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  • प्रियंका यादव, प्रशिक्षु

पैगंबर मोहम्मद पर दिए गए विवादित बयान को लेकर विवाद कम होने के बजाए अब खूनी रूप ले चुका है। गत सप्ताह राजस्थान के उदयपुर में कन्हैयालाल की धारदार हथियार से गर्दन काटकर नृशंस हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड से लोगों में भारी आक्रोश है। कन्हैयालाल के अंतिम संस्कार में जुटे हजारों लोगों ने ‘हत्यारों को फांसी दो’ का नारा लगाते हुए इसका इजहार किया है। भाजपा समेत कई संगठनों ने इस हत्याकांड के खिलाफ रैली और बाजार बंद का आह्वान किया है तो प्रदेश भर में एक महीने के लिए धारा 144 लागू कर दी गई है

पिछले दिनों पैगंबर मोहम्मद को लेकर भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नुपूर शर्मा द्वारा दिया गया विवादित बयान को लेकर विवाद कम होने के बजाए अब खूनी रूप लेना लगा है। दरअसल गत सप्ताह राजस्थान के उदयपुर में कन्हैयालाल की धारदार हथियार से गर्दन काटकर नृशंस हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है। कन्हैयालाल के अंतिम संस्कार में जुटे हजारों लोगों ने ‘हत्यारों को फांसी दो’ का नारा लगाते हुए इसका इजहार किया है। भाजपा समेत कई संगठनों ने उदयपुर में कन्हैयालाल हत्याकांड के खिलाफ रैली और बाजार बंद का आह्नान किया है। इसको देखते हुए पूरे शहर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सात थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू बरकरार रखा गया है। इस बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उदयपुर में कन्हैया के परिवार से मुलाकात की। कन्हैयालाल की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद से लगातार पूछताछ चल रही है और उनकी पूरी कुंडली खंगाली जा रही है। पता लगाया जा रहा है कि उनके तार किन-किन लोगों से जुड़े हुए हैं और इस हत्या कांड में और कौन-कौन शामिल था।


दूसरी तरफ बढ़ते आक्रोश को लेकर पूरे राजस्थान में एक माह तक धारा 144 लागू कर दी गई है। प्रदेश में पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के अवकाश निरस्त कर दिए गए हैं। घटना की जांच के लिए एटीएस आइजी प्रफुल्ल कुमार के नेतृत्व में एसआइटी गठित की गई है और आरोपी रियाज और गोस मोहम्मद को राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन जिस तरह से आरोपियों ने हत्या के बाद वीडियो बनाकर अपनी क्रूरता का बखान किया और मृतक कन्हैया लाल की जान बचाने की गुहार को नजर अंदाज किया गया, उससे राजस्थान पुलिस पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।


यह सवाल इसलिए भी बेहद अहम हो जाते हैं कि राज्य अभी पिछले महीने पहले 2 मई को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह नगर जोधपुर में परशुराम जयंती के मौके पर सांप्रदायिक हिंसा का सामना कर चुका है। दरअसल उदयपुर में टेलर कन्हैयालाल ने कुछ ही दिन पहले बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा के पैगंबर मोहम्मद को लेकर किए गए विवादित बयान के समर्थन में एक पोस्ट जारी किया था। कन्हैया लाल के परिवार के अनुसार कन्हैयालाल के छोटे बेटे ने इस पोस्ट को जारी किया था। जिसके बाद से ही उन्हें धमकियां मिलने लगी थी। इसके लिए उन्होंने पुलिस में शिकायत भी की जिसके बाद उन्हें पुलिस प्रशासन से पुलिस सुरक्षा भी मुहैया कराई गई थी। लेकिन महज 6 दिन के बाद सुरक्षा हटा ली गई। बिना सुरक्षा के जब वे अपनी दुकान गए तो आरोपियों ने अपने मकसद को अंजाम देते हुए कन्हैया की हत्या कर दी। पुलिस आरोपियों को घटनास्थल से साठ किलोमीटर दूर राजसमंद से हिरासत में ले लिया। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी को हत्याकांड की जांच का आदेश दे दिया है।
गौरतलब है कि 28 जून को कन्हैयालाल की दुकान में घुसकर हत्या कर दी गई। कन्हैयालाल को सोशल मीडिया पर कुछ टिप्पणियां करने के मामले में स्थानीय पुलिस ने हाल ही में गिरफ्तार किया था। जमानत मिलने के बाद, कन्हैयालाल ने 15 जून को पुलिस को बताया था कि उन्हें धमकी भरे फोन आ रहे हैं और जब कन्हैयालाल की हत्या हो गई है तो एएसआई भंवर लाल को शिकायत के समय लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। इस बीच पुलिस ने दावा किया है कि कन्हैयालाल की शिकायत के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों में समझौता करा दिया था। इस घटना के बदमाशों ने एक-एक कर 3 वीडियो जारी किए। एक में हत्या की धमकी, दूसरा हत्या का लाइव वीडियो और तीसरा हत्या की जिम्मेदारी।


कन्हैयालाल का मामला राजस्थान में धार्मिक उन्माद का कोई अकेला मामला नहीं है। पिछले दो महीने में राजस्थान के जोधपुर, करौली जैसे शहर इसका शिकार हो चुके हैं। राज्य में पिछले 4 साल में 40 से ज्यादा सांप्रदायिक दंगे हो गए हैं। वहीं दंगों की बात करें तो 1 हजार 100 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। लेकिन इस घटना में जिस तरह आरोपियों ने वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धमकी दी है और अपने गुनाह को कबूला है, उसे देखते हुए इसमें आतंकवादी साजिश का भी शक जताया जा रहा है। इसलिए अब पूरे मामले की एनआईए जांच करेगी। ऐसा बताया जा रहा है कि जिन दो आरोपियों रियाज अख्तरी और गौस मोहम