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अमेरिकी संसद में भारतीय झंडा लहराने वाले विन्सेंट जेवियर के खिलाफ दिल्ली में शिकायत दर्ज

अमेरिकी संसद भवन कैपिटल हिल में हजारों की संख्या में इकट्ठा ट्रंप समर्थकों ने जिस तरह तोड़-फोड़ की उससे पूरी दुनिया आश्चर्य में है। ट्रंप समर्थकों ने टेबल, कुर्सी तोड़े और अमेरिकी झंडे और ट्रंप के प्लेकार्ड भी दिखाए, इससे हिंसक माहौल बना। उपद्रव के दौरान ट्रंप समर्थकों द्वारा लहराए गए झंडों में भारतीय झंडा भी दिखाई दिया। भारतीय तिंरगा लहराने वाले समर्थक का नाम विन्सेंट जेवियर है। जेवियर भारत के केरल के रहने वाले है। जेवियर मोदी समर्थक है, पहले फेसबुक पर लिखा कि ट्रंप की रैली में जाने का बहुत मजा आया। लेकिन अमेरिकी संसद में उपद्रव का वीडियो वायरल होने के बाद उसने ट्रंप के समर्थन से जुड़ी सारी पोस्टें हटा दी। लेकिन अब केरल के विन्सेंट जेवियर के खिलाफ नई दिल्ली के कालकाजी पुलिस थाने में एक शिकायत दर्ज की गई है।

शिकायतकर्ता दीपक सिंह ने देशद्रोह, यूएपीए और राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम के अपमान की रोकथाम के लिए कार्रवाई की मांग की है। हालांकि झंडे लहराए जाने को लेकर भारतीय राजनीति में गर्माहट पैदा हो गई है। बीजेपी सांसद वरूण गांधी ने अमेरिकी संसद में हुई हिंसा का एक वीडियो अपने ट्वीट पर शेयर किया, जिसमें उन्होंने लिखा कि वहां भारतीय झंडा क्यों है??? यह एक ऐसी लड़ाई है जिसमें हमें निश्चित रूप से शामिल होने की जरूरत नहीं थी। वरूण गांधी के द्वारा शेयर वीडियो पर ट्वीट करते हुए कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि दुर्भाग्यवश वरूण गांधी, कुछ भारतीय भी उस मानसिकता के साथ हैं, जो तुरही भीड़ के रूप में हैं, जो गर्व के बिल्ला के बजाय एक हथियार के रूप में झंडे का उपयोग करने का आनंद लेते हैं, और उन सभी की निंदा करते हैं जो उनसे राष्ट्रविरोधी और गद्दार के रूप में असहमत हैं। वह झंडा हम सभी के लिए एक चेतावनी है। इसके बाद दोनों एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने लगे। शशि थरूर को जवाब देते हुए वरूण गांधी ने लिखा दुर्भाग्यवश, अधिकांश उदारवादियों ने भारत में भी राष्ट्रविरोधी विरोध (जैसे जेएनयू में) में इसके दुरुपयोग की चेतावनियों को घोर नजरअंदाज कर दिया है। यह हमारे लिए गर्व का प्रतीक है, और हम इसे किसी भी मानसिकता के कारण संबंध के बिना पूजा करते हैं।

बता दें कि दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका 7 जनवरी को अपने ही बनाए सविधान की उस समय धज्जि उड़ाता दिखा जब संसद के बाहर निवर्तमान राष्ट्पति डोनाल्ड ट्रम्प के समर्थक हिंसा पर उतारू हो गए थे। यहां वोटिंग के 64 दिन बाद जब अमेरिकी संसद जो बाइडेन की जीत पर मुहर लगाने जा रही थी। ऐसे समय में अमेरिकी लोकतंत्र शर्मसार हो गया। देखते ही देखते ट्रम्प के समर्थक दंगाइयों में तब्दील हो गए। वे न केवल संसद में घुसे बल्कि जमकर तोड़फोड़ और हिंसा की। यही नहीं बल्कि गोलियां भी चली। हिंसा में कुल चार लोगों मौत हो गई है। सुरक्षा एजेंसियां ट्रम्प समर्थकों के प्लान को समझने में नाकाम रहीं। बामुश्किल मिलिट्री की स्पेशल यूनिट दंगाइयों को काबू कर पाई। कई घंटे तक हुए बवाल के बाद संसद की कार्यवाही फिर से शुरू की जा सकी। फिलहाल वाशिंगटन में 15 दिन के लिए आपातकाल लगा दिया गया है।

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