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भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच कोर कमांडर स्तरीय बैठक चुशूल में शुरू

भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच कोर कमांडर स्तरीय बैठक चुशूल में शुरू

पूर्वी लद्दाख में सीमा के पास चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच कोर कमांडर-स्तरीय बैठक चुशूल में शुरू हो गई है। समाचार एजेंसी एएनआई ने सेना के सूत्रों को यह जानकारी दी है। खास बात यह है कि यह बैठक इस बार भारत के आह्वान पर हो रही है। इससे पहले दोनों बैठकें चीन के निमंत्रण पर हुई थीं।

भारत की ओर से, प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेह स्थित 14 वीं वाहिनी के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह कर रहे हैं। चीन की ओर से, पीएलए सेना के दक्षिणी शिनजियांग सैन्य जिले के कमांडर, मेजर जनरल लियू लिन। इससे पहले दोनों कमांडर 6 जून और 22 जून को मिले थे।

इस बैठक का मुद्दा सीमा पर विघटन की प्रक्रिया को लागू करना, प्रसार करना यानी तनाव को कम करना और स्थिति-कार्य को लागू करना है। क्योंकि 22 जून को हुई कोर कमांडरों की बैठक में दोनों देशों ने विघटन यानी विवादित क्षेत्रों से सैनिकों को हटाने के लिए सहमति व्यक्त की, लेकिन दोनों देशों की सेनाओं ने अभी तक एक इंच भी नहीं खोया है।

अगर सूत्रों पर विश्वास किया जाए, तो दोनों देशों की सेनाओं के बीच असंतोष से पहले वियोग बहुत महत्वपूर्ण है। यानी सैनिकों की संख्या कम करके पहले एलएसी पर तनाव कम किया जाना चाहिए। उसके बाद ही विघटन संभव होगा।

इसके अलावा, आज की बातचीत में स्थिति क्यों होनी चाहिए यानी अप्रैल के अंत में और मई की शुरुआत में सैनिकों की स्थिति और तैनाती को लागू किया जाना चाहिए। इसके तहत फिंगर एरिया 4-8 और हेलिपैड सहित रक्षा बुनियादी ढांचे को खत्म करने के बीच बड़ी संख्या में एकत्र हुए चीनी सैनिकों की संख्या मुख्य रूप से भारत का मुद्दा है। लेकिन क्योंकि इस बैठक में चीनी सेना का प्रतिनिधिमंडल भारत का ‘अतिथि’ होगा, इसलिए चीन पहले बैठक और भारतीय सेना की बैठक में अपने मुद्दे रखेगा।

वास्तव में, पिछले दो महीनों से पूर्वी लद्दाख से सटे एलएसी पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच टकराव हुआ है। गालवन घाटी में एक हिंसक संघर्ष हुआ है, जिसमें भारतीय सेना के कमांडिंग अधिकारी सहित कुल 20 सैनिकों ने वीरगति प्राप्त की थी। इस झड़प में चीन को भी दोहरा नुकसान हुआ। यही वजह है कि दोनों देशों के कमांडर लगातार एलएसी पर तनाव और टकराव को खत्म करने के लिए बैठक कर रहे हैं।

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