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हाथरस गैंगरेप कांड से कांग्रेस को राजनीतिक फायदा, राहुल- प्रियंका की बढी लोकप्रियता 

हाथरस गैंग रेप कांड में पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मुहिम में फिलहाल सबसे आगे कांग्रेस नजर आ रही है। जिस तरह से सोशल मीडिया पर युवराज राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के फोटो वायरल हो रहे हैं तथा उन्हें सहानुभूति मिल रही है, इससे पार्टी को राजनीतिक फायदा मिलना तय है। कांग्रेस हाथरस गैंगरेप कांड को वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पूर्व जमीनी हकीकत की रिहर्सल के रूप में देख रहे हैं। जिस तरह से कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी दो बार हाथरस जाने की जिद में यूपी पुलिस से भिड़े और बाद में पीड़ित परिवार से मिलकर न्याय देने का आश्वासन दिया उससे दलितों में कांग्रेस के प्रति लगाव होता दिख रहा है।
हाथरस गैंगरेप कांड के बाद बुरी तरह घिर चुकी बीजेपी के मिशन 2022 को नुकसान होना तय है। फिलहाल इस प्रकरण से उत्तर प्रदेश से जातीय ध्रुवीकरण भी होना शुरू हो चुका है। जिसमें अब तक हाशिए पर पड़ा दलित अब कांग्रेस की तरफ आकर्षित होता दिख रहा है।  जबकि दूसरी तरफ मुख्यमंत्री तथा आरोपियों का एक जाति विशेष से संबंधित होना भाजपा के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है ।
बहरहाल, जातीय समीकरण से देखें तो फिलहाल हाथरस गैंगरेप कांड में आरोपी उसी जाति से हैं, जिससे भाजपा के 3 राज्यों के मुख्यमंत्री इसी जाति के बनाए है । हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री फिलहाल एक जाति से संबंधित है और वह है ठाकुर जाति। हाथरस गैंग रेप कांड के आरोपी भी जाति से ठाकुर ही है । ऐसे में दलितों का ठाकुर मुख्यमंत्री के प्रति नकारात्मक रुख हो सकता है। राजनीतिक रूप से देखे तो इसकी जद में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश आ सकते हैं। याद रहे कि तीनो ही प्रदेशों में वर्ष 2022 में विधानसभा चुनाव होने है।
 राजनीतिक पंडितों की माने तो हाथरस गैंग रेप कांड में कांग्रेस की सक्रियता ने सत्तारूढ़ भाजपा की बेचैनी बढ़ा दी है। इसी के साथ ही समाजवादी पार्टी, रालोद और बहुजन समाजवादी पार्टी भी हाथरस की बेटी के न्याय की लड़ाई में आगे आए हैं। लेकिन वह कांग्रेस के बाद दूसरे नंबर पर है। ऐसे में पूरे देश में कांग्रेस यह संदेश देने में कामयाब हुई है कि वह दलितों की हित चिंतक है । जबकि हाथरस गैंग रेप कांड से भाजपा को दलितों के कोपभाजन का शिकार बनना पड़ सकता है।
 गौरतलब है कि पिछले करीब 2 साल से उत्तर प्रदेश की महासचिव प्रियंका गांधी प्रदेश की राजनीति में सक्रिय है। इससे पूर्व वह लॉकडाउन के दौरान मजदूरों के मुद्दे पर योगी सरकार के खिलाफ तन कर खड़ी हो गई थी । जबकि हाथरस गैंग रेप कांड के बाद कांग्रेस को संजीवनी मिलती प्रतीत हो रही है। शायद यही वजह है कि हाथरस गैंग रेप कांड के बाद कांग्रेस में आज से सभी जिला मुख्यालय पर अनशन और सत्याग्रह आंदोलन करने का ऐलान कर दिया है ।
चर्चा है कि कांग्रेस के कार्यकर्ता इस दौरान देशभर के जिले और राज्य मुख्यालयो में सत्याग्रह कर भाजपा के राजनीतिक ग्राफ को गिराने के लिए पूरी प्लानिंग करने में जुट गई है। कांग्रेस की कोशिश यह रहेगी कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों तक वह उत्तर प्रदेश में दलितों के साथ हो रहे अन्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाती रहेंगी। इससे भाजपा की चिंता बढ सकती है। 2017 के विधानसभा चुनावो में दलितों का ज्यादातर झुकाव भाजपा की तरफ ही था। जबकि 2019 के लोकसभा चुनावो में दलित मतदाता मायावती की झोली से निकलकर भाजपा के पाले में आ गया था। फ़िलहाल की परिस्थितियों से लग रहा है कि प्रदेश की राजनीति में दलित एक बार फिर से पाला बदल सकता है।

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