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डॉक्टरों की लापरवाही से कोरोना मरीजों की मौत, कहीं ICU की चाबी नहीं तो कहीं वेंटिलेटर गायब

कोविड-19 का आंकड़ा 2 लाख के पार, बीते घंटे में 214 की मौत, 8,712 नए मामले

कोरोना का कहर अब साफ दिख रहा है। साथ ही संदिग्ध मरीजों के इलाज में लापरवाही भी सामने आ रहे हैं। एक ऐसी खबर उज्जैन से आई जो आपको झकझोर देगी। एक महिला दर्द से एंबुलेंस में तड़प कर मर गई। महिला 58 साल की थी। महिला की तबियत खराब होने पर उनके परिवारजन उसे लेकर जिला अस्पताल गए। जहां महिला को गुरुवार देर रात को माधवनगर अस्पताल में भेजा गया। उसके बाद वहां से उन्हें आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज रैफर किया गया। लेकिन आईसीयू वाड के गेट में ताला लगा था। गेट खोलने वाला कर्मचारी गायब था। महिला एम्बुलेंस में तड़प रही थी। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। परिवार वालों ने उसे तड़पना देख ताला खुलवाने के लिए गुहार लगाई पर चाबी गायब थी।

नहीं मिली ICU की चाबी

आईसीयू का चाबी नहीं मिला जिसके कारण ताला नहीं खोला जा सका और लगभग 45 मिनट बाद महिला के परिवारवाले और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने ताला तोड़ा। महिला को एंबुलेंस से उतारकर आईसीयू में ले जाया गया। जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। डॉक्टर ने बताया कि महिला की मौत एंबुलेंस में ही हो गई थी। महिला का नाम लक्ष्मीबाई था। इनके पति का नाम अशोक चौहान है। ये लोग दानीगेट के रहने वाले हैं। महिला के पति अशोक चौहान ने बताया कि उनकी पत्नी को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी और ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ था। जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। सांस में तकलीफ के चलते उसे जिला अस्पताल से रात में ही माधवनगर अस्पताल शिफ्ट कर दिया था। जहां पर उसका सैंपल लेकर इलाज शुरू किया गया। बाद में कोरोना के संक्रमण का संदेह होने पर महिला को शुक्रवार को आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।

माधवनगर अस्पताल में गुरुवार रात को ही दो और संदिग्ध मरीजों की मौत हो गई। जिसमें लक्कड़गंज निवासी एक व्यक्ति और बड़नगर की एक महिला मरीज है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, बड़नगर की महिला को सांस लेने में बहुत तकलीफ हो रही थी। देर रात उसकी तबीयत अचानक ज्यादा खराब हो गई। वह तड़पती रही। वेंटिलेटर नहीं मिला। मौके पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। महिला तड़प रहती रही और कुछ देर के बाद इसकी मौत हो गई। शुक्रवार सुबह महिला का शव पलंग के नीचे पड़ा मिला।

इलाज से इनकार

उसी महिला के बेड के पास में ही भर्ती एक और व्यक्ति की मौत हो गई। व्यक्ति लक्कड़गंज का था। ये दोनों मौत डॉक्टर के लापरवाही से हुई। इसलिए अस्पताल के प्रभारी और सिविल सर्जन आरपी परमार को पद से हटा दिया गया। उज्जैन के ही शास्त्री नगर से एक और चौका देने वाला मामला आया है। यहां तो डॉक्टर ने इलाज करने से इनकार कर दिया। जिससे 39 साल के युवक की शुक्रवार को मौत हो गई।

उनके परिजनों का कहना है कि निजी अस्पतालों ने इलाज करने से मना कर दिया। उसके बाद उसे माधवनगर अस्पताल ले जाया गया, जहां स्वास्थ्य अधिक खराब होने पर इंदौर रैफर कर दिया। परिजन उसे लेकर एमवाई अस्पताल पहुंचे ही थे कि उसकी मौत हो गई। हालांकि, एमवाई अस्पताल में मृत युवक का सैंपल लिया गया है। डॉक्टरों का कहना था कि युवक में कोरोना के लक्षण मिले हैं। रिपोर्ट आने के बाद पुष्टि होगी। युवक इंदौर में होटल मैनेजर था और पत्नी के साथ वहीं रहता था। लॉकडाउन में वह उज्जैन आ गया था।

उपलब्ध नहीं वेंटिलेटर

लक्ष्मीबाई और संजय कश्यप को समय पर वेंटिलेटर न मिलने के कारण दोनों मरीजों की मौत हो गई। वहीं सिविल सर्जन डॉ आरपी परमार और माधवनगर अस्पताल प्रभारी डॉ महेश मरमट को सस्पेंड कर दिया गया है।

एक ही परिवार के 5 लोग कोरोना पॉजिटिव

उज्जैन के जानसापुरा के एक ही परिवार में पांच व्यक्ति कोरोना संक्रमित पाया गया है। राबिया बी की मौत हो चुकी है। उनकी मौत कोरोना से हुई थी। उसके बाद उनके परिवार के बाकी सदस्यों का टेस्ट हुआ। जिसमें उनके पति हाजी कुतुबुद्दीन की रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है। वे 65 साल के हैं।

उनके अलावा उनके परिवार के 11 सदस्यों की स्क्रीनिंग और सैंपल लेकर जांच की गई जिनमें से 4 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई। इनमें से एक मरीज इंदौर एमवाई हॉस्पिटल में, तीन मरीज आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं। उज्जैन में अब तक 7 कोरोना पॉजिटिव मरीज हैं।

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