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सकते में कांग्रेसी मुख्यमंत्री

पंजाब में यकायक ही अमरिंदर सिंह को सत्ता से बेदखल कर कांग्रेस आलाकमान ने राजस्थान और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों को सकते में डाल दिया है। सत्ता गलियारों में कहा-सुना जाने लगा है कि अब इन दो राज्यों में भी पार्टी नेतृत्व कड़े फैसले लेने का मन बना चुका है

देश के कुछ महत्वपूर्ण राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान ने न सिर्फ राज्य इकाइयों में चल रही अंतर्कलह को खत्म करने के लिए कवायद शुरू की है बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने के लिए संगठन में बड़े बदलाव की रणनीति भी लगभग तैयार कर ली गई है। हाल में पार्टी आलाकमान ने पंजाब कांग्रेस में जो बड़ा बदलाव किया है उससे यह माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

पंजाब में कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की जगह चरणजीत सिंह चन्नी को राज्य की कमान सौंपी है। इसी तर्ज पर राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी पार्टी भीतर काफी समय से चल रही अंतर्कलह को खत्म करने की कवायद शुरू हो चुकी है। छत्तीसगढ़ सरकार के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव फिर दिल्ली पहुंच गए हैं। टीएस सिंहदेव के दिल्ली जाने के कार्यक्रम से प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। हालांकि तमाम राजनीतिक कयासों के बीच मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि वे बहन के जन्मदिन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं। यह उनका कोई राजनीतिक दौरा नहीं है।

दूसरी तरफ राजस्थान कांग्रेस में भी राजनीतिक गतिविधियां गर्माने लगी हैं, पिछले हफ्ते यानी 19 सितंबर से ही मंत्रियों और विधायकों में मुलाकातों का दौर शुरू हो गया। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट खेमों में सक्रियता बढ़ी है। दोनों खेमों के कुछ नेता दिल्ली पहुंच चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक स्वास्थ्य कारणों से गहलोत अपने सरकारी आवास में ही विश्राम कर रहे हैं, लेकिन वह टेलीफोन के माध्यम से अपने विश्वस्तों और केंद्रीय नेताओं के संपर्क में हैं। पायलट पिछले कुछ दिन से दिल्ली में हैं। सूत्रों के अनुसार उनकी पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी अजय माकन से मुलाकात हुई है। इसी बीच बीते 18 सितंबर को मुख्यमंत्री के ओएसडी लोकेश शर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने एक ट्वीट में लिखा था कि ‘मजबूत को मजबूर और मामूली को मगरूर किया जाए, बाड़ ही खेत को खाए, उस फसल को कौन बचाए।’

दरअसल, पंजाब में पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के बीच चल रहे झगड़े के चलते राज्य में पार्टी को आगामी विधानसभा चुनाव में भारी नुकसान न उठाना पड़े इसके लिए कांग्रेस आलाकमान ने चुनाव से करीब चार महीने पहले राज्य में बड़ा बदलाव कर डाला। कांग्रेस के इस बदलाव चलते राजनीतिक पंडित मान रहे हैं कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले बड़े बदलाव होंगे।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सत्ता में भागीदारी को लेकर फैली अफवाहों के बीच कांग्रेस हाईकमान ने सीएम भूपेश बघेल और मंत्री टीएस सिंह देव को पिछले महीने दिल्ली तलब किया था। दोनों नेताओं ने पिछले महीने 24 अगस्त को दिल्ली आकर केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात की थी। भूपेश बघेल और टीएस सिंह देव के बीच पार्टी के सत्ता में आने के समय से ही मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए खींचतान रही है। सिंहदेव समर्थकों का दावा है कि पार्टी ने दोनों नेताओं के बीच ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बनाने का फॉर्मूला तय किया था। लिहाजा ढाई बरस बीतने के बाद फिर यह समस्या खड़ी हो गई है कि सिंहदेव को वायदे अनुसार सीएम कब बनाया जाएगा।

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव 2018 में मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल थे। अब वे फिर से दावेदार हैं। उन्हें उम्मीद है कि आलाकमान उनके पक्ष में फैसला लेगा। तब राहुल गांधी ने संकेत दिया था कि बघेल और सिंहदेव, पांच साल के कार्यकाल को समान रूप से साझा करेंगे। भूपेश बघेल और सिंह देव के बीच बीते 17 जून से ही विवाद चल रहा है। इस दिन ही भूपेश बघेल ने सीएम के तौर पर अपने ढाई साल पूरे किए है।


दरअसल, दिसंबर 2018 में सत्ता में आई कांग्रेस में उस वक्त सीएम पद के दावेदारों में भूपेश बघेल के अलावा टीएस सिंहदेव और ताम्रध्वज साहू भी थे, लेकिन भूपेश बघेल को ही सीएम बनाया गया। उस वक्त कहा गया था कि भूपेश बघेल को सीएम बनाने के साथ ही ढाई साल का करार हुआ है। पहले ढाई साल भूपेश बघेल सीएम रहेंगे और उसके बाद टीएस सिंहदेव नेतृत्व संभालेंगे। हालांकि ये चर्चाएं ही थीं, इस पर पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर कभी कुछ नहीं कहा गया। ये चर्चाएं 17 जून के बाद से फिर शुरू हुईं, जब भूपेश बघेल का ढाई साल का कार्यकाल पूरा हो गया। हालांकि इसके बाद भी भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव यही कहते रहे कि कांग्रेस हाईकमान की ओर से ही इस पर कोई फैसला लिया जाएगा। दोनों नेताओं का कहना है कि इस पर केंद्रीय नेतृत्व की ओर से जो भी आदेश होगा, वे उसे मानेंगे। बाहर से भले दोनों नेता आलाकमान पर बात डाल रहे हैं, लेकिन सूत्र बताते हैं कि अंदरखाने दोनों में जबर्दस्त घमासान चल रहा है।

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