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कर्नाटक में पहले हिजाब और अब हलाल मीट पर विवाद

कर्नाटक में अभी ‘हिजाब-विवाद’ पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ है कि अब ‘हलाल’ मीट पर विवाद शुरू हो गया है। कर्नाटक के कई हिंदू संगठनों ने मांग की है कि ‘हलाल-मीट’ का बहिष्कार किया जाए। मुस्लिमों की दुकानों से मीट न खरीदा जाए, क्योंकि वहां हलाल-मीट ही अक्सर बेचा जाता है।

 

दरअसल,कर्नाटक में हिंदू जन जागृति ने हलाल मीट के बायकॉट का ऐलान किया था। जिसके बाद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि ने 29 मार्च को हलाल खाने को ‘आर्थिक जिहाद’ तक कह दिया था। दक्षिण भारत में नववर्ष के रूप में उगादी पर्व मनाया जाता है। इसी पर्व के दौरान हिंदू जन जागृति ने हिंदुओं से उगादी के मौके पर हलाल मीट नहीं ख़रीदने की अपील की है।

सोशल मीडिया पर शेयर की गई एक वीडियो पोस्ट में मोहन गौड़ा नाम के हिंदू नेता कहा है कि,’ हलाल किए गए मीट को खाना हिंदू धर्म के खिलाफ है।’

इसके साथ ही कहा है कि, ‘यह हिंदुओं का आचरण नहीं है।और दावा किया कि हलाल सर्टिफिकेट के माध्यम से भारत में हजारों करोड़ रुपये का कारोबार किया जा रहा है। इसी पैसे से देश को इस्लामिक केंद्र बनाने की साजिश कर रहे है। इतना ही नहीं वीडियो में सभी हिंदुओं से हलाल मीट और हलाल प्रोडक्टस के बहिष्कार का आह्वान किया है।

वहीं इस मामले पर कर्नाटक के गृहमंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने एक अजीबो गरीब बयान दिया है। इस विवाद पर उन्होंने कहा कि,यह प्रतिक्रियाओं की वजह मुसलमानों का वह विरोध है, जो उन्होंने हिजाब को लेकर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ किया। कानून व्यवस्था अगर बिगड़ती है तो मेरा मंत्रालय कार्रवाई करेगा वहीं कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी के पास मुद्दे नहीं है और वह इस तरह के मुद्दे को लाती है जिससे लोगों को बांटा जा सके और चुनाव में जीत हासिल हो सके।

इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई से जब हलाल विवाद पर पत्रकारों ने सवाल किया तो उन्होंने कहा है कि,यह हलाल मुद्दाअभी शुरू हुआ है। हमें समग्रता से अध्ययन करना है, क्योंकि इसका किसी नियम से कोई लेनादेना नहीं है। यह एक प्रथा है जो चल रही थी।अब इसको लेकर गंभीर आपत्ति जताई गई है। हम उस पर गौर करेंगे।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि,जहां तक उनकी सरकार का सवाल है उसके पास केवल विकास के पंख हैं और कोई दक्षिणपंथी या वामपंथी नहीं है। हलाल के खिलाफ भी अभियान हिंदू संगठनों का कहना है कि,हलाल मीट हिंदू देवता को नहीं चढ़ाया जाना चाहिए। उगादी त्योहार के अगले दिन एक परंपरा के तहत हिंदू देवी-देवताओं को मांस चढ़ाया जाता है।

गौरतलब है कि,इस नए विवाद को मुस्लिम धर्मगुरुओं ने गैरजरूरी बताया है। बेंगलुरू की जामा मस्जिद के मौलवी मोहम्मद मकसूद इमरान इस मामले पर कहते हैं कि,हमारे यहां इस तरह की बंदिश नहीं है कि मुस्लिम व्यापारी सिर्फ हलाल-मीट ही बेच सकते हैं। यह पूरा गैरजरूरी विवाद है। दो मजहबों के बीच बैर पैदा करने और अमन-ओ-चैन में खलल डालने की कोशिश है।

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