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पश्चिम बंगाल में बिहार जैसी गलतियां नहीं करना चाहती कांग्रेस 

कोरोना काल के बीच कुछ महीने पहले संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव के बाद अब  पश्चिम बंगाल,केरल ,तमिलनाडु और असम में  इसी साल होने हैं। ऐसे में अब  जैसे – जैसे  विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे – वैसे  राज्यों के साथ – साथ देश की  राजनीति भी गरमाने लगी है।

पश्चिम बंगाल  विधानसभा चुनाव  का भले ही औपचारिक ऐलान न हुआ हो, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी सक्रियता से सूबे की सियासी  सरगर्मी  को बढ़ा दिया है। राज्य में इस बार सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला है। वहीं दूसरी तरफ राज्य में विधानसभा  चुनाव में कांग्रेस बिहार की गलतियां नहीं दोहराएगी। लेफ्ट पार्टियों के साथ गठबंधन में अधिक से अधिक सीट पर चुनाव लड़ने के बजाए कांग्रेस पार्टी मजबूत सीट पर दांव लगाएगी। ताकि, पिछले विधानसभा चुनाव से बेहतर प्रदर्शन किया जा सके। वर्ष 2016 में कांग्रेस ने गठबंधन में 92 सीट पर चुनाव लड़कर 44 सीट हासिल की थी। हालांकि, लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और लेफ्ट का गठबंधन टूट गया था।

पश्चिम बंगाल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है  कि लेफ्ट के साथ सीट बंटवारे में संख्या के बजाए मजबूत सीट पर दावेदारी है। पिछली बार हमने 92 सीट पर चुनाव लड़ा था। विधानसभा और लोकसभा में प्रदर्शन के आधार पर हम अधिक सीट लड़ सकते हैं। लेकिन  इस बारे में निर्णय पिछले चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। बिहार की तरह हम गठबंधन में ऐसी सीट नहीं लेंगे, जिस पर कभी जीत नहीं हुई हो।

बिहार में कांग्रेस ने 70 सीट पर चुनाव लडकर सिर्फ 19 सीट जीती थी। सीट की संख्या बढाने के लिए पार्टी ने कई  ऐसी सीटों पर चुनाव लड़ा था जिन पर पिछले कई चुनावों में उसका प्रदर्शन बेहद खराब रहा था। वहीं, गठबंधन में लेफ्ट पार्टियों को साथ रखने के लिए कांग्रेस ने अपनी कई जीती हुई सीट छोड़ दी थी। इसके साथ कांग्रेस को एआईएमआईएम के चुनाव लड़ने की वजह से भी कई सीट का  नुकसान उठाना पड़ा था।

कांग्रेस ने लेफ्ट के साथ सीट बंटवारे पर बातचीत करने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी, अब्दुल मन्नान, प्रदीप भट्टाचार्य और नेपाल मेहतों की समिति गठित की है। समिति लेफ्ट पार्टियों के साथ सीट बंटवारे पर बातचीत कर रही है। सीट बंटवारे के साथ दोनों पार्टियां संयुक्त साझा कार्यक्रम और चुनाव कार्यक्रम पर भी चर्चा कर रही हैं । पार्टी नेता ने कहा कि हमारी कोशिश है कि कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन चुनाव में विकल्प के तौर पर उभरे।

दरअसल, वर्ष 2016 विधानसभा चुनाव कांग्रेस और लेफ्ट ने गठबंधन में लड़ा था। इस चुनाव में कांग्रेस ने 92 सीट पर चुनाव लड़कर 44 सीट हासिल की। जबकि लेफ्ट 148 सीट पर चुनाव लडकर 26 सीट हासिल कर सका। हालांकि, कांग्रेस के मुकाबले उसे करीब सात फीसदी वोट ज्यादा मिले थे। इसके बाद 2019 लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियों का गठबंधन टूट गया। इन चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ दो सीट मिली, जबकि लेफ्ट कोई सीट नहीं जीत पाई थी। इसलिए कांग्रेस और लेफ्ट ने एक बार फिर गठबंधन किया है। कांग्रेस के पश्चिम बंगाल प्रभारी जितिन प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ेगी। लेफ्ट के साथ सीट बंटवारे पर बातचीत चल रही है। हम जल्द आगे के कार्यक्रम तय कर राज्य  में एक विकल्प के रुप में उभरेंगे।

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