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  •  मीडियाकर्मी पर हमले की जांच सीबीसीआईडी को।

  • जांच प्रभावित करने की नीयत से उठाया गया कदम।
30 जुलाई, 2018 का दिन उत्तराखण्ड की जनता शायद ही कभी भूल पाए। इस दिन राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का रौद्र रूप पूरे देश ने देखा। मुख्यमंत्री जनता दरबार में गुहार लगाती एक महिला शिक्षक से इस कदर कुपित हो उठे कि उन्होंने उसे तत्काल सस्पेंड करने और गिरफ्तार करने के आदेश दे डाले। उनके इस कदम की सर्वत्र निंदा हुई थी। सीएम लेकिन सीएम होता है। प्रधानमंत्री मोदी भले ही खुद को प्रधानसेवक कहें, उनके मुख्यमंत्री अपने को राजा मानते हैं और उसी प्रकार का आचरण भी करते हैं।

राज्य सरकार की संवेदनहीनता का एक अन्य उदाहरण और सामने आया है। खबर है कि राज्य का गृह विभाग हल्द्वानी में ‘दि संडे पोस्ट’ के पत्रकार मनोज बोरा को गोली मारने के मुख्य साजिशकर्ता सतीश नैनवाल पर खास मेहरबानी दिखाने जा रहा है। गौरतलब है कि सतीश नैनवाल ने दो सुपारी किलर्स ‘दि संडे पोस्ट’ के राज्य प्रभारी दिव्य सिंह रावत की हत्या करने के लिए भेजे। गलत निशानदेही के चलते गोली मनोज बोरा को मार दी गई। हल्द्वानी पुलिस ने इन दो कॉन्ट्रैक्ट किलर्स को जल्द ही धर दबोचा था। इन्होंने न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने दिए अपने 164 के बयान में मुख्य साजिशकर्ता के तौर पर सतीश नैनवाल का नाम लिया। इस मामले की पूरी ईमानदारी से विवेचना कर रहे सब इंस्पेक्टर नीरज वल्दिया को राजनीतिक दबाव में आकर एसएसपी नैनीताल एसके मीणा ने जांच से पृथक कर दिया। अब जांच हल्द्वानी के कोतवाल राठौर को सौंपी गई है। इस बीच मनोज बोरा की याचिका पर उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने पुलिस से स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। पुलिस को कल यानी मंगलवार, 2 जुलाई को यह रिपोर्ट देनी है।
गोली लगने के बाद प्रेस से मुखातिब हुए मनोज बोरा (बीच में)
सतीश नैनवाल का भाई भाजपा का ब्लॉक स्तरीय नेता है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के खिलाफ विगत विधानसभा चुनाव में बागी हो चुनाव लड़ने के चलते उसे पार्टी से निकाल दिया गया था। अजय भट्ट की हार का असल कारण बने इस नेता को पिछले दिनों लोकसभा चुनाव से पूर्व पार्टी में शामिल करा लिया गया। जानकारों की मानें तो भट्ट इसके लिए कतई तैयार नहीं थे। लेकिन राज्य भाजपा में भट्ट की मुखालफत करने वाले नेताओं ने नैनवाल की पार्टी में रि-एंट्री करा डाली। अब प्रमोन नैनवाल अपने भाई को बचाने के लिए अपने रसूख का इस्तेमाल करने में सफल होता नजर आ रहा है। सीधे उच्च स्तर से इस गोलीकांड की जांच को सीबीसीआईडी को सौंपने के आदेश जारी होने के पुष्ट समाचार ‘दि संडे पोस्ट’ को मिले हैं। ऐसे समय में जबकि अपराधी सतीश नैनवाल के खिलाफ हल्द्वानी पुलिस धारा 82 की कार्यवाही शुरू कर गैरजमानती वारंट हासिल कर चुकी है, इस मामले का सीबीसीआईडी के हाथों में सौंपने की कवायद से साफ जाहिर होता है कि अपराधी को बचाने का काम जोरों पर है। इतना ही नहीं मीडिया कर्मियों पर हमलों को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री की संवेदनहीनता का भी इससे परिचय मिलता है। जानकारों की मानें तो सतीश नैनवाल को मिल रहे अघोषित सरकारी संरक्षण के पीछे प्रदेश अध्यक्ष और नैनीताल सांसद अजय भट्ट के खिलाफ राज्य भाजपा की लॉबी का होना है।

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