196 मामले दर्ज किए गए

देश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अब सड़क से लेकर संसद तक राजनीतिक माहौल गरमाता जा रहा है। हर राजनीतिक पार्टी के नुमाइंदे अपने-अपने हिसाब सेमहिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुझाव दे रहे हैं। कठोर कानून भी बने हैं, लेकिन इसमें देखने वाली अहम बात यह है कि महिलाओं पर अत्याचार रुकने के बजाए दिन-प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे हैं। सोचने का गंभीर विषय है कि हैवानियत को अंजाम देने वालों में अधिकतर आरोपी पीड़िताओं के जानकार ही होते हैं।

हाल ही में देश की राजधानी दिल्ली में लिव इन पार्टनर श्रद्धा वॉल्कर की दिल दहला देने वाली हत्या का आरोपी आफताब पूनावाला ने अपना जुर्म तो कबूल कर लिया है लेकिन पुलिस को आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिल पाए हैं। श्रद्धा की ही तरह कई और लड़कियां ऐसी हैं जो भारत के शहरों से लेकर गांवों तक ऐसी हिंसक अपराध का शिकार हो रही हैं और उनके साथ ये सब करने वाले उनके परिचितों में से ही हैं। कहीं प्रेमी के हाथों प्रेमिका को मौत की नींद सुला दिया जा रहा है तो कहीं परिवार ही अपनी बेटी को उनकी मर्जी के खिलाफ जाने पर मौत की घाट उतार रहा है।

श्रद्धा के अलावा कई ऐसे मामले भी हैं जिनकी रिपोर्ट तक नहीं हो पाती। ग्रामीण इलाकों की महिलाओं के हालात तो और खराब हैं क्योंकि ग्रामीण इलाकों की खबरों की पहुंच प्रमुख अखबारों और टीवी चौनलों तक नहीं हो पाती हैं। यहां पुलिस को भी महिलाओं के खिलाफ अपराध के बारे में पता नहीं चल पाता है। राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के खिलाफ अपराध में कमी नहीं आई है। साल 2021 में 2020 के मुकाबले 15.3 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है। साल 2021 में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के 4 लाख 28 हजार 278 मामले सामने आए जबकि 2020 में 3 लाख 71 हजार 503 मामले ही रिपोर्ट हुए थे। अगस्त में जारी इस रिपोर्ट के अनुसार प्रति एक लाख की आबादी पर महिलाओं के खिलाफ अपराध 2020 में 56.5 फीसदी से बढ़कर 2021 में 64.5 फीसदी हो गए हैं।

एक अन्य रिपोर्ट में एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि देश में सबसे अधिक महिलाओं के कातिल उनके अपने परिचित ही थे। कई रिपोर्ट्स भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि महिलाओं के साथ सबसे ज्यादा अपराध उनके अपने लोग ही कर रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के डाटा के अनुसार देश में 96 प्रतिशत बलात्कार के दर्ज मामलों में महिला के परिचितों ने ही उनके साथ इस कृत्य को अंजाम दिया है। एनसीआरबी के साल 2021 के डेटा के अनुसार 30 हजार 571 मामलों में वारदात करने वाला महिला का जानकार था। 2 हजार 424 मामलों में महिला के परिवार के किसी सदस्य ने ही उसके साथ बलात्कार किया। पारिवारिक मित्र, पड़ोसी या अन्य जानकार द्वारा किए गए रेप के 15 हजार 196 मामले दर्ज किए गए। महिला के मित्र, लिव इन पार्टनर, अलग हुए पति और शादी के वायदे के बहाने बलात्कार के 12 हजार 951 मामले थे।

इन मामलों में राजस्थान (6074) शीर्ष पर है। केवल पश्चिम बंगाल में किसी परिचित द्वारा रेप करने की दर 90 प्रतिशत से नीचे है। इसके अलावा देश के सभी राज्यों में यह दर 90 और 100 प्रतिशत तक है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक पांच राज्यों महाराष्ट्र, मिजोरम, मणिपुर, नागालैंड और सिक्किम में 100 प्रतिशत बलात्कार के मामलों में जानकार व्यक्ति ने ही अपराध को अंजाम दिया है। महिलाओं के खिलाफ होने वाली रेप की घटनाओं में पंजाब, छत्तीसगढ़, केरल, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा और तेलगांना में 99 प्रतिशत आरोपी परिचित थे। महिलाएं सबसे ज्यादा घर में अपने करीबियों के बीच असुरक्षित हैं इस बात की पुष्टि खुद सरकार द्वारा जारी रिपोर्ट साबित करती है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के अनुसार भी भारतीय महिलाएं अपनी शादी में यौन हिंसा का शिकार होती हैं। 18-49 आयु वर्ग की महिलाओं नें अपने पति द्वारा यौन हिंसा होने की बात स्वीकारी है। इस आयुवर्ग की 83 प्रतिशत महिलाओं ने पति द्वारा यौन हिंसा की रिपोर्ट की है। सर्वे में शामिल 82 प्रतिशत महिलाओं ने अपने पति को ही अपने साथ होने वाली हिंसा का अपराधी बताया है। सर्वे में 13 प्रतिशत रिपोर्ट पूर्व पति द्वारा यौन हिंसा के केस भी दर्ज किए गए हैं।

