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नाक के रास्ते भी ली जा सकेगी कोरोना वैक्सीन ,भारत बायोटेक ने किया ट्रायल के लिए आवेदन 

पिछले एक साल से देश में कोरोना वायरस का प्रकोप जारी है। केन्द्र व राज्य सरकारें मिलकर इसकी रोकथाम के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं ।इस बीच कोरोना वैक्सीन के फ्रंट पर बीते तीन जनवरी को देश को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने दो वैक्सीन सीरम इंस्टिट्यूट की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के भारत में इमर्जेंसी इस्तेमाल को मंजूरी दी । इस बीच अब  भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड, जिसने हाल ही में अपने इंजेक्शन योग्य कोरोना वायरस रोग वैक्सीन के लिए राष्ट्रीय ड्रग्स नियामक की आपातकालीन उपयोग स्वीकृति प्राप्त की है, उसने अपने (इंट्रानेजल) नाक के जरिए दिए जाने वाली  कोविड -19 वैक्सीन उम्मीदवार के पहले चरण का ट्रायल करने के लिए आवेदन किया है।

अभी तक भारत को जो वैक्सीन मिली है वे इंजैक्शन के रूप में हैं। लेकिन भारत बायोटेक बिना सूई, इंजैक्श के वैक्सीन के ट्रायल की मंजूरी मांग रही है। अगर ये ट्रायल सफल होते हैं, तो भारत में कोरोना की ऐसी वैक्सीन उपलब्ध होने की संभावना है जिसे नाक के जरिए शरीर में डाला जाएगा और इसमें सीरिंज और सूंई के खर्चे से भी बचा जा सकेगा।

इस मामले की जानकारी रखने वाले सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी ने फेज 1 का ट्रायल शुरू करने के लिए मंजूरी मांगी थी। ये निर्णय आयन आवेदन केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की विषय विशेषज्ञ समिति द्वारा लिया जाएगा। खबरों के मुताबिक कंपनी के  फरवरी या मार्च के आसपास परीक्षण शुरू करने की संभावना है।

पिछले साल सितंबर में, भारत बायोटेक ने वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के साथ सेंट लुइस में एक नोवेल चिम्पोन-एडेनोवायरस, कोविड -19 के लिए एकल खुराक इंट्रानेजल वैक्सीन के लिए लाइसेंसिंग समझौता किया था। भारत बायोटेक के पास अमेरिका, जापान और यूरोप को छोड़कर सभी बाजारों में वैक्सीन बेचने का अधिकार है।

कंपनी ने अपने एक बयान में कहा कि हमें इस टीके के सहयोग करने पर गर्व है। हम कल्पना करते हैं कि हम इस वैक्सीन को 1 बिलियन खुराक में बदल देंगे, 1 बिलियन व्यक्तियों को एक एकल-खुराक आहार प्राप्त होगा। एक इंट्रानेजल वैक्सीन न केवल प्रशासन, बल्कि सुई, सिरिंज, आदि जैसे चिकित्सा उपभोग्य सामग्रियों के उपयोग को कम करने में लाभदायक होगी, एक टीकाकरण, ड्राइव की पूरी लागत को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है।

कंपनी ने यह भी कहा था कि इंट्रानेजल वैक्सीन उम्मीदवार ने चूहों के अध्ययन में अभूतपूर्व स्तर की सुरक्षा दिखाई थी; जिसका प्रौद्योगिकी और डेटा प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका ‘सेल’ और ‘नैचुरल’ के एक एडिटोरियल में छापा गया है।

इंट्रानेजल का रास्ता लेने के पीछे का तर्क यह है कि इन्फ्लूएंजा और कोविड -19 दोनों संक्रमण के एक ही पैटर्न का अनुसरण करते हैं।  नाक और मुंह के रास्ते फेफड़ों में जाते हैं, जिसके कारण म्यूकोसल इम्यूनिटी होना महत्वपूर्ण है और वैक्सीन भी एक ही नासिका का उपयोग करेगी ।

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