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गुजरात में धर्म के आधार पर बांटा गया कोरोना मरीजों का वार्ड, शुरू हुआ विवाद

द लांसेट के अध्ययन में दावा, मध्य प्रदेश, बिहार और तेलंगाना में कोविड-19 का सबसे अधिक खतरा

भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से पैर पसार रहा है। हर रोज कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। अब तक संक्रमितों का आंकड़ा 11 हजार पार कर चुका है। मरने वालों की संख्या 393 हो चुक है। मरीजों की संख्या बढ़ने से डॉक्टरों और हॉस्पिटल पर भी दबाव बढ़ा है। कहा जाता है कि हॉस्पिटल और डॉक्टर किसी का धर्म या जाति देखकर इलाज नहीं करते। लेकिन अहमदाबाद के एक अस्पताल में कोरोना मरीजों को धर्म के आधार पर बांटने का मामला सामने आया है।

यहां हिंदू और मुस्लिम मरीजों के लिए अलग-अलग कोविड वार्ड बनाए गए हैं। पूछे जाने पर डॉक्टरों का कहना है कि सरकार के फैसले के तहत ही ये व्यवस्था की गई है। इंडियन एक्सप्रेस के एक रिपोर्ट के मुताबिक, अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में कोरोना के मरीजों और संदिग्धों को धर्म के आधार पर बेड अलॉट किए जा रहे हैं। इस अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए 1200 बेड का इंतजाम किया गया है। जिसमें 600 बेड हिंदू मरीजों के लिए और 600 मुस्लिम कोरोना मरीजों के लिए रखे गए हैं।

बता दें कि फिलहाल इस अस्पताल में 186 कोरोना संदिग्ध भर्ती हैं। जिनमें 150 लोग कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए हैं। हॉस्पिटल में उपस्थित एक मरीज ने बताया, “रविवार रात को फर्स्ट वार्ड (A-4) में भर्ती 28 मरीजों को दूसरे वार्ड C-4 में शिफ्ट कर दिया गया। हमें ये नहीं बताया गया कि क्यों शिफ्ट किया जा रहा है। जितने भी मरीज शिफ्ट किए गए, वे सभी एक ही समुदाय के थे। हमने अपने वार्ड में ड्यूटी कर रहे एक स्टाफ से इस बारे में जानने की कोशिश की। उसने बस इतना कहा कि दोनों धर्मों के मरीजों की सुविधा के लिए ये कदम उठाया गया है।”

अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ गुणवंत राठौड़ ने इस बारे में कहा, “अस्पताल में हिंदू-मुस्लिम कोविड-19 मरीजों के लिए अलग-अलग वार्ड की व्यवस्था की गई है। ये काम राज्य सरकार के आदेश पर ही किया गया है।” हालांकि अहमदाबाद के कलेक्टर का कहना है कि इस संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। साथ ही डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री नितिन पटेल ने इस पूरे मामले को गलत ठहराते हुए मामले की छानबीन कराने की बात कही।

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