श्रद्धा हत्याकांड
दिल्ली में श्रद्धा वॉल्कर और आफताब पूनावाला लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे थे। दोनों साल 2019 से इस रिश्ते में थे। मुंबई के एक कॉल सेंटर में नौकरी के दौरान दोनों की मुलाकात हुई थी। प्यार बढ़ा तो दोनों ने मुंबई से दिल्ली आने के बाद दक्षिण दिल्ली में किराए के मकान में रहना शुरू कर दिया। लेकिन कुछ ही दिनों में इस रिश्ते को लेकर चौंकाने वाला खुलासा सामने आया। आरोप है कि 18 मई को आफताब ने श्रद्धा की हत्या की और शव के 35 टुकड़े कर इस रिश्ते को खत्म कर दिया। इस मामले पर पुलिस का कहना है कि कई दिनों तक उसने शव के टुकड़े को फ्रिज में स्टोर किया और उसके बाद देर रात शव के टुकड़ों को महरौली के जंगल में एक एक कर फेंकता रहा। जब मुंबई पुलिस की टीम महरौली थाने में पहुंची और श्रद्धा के बारे में बताया कि वह आफताब नाम के युवक के साथ रह रही है लेकिन उसका पता नहीं चल पा रहा तब पुलिस ने आफताब से पूछताछ की और इस हत्याकांड का खुलासा हुआ।

शुरू में आफताब ने पुलिस को बताया कि श्रद्धा उसके साथ काफी दिनों से नहीं थी। आफताब ने कई बार अपने बयान बदलकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। लेकिन पुलिस के सख्ती दिखाने पर उसने इस हत्याकांड का खुलासा किया जो बेहद डरावना था।

कहीं पिता तो कहीं ब्वॉयफ्रेंड कातिल
भारत में आए दिन महिलाओं के खिलाफ अपराध हो रहे हैं। कई बार उनके जानने वाले ही हत्या जैसी वारदात में शामिल होते हैं। बीते दिनों एक और घटना में दिल्ली की रहने वाली 21 वर्षीय आयुषी यादव की हत्या कर दी गई। जिसका आरोप आयुषी के पिता पर लगा है। पिछले हफ्ते उत्तर प्रदेश के मथुरा में यमुना एक्सप्रेस वे पर एक सूटकेस में आयुषी का खून से लथपथ शव पुलिस को मिला था। पुलिस द्वारा लड़की के पिता को हिरासत में ले लिया गया है।

दूसरी ओर पुलिस ने यूपी के आजमगढ़ से एक व्यक्ति को महिला की हत्या और शव के छह टुकड़े करने के आरोप में हिरासत में लिया है। खबरों के अनुसार महिला की हत्या के बाद आरोपी ने उसके शव को कुएं में फेंक दिया था। पुलिस का कहना है कि आरोपी और मृतक महिला पहले संबंध में थे और जब महिला की शादी हो गई तो वह महिला पर शादी तोड़ने का दबाव बनाया जा रहा था। फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करके आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

घरेलू हिंसा पितृसत्तात्मक परवरिश
‘समाज में परिचितों द्वारा महिलाओं के साथ हिंसा की बात बिल्कुल सही है। पिछले साल रिपोर्टेड केसों में यौन अपराध में 96 फीसद आरोपी परिचित या जान पहचान वाले थे। इनमें या तो परिवार के सदस्य थे या वे जिन्हें सर्वाइवर पहले से जानती थी और दूसरी बात यह आप जो देख रही हैं आरोपी परिचित होना, ये वे हैं जो रिपोर्ट हुए हैं या पुलिस तक पहुंचे हैं। यौन हिंसा की घटनाओं का केवल एक छोटा-सा हिस्सा ही पुलिस तक पहुंच पाता है। अनुमानित 99 फीसदी यौन हिंसा के मामलों की रिपोर्ट नहीं की जाती है और ऐसे अधिकांश मामलों में अपराधी पीड़िता का पति या परिचित होता है। इसके पीछे जो मानसिकता बनी हुई है वह यह है कि हमारे घर के भीतर जो हिंसा होती है वह पितृसत्तात्मक परवरिश है वह यह कहती है कि सर्वाइवर को चुप रहना चाहिए। क्योंकि यह बात अगर घर से बाहर जाएगी तो घर की इज्जत चली जाएगी।जब बात न्याय की आती है तो सबसे पहली प्राथमिकता इज्जत बचाना माना जाता है और रिपोर्ट दर्ज नहीं की जाती है। यदि रिपोर्ट कर भी दी जाए तो न्यायिक प्रक्रिया भी विक्टिम ब्लैंमिंग से भरी होती है। इसका एक उदहारण ऑनर किलिंग का जो एक केस हुआ है। जिसमें पिता ने अपनी बेटी का कत्ल कर दिया। इसके पीछे की मानसिकता की लड़कियां अपनी मर्जी से शादी, नौकरी और पार्टनर चुन लेगी तो पितृसत्तात्मक समाज को लगता है कि वह उनकी सत्ता को चुनौती दे रही हैं।

श्रद्धा का केस देखें तो वह ऑनर किलिंग नहीं था। पर एक पुरुष अपनी पार्टनर पर अपनी सत्ता स्थापित करने के लिए कत्ल कर देता है। मीडिया रिपोर्ट में कारण शादी और कुछ खर्चों को बताया गया है। वहां उसने अपनी सत्ता स्थापित करने का प्रयास किया। लेकिन अब सर्वाइवर को ही दोषी ठहराया जा रहा है जबकि उसकी मौत हो चुकी है। मीडिया ने इसे इस तरह कवर किया कि श्रद्धा अपनी मौत की खुद जिम्मेदार है। कहा जा रहा है श्रद्धा को माता-पिता के पास ही रहना चाहिए था लेकिन अगर दूसरे केस को देखें तो पिता ने ही अपनी बेटी को मार डाला तो यह तो यही खारिज हो जाता है। फिलहाल अपराध करने वालों का दिमाग अब ऐसा हो गया है कि वे किसी भी तरह के अपराध करने को तैयार हैं।
रितिका, मैनेजिंग डायरेक्टर फेमिनिज्म इन इंडिया

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