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गठबंधन का फायदा राज्यों में उठाएगी कांग्रेस

 कांग्रेस की रणनीति है कि वह 2019 में भाजपा को हराने के लिए बनने जा रहे विपक्षी दलों के गठबंधन का फायदा राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी उठा सके। इसके लिए वह हर तरह से समझौता करती हुई दिखाई देती है। यहां तक कि उत्तर प्रदेश में वह लोकसभा की कम सीटें मिलने के बावजूद गठबंधन में शामिल रहेगी। खबर है कि 80 सीटों उत्तर प्रदेश में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के बीच गठबंधन हो गया है। इन चारों दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर भी सहमति बन चुकी है। सबसे ज्यादा सीटों पर बसपा चुनाव लड़ सकती है। कांग्रेस को 8 और रालोद को सपा के कोटे से सीटें देने पर सहमति होने की बात कही जा रही है।
अभी देश के तीन बड़े राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन तीनों राज्यों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को हटाने के लिए कांग्रेस क्षेत्रीय पार्टियों से गठबंधन करना चाहती है। मध्यप्रदेश में कांग्रेस और मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन की खबर है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आने वाले दिनों में इसकी घोषणा कर सकते हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार दोनों ही पार्टियों में 60:40 फॉर्मूला के तहत समझौता हुआ है। मायावती चाहती हैं कि अगर कांग्रेस-बीएसपी की सरकार बनती है तो उनकी पार्टी के चार नेताओं को मंत्री बनाया जाए। इसके अलावा एक डिप्टी सीएम का पद भी उनकी पार्टी के नेता को मिले।
खबर है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने कुछ दिनों पहले गठबंधन को लेकर दिल्ली में मायावती से मुलाकात की थी। उसके बाद से गठबंधन की खबरें राजनीतिक गलियारों में सुर्खियां बन रही हैं। दरअसल, मध्य प्रदेश में बसपा से गठबंधन करके कांग्रेस दलित वोट बैंक को अपने पक्ष में करना चाहती है। कांग्रेस के कई नेताओं का मानना है कि शिवराज सरकार के खिलाफ राज्य में एंटी इनकंबेंसी है और मध्य प्रदेश के बड़े नेता बिना किसी मतभेद के अगर एक साथ चुनाव में जनता के बीच जाते हैं तो कांग्रेस को जीत जरूर मिलेगी।

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