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चुनावी सभाओं में कब लागू होगा कोरोना प्रोटोकॉल  

देश में बढ़ते ओमिक्रॉन के मामलों ने केंद्र और राज्य सरकारों की चिंता बढ़ा दी है। खतरे को देखते हुए कई राज्य सरकारों ने आम लोगों के लिए नाइट कर्फ्यू के साथ-साथ कई प्रतिबंध लगाए हैं। वहीं उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में राजनीतिक पार्टियों की चुनावी रैलियों में कोरोना प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। वह भी तब जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने चुनावी रैलियों पर सख्त टिप्पणी भी की है।

 

 


चुनावी रैलियों में सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क जैसी कोविड प्रोटोकॉल का खुलकर हो रहा उल्लंघन

 

दरअसल, कुछ ही महीनों बाद पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावी राज्यों में राजनीतिक दलों की रैलियां अपने पूरे सबाब पर है। चाहे कांग्रेस हो या भाजपा, समाजवादी पार्टी हो या फिर अन्य पार्टी, सभी दलों की रैलियों में लोग सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क जैसी कोविड प्रोटोकॉल का खुलकर उल्लंघन करते नजर आ रहे हैं। इन रैलियों में गिने-चुने लोग ही मास्क पहने नजर आ रहे हैं।

दो दिन पहले कांग्रेस की महिला मैराथन के दृश्य, उन्नाव में अखिलेश यादव की रैली या फिर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हरदोई में रोड शो, लोग कोविड सुरक्षा नियमों पर बहुत कम ध्यान देते हुए दिखाई दिए।

उत्तर प्रदेश में 30 प्रतिशत से भी कम आबादी को टीका का दोनों डोज लगा है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान यूपी सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में से एक था। गंगा किनारे दफन और नदी में तैरते सैकड़ों शवों की तस्वीरें मीडिया में सुर्खियां बटोर चुकी है।

पिछले हफ्ते इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को स्थगित करने और दूसरी लहर का हवाला देते हुए चुनावी सभाओं पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया था। न्यायालय  ने कहा, ‘यूपी ग्राम पंचायत चुनाव और बंगाल विधानसभा चुनाव ने बहुत से लोगों को संक्रमित किया है, जिससे कई मौतें भी हुई हैं। अगर रैलियों को नहीं रोका गया तो परिणाम दूसरी लहर से भी बदतर होंगे।’

उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल रैलियां और बैठकें आयोजित कर रहे हैं और यह सुनिश्चित करना कि ऐसे आयोजनों में कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया जाना असंभव है। हालांकि  चुनाव आयोग चुनाव कार्यक्रम पर कायम रह सकता है। सरकार ने उन पांच राज्यों में कोविड की स्थिति की समीक्षा बैठक की, जहां चुनाव होने वाले हैं। बैठक के बाद सरकार ने कहा कि उन राज्यों में जहां अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं, वहां कोरोना का टीकाकरण बढ़ाया जाना चाहिए। सरकार ने कहा था कि कोविड-उपयुक्त व्यवहार का सख्त प्रवर्तन होना चाहिए और परीक्षण तेजी से होना चाहिए।

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