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संकट में कोरोना योद्धा पुलिसकर्मी, नोएडा प्रशासन ने जांच में खड़े किए हाथ

संकट में कोरोना योद्धा पुलिसकर्मी, नोएडा प्रशासन ने जांच में खड़े किए हाथ

“गौतम बुद्ध नगर जिले में कोरोना की जांच नेगेटिव आने वाले लोगों की सेहत का अब पूरा ख्याल रखा जाएगा। एक-एक व्यक्ति को फोन करके पूछा जाएगा कि तबीयत कैसी है। जुकाम, बुखार, खांसी के अलावा सांस लेने में कोई परेशानी तो नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग ने ढाई महीने में नेगेटिव रिपोर्ट से संबंधित 8865 लोगों का पूरा डाटा तैयार कर लिया है। इन लोगों का हाल-चाल पूछने के लिए बीस लोगों की ड्यूटी लगाई गई है।”

यह कहना है गौतम बुद्ध नगर के जिला प्रशासन का। जिन्होंने कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए उक्त दावे किए हैं। देखने में आता है कि अक्सर दावे और हकीकत में काफी अंतर पाया जाता है। जो होता है वह दिखता नहीं है और जो दिखता नही है वह होता है। मतलब यह कि आकडेबाजी के खेल में सच कही छुपा दिया जाता है।

सूत्रों की माने तो गौतम बुद्ध नगर जिले में कुछ ऐसा ही हो रहा है। कोरोना महामारी के बढते मामले मरीजों की ही नहीं बल्कि प्रसाशन की भी धड़कने बढ़ा रहे हैं। फिलहाल, जिले में बढते कोरोना वायरस के केस से गौतम बुद्ध नगर प्रदेश में आगरा के बाद दूसरे नंबर पर आ गया है। फिलहाल नोएडा की बात करे तो यहा कंटोमेट जोन बढ़कर 83 हो गए है। जिनमें केटेगरी एक में 52 तो केटेगरी दो में 31 जोन शामिल हो चुके हैं।

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली जानकारी जिला प्रशासन और पुलिस कमिश्नरी के बीच तालमेल की भारी कमी के चलते कोरोना वारियर्स के संदर्भ में सामने आ रही है। गौरतलब है कि पूर्व में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गौतम बुद्ध नगर में आईएएस लॉबी के विरोध के बावजूद कमिश्नरी लागू की थी। तब जो डर आईएएस लॉबी को लग रहा था वह अब दिखने लगा है। दरअसल, तब कहा जा रहा था कि कमिश्नरी लागू होने के बाद आईपीएस अधिकारियों के सामने आईएएस अधिकारी का रूतबा कम हो जाएगा। इसके चलते ही पूर्व में जिलाधिकारी रहे बी एन सिंह को हटाया गया था। तब यह कहा गया कि आईएएस और आईपीएस अधिकारियों में तालमेल की कमी थी। लेकिन फिलहाल की स्थितियों पर गौर करें तो एक बार फिर वही तालमेल की कमी अधिकारियों में दिखाई दे रही है। शायद यही वजह है कि कोरोना महामारी के मामलों में अधिकारी एक दूसरे से सहयोग तक नहीं करते दिखाई देते हैं।

पुलिस कर्मियो के कोरोना टेस्ट कराने पर कोई रोक नहीं है। सीएमओ और जिला अस्पताल अगर कोरोना टेस्ट नही कर रहे हैं तो उन्हें हम नोटिस भिजवायेगे। क्या सीपी (पुलिस कमिश्नर ) कह रहे हैं कि पुलिस वालों के कोरोना टेस्ट प्रशासन नहीं कर रहा है। अगर पुलिस कमिश्नर पुलिस कर्मियो का टेस्ट अपने खर्चे से करा रहे हैं तो इसमें हम क्या कर सकते है….।

-सुहास एलवाई, जिलाधिकारी गौतम बुद्ध नगर

कोरोना महामारी के विस्तारित होते मामलों की बात करे तो मंगलवार तक जिलें में 496 कुल मरीज हो चुके हैं। अकेले सोमवार के दिन ही 17 केस सामने आए है। जबकि मंगलवार को 26 कोरोना के मरीज सामने आए। अब तक कुल ठीक किए गए लोग 346 है। जबकि एक्टिव मरीजों की संख्या 142 है। जनपद में अब तक 7 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है। सबसे पहली मौत 4 मई को हुई थी। एक महीने में ही सात लोगों की कोरोना से हुई मौतों से प्रशासन के स्वास्थ्य संबंधी फैसलों पर सवालिया निशान लगने लगे है। जिन आईएएस अधिकारी सुहास एलवाई के कोरोना संक्रमण पर कंट्रोल करने की शुरुआत में तारीफें हो रही थी वहीं अब कहीं ना कहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निशाने पर आ गए है। कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी जिलाधिकारी की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं है।

बहरहाल, जिले में कोरोना योद्धाओं पर संकट के बादल छाये हुए हैं। जिन पुलिसकर्मियो ने अपनी जान की बाजी लगाकर कोरोना महामारी के संक्रमण को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है वह अब प्रशासन की दृष्टि में दोयम दर्जे का नागरिक बनकर रह गए है। गौतम बुद्ध नगर से फिलहाल एक बड़ा खबर यह आ रही है कि प्रशासन पुलिस को कोरोना टेस्ट तक कराने में आनाकानी कर रहा है। इसका कारण जो बताया जा रहा है वह यह है कि केस कम सामने आए। अगर सूत्रों की मानें तो कोरोना केस जो हकीकत में है वह उजागर करने की बजाय छुपाए जा रहे है।

शायद यही वजह है कि प्रशासन ने पुलिस कर्मियों के कोरोना टेस्ट कराने में हाथ खड़े कर दिए हैं। ग्रेटर नोएडा के जिम्स अस्पताल में कोरोना टेस्ट कराने और मरीजों का इलाज कराने के लिए जो व्यवस्थाएं सुचारु करने के दावे किए गए थे वह अब पहले जैसे नहीं दिखाई दे रहे है। सूत्रों के अनुसार जिला अस्पताल से भी पुलिस के कोरोना टेस्ट कराने में आनाकानी की जा रही है। पुलिसकर्मी जब जिला अस्पताल पहुंचते हैं तो उन्हें यह कहकर टरकाया जा रहा है कि टेस्ट कराने में कोई फायदा नहीं है।

बहरहाल, पुलिस कमिश्नर ने अब पुलिस कर्मियों की कोरोना जांच के लिए पुलिस रिलीफ फंड का सहारा लिया है। जिससे आज पुलिस ने अपने खर्चे से अपने 20 जवानों की शारदा हॉस्पिटल में जांच कराई है। सूत्रों के अनुसार यह बीस जवान नोएडा के ही है। जिनमें 8 जवान पुलिस कंट्रोल रूम तथा 8 जवान थाना सेक्टर 49 के है। जबकि जांच कराने वाले 4 जवान थाना फेस थ्री के है। ‘दि संडे पोस्ट’ ने पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह से फोन पर बात की तो उनके पीआरओ विवेक ने कहा कि सर अभी मिटिंग में बिजी हैं। इसके बाद पुन पुलिस कमिश्नर को फोन किया गया। तब उनके पीआरओ ने एडिशनल डीसीपी आशुतोष द्विवेदी से बात करने को कहा। गौतम बुद्ध नगर के एडिसनल डीसीपी आशुतोष द्विवेदी ने कहा कि वह इस मामले में कुछ नहीं बोल पाएंगे।

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