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फुटकर पार्टियों का गठबन्धन

ज्यों-ज्यों लोकसभा चुनाव की तारीख पास आती जा रही है त्यों-त्यों यूपी की 80 लोकसभा सीटों पर जोर आजाइश के लिए एक नया गठबन्धन बनकर खड़ा हो रहा है। या यूं कह लीजिए हर दिन एक नए गठबन्धन की आधारशिला रखी जा रही है जिसकी मियाद भले ही चन्द दिनों की हो लेकिन यूपी की राजनीति में चर्चा का विषय जरूर बन रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि यूपी की 80 लोकसभा सीटों को आज भी केन्द्र की चाबी के रूप में माना जाता है। कहा जाता है कि जिस किसी दल अथवा गठबन्धन ने यूपी की अधिक से अधिक सीटों पर विजय प्राप्त कर ली उसे केन्द्र की सत्ता तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता, यही वजह है कि छोटे से लेकर बडे़ से बड़ा दल यूपी की अधिक से अधिक सीटों पर आधिपत्य जमाने की गरज से हथकण्डे अपना रहा है। इसी तरह का हथकण्डा अपनाने का प्रयास अपना दल नाम के उस दल ने भी किया है जिसे भाजपा ने दोफाड़ करके अपना हित साधा था। 
यूपी में एक नए गठबन्धन की नींव अपना दल नाम की वह पार्टी रखने की घोषणा कर रही है जिसका अस्तित्व ही भाजपा के रहमो-करम पर टिका हुआ था। बिन मांगे भाजपा को समर्थन देने वाले अपना दल को पूरे पांच वर्षों तक कोई अहमियत नहीं दी गयी। लोकसभा चुनाव की तारीख पास आते ही अपना दल ने भाजपा से नाता तोडे़ जाने की बात कही और यूपी मंे बिना किसी के सहारे चुनाव लड़ने की घोषणा भी कर दी थी लेकिन अपना दल (कृष्णा पटेल गुट) को शायद अपनी राजनीतिक हैसियत का अंदाजा है लिहाजा उसे यूपी में अपनी पहचान बनाने के लिए किसी न किसी ऐसे दल की जरूरत है जो गठबन्धन के बूते उसकी पहचान को बरकरार रख सके।
अपना दल को पहले सपा-बसपा गठबन्धन में सीटों के मिलने की उम्मीद थी लेकिन इस उम्मीद के टूट जाने के बाद से यह दल अन्य छोटे दलों के साथ गठबन्धन की आधारशिला रख रहा है। आज अपना दल (कृष्णा पटेल गुट) की प्रदेश अध्यक्ष पल्लवी पटेल ने पार्टी की रणनीतियों का खुलासा करते हुए कहा है कि अपना दल अब किसी अन्य दल में उम्मीद तलाशने के बजाए आम आदमी पार्टी के साथ मिलकर एक नया गठबन्धन तैयार करेगा। कहा गया कि इस सन्दर्भ में आम आदमी पार्टी नेताओं से बात चल रही है और उम्मीद है कि जल्द ही कोई न कोई नतीजा निकलकर सामने आयेगा। सुश्री पटेल के मुताबिक आम आदमी पार्टी से गठबंधन लगभग तय हो चुका है साथ ही अन्य दलों से भी बातचीत चल रही है। जल्द ही तस्वीर साफ हो जाएगी।
हालांकि अपना दल की प्रदेश अध्यक्ष ने पूर्व मंत्री शिवपाल यादव के नेतृत्व वाली प्रगतिशील समाजवादी पार्टी से गठबंधन की संभावना से इनकार किया है लेकिन उम्मीद जतायी जा रही है कि यदि इस तरह का कोई नया गठबन्धन बनकर उभरता है तो शिवपाल यादव की पार्टी उस गठबन्धन में मुख्य भूमिका निभायेगी। हालांकि इस सम्बन्ध में अभी तक शिवपाल यादव से कोई बातचीत नहीं हुई है लेकिन कहा जा रहा है कि अपना दल के कई नेता शिवपाल यादव से मिलकर रूपरेखा बना चुके हैं।
फिलहाल यूपी की राजनीति में फुटकर पार्टियों का यह नया गठबन्धन क्या गुल खिलायेगा? इस पर संदेह बरकरार है लेकिन इस नए गठबन्धन की घोषणा ने यूपी की राजनीति में चटखारे लेने लायक चर्चा अवश्य छेड़ दी है।

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