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कोरोनिल: पहले लगी थी रोक, अब हो रही कालाबाजारी

23 जून 2020 को पतंजलि ग्रुप ने ‘कोरोनिल टैबलेट’ और ‘श्वासारि वटी’ नाम की दो दवायें लॉन्च कीं थी। जिनके बारे में कंपनी ने दावा किया है कि ‘ये कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी का आयुर्वेदिक इलाज हैं। इस दिन बाबा रामदेव ने जैसे ही कोरोना को सात दिन में पूरी तरह ठीक करने के दावे के साथ दवा को लांच किया, दावा किया कि आयुर्वेद पद्धति से जड़ी-बूटियों के गहन अध्ययन और शोध के बाद बनी यह दवा शत- प्रतिशत मरीजों को फायदा पहुंचा रही है। इसके तुरंत बाद ही आयुष मंत्रालय हरकत में आ गया।

इसके बाद आयुष मंत्रालय ने तत्काल पतंजलि को दवा के प्रचार-प्रसार के विज्ञापनों पर रोक लगाने को कह दिया। यही नहीं बल्कि कंपनी को नोटिस जारी कर पूछा गया कि वह किस आधार पर इम्यूनिटी बूस्टर की दवाओं को कोविड-19 की दवा बता रही है।

कुछ दिनो बाद राजस्थान के साथ ही महाराष्ट्र सरकार ने बाबा रामदेव की कोरोना दवा कोरोनिल की बिक्री पर रोक लगा दी है। राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने बाबा रामदेव के पतंजलि की ओर से लॉन्च किए गए कोरोना की दवा कोरोनिल के संबंध में कहा कि डब्ल्यूएचओ और आईएमए जैसे स्वास्थ्य संगठनों से उचित प्रमाणीकरण के बिना कोरोनिल की बिक्री को अनुमति नहीं मिलेगी।

काफी विवादों के बाद आखिकार एक जुलाई 2020 को पतंजलि की ‘कोरोनिल’ दवा को आयुष मंत्रालय से बिक्री की अनुमति मिल गई । आयुष मंत्रालय ने इस शर्त के साथ अनुमति दी कि पतंजलि इसे इम्यूनिटी बूस्टर के तौर पर बाजार में बेच सकेगा।

19 फरवरी 2020 को कोरोना की नई दवा लॉन्च की गयी। तब पतंजलि ने दावा किया कि नई दवा साक्ष्यों पर आधारित है। नई दवा के लॉन्च के मौके पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी मौजूद रहे। नई दवा का नाम भी कोरोनिल ही है। पतंजलि का कहना है कि कोरोनिल टैबलेट से अब कोविड का इलाज होगा।

इस दौरान आयुष मंत्रालय ने भी कोरोनिल को कोरोना की दवा के तौर पर स्वीकार कर लिया। हालांकि बाद में आईएमए ने इस पर आपत्ति जताई और दवाई के लॉन्चिंग अवसर पर देश के स्वास्थ्य मंत्री डाँक्टर हर्षवर्धन की मौजूदगी पर भी सवाल खड़े कर दिए थे।

तब से कोरोनिल नामक यह आयुर्वेदिक दवाई बाजार में उपलब्ध है। कहा जा रहा है कि कोरोनिल को लेकर बाबा रामदेव ने करोड़ों का व्यापार किया। साथ ही इसे 150 देशों में बेचने का भी दावा किया।

पिछले कई महीनों से कोरोनिल को लोग खरीद तो रहे थे, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में नहीं खरीद रहे थे जितनी आज कल इसकी मांग बढ़ गई है ।देखते ही देखते कोरोनिल बाजार से गायब होने लगी। पतंजलि की जो दवा महज ₹ 545 की थी उसे कालाबाजारी कर हजारों रुपए बढ़ाकर बेचा जाने लगा।

जानकारी के अनुसार एमेजॉन की वेबसाइट पर पतंजलि की दिव्य स्वासरी कोरोनिल किट अब 1090 में रुपये में 2 किट बिक रही है।जबकि दूसरी तरफ फ्लिपकार्ट जहां कहने को एक कोरोनिल किट उसकी असल कीमत 545 रुपये में ही देने का दावा कर रहा है। लेकिन वह इसकी डिलिवरी के लिए 749 रुपये ले रहा है।

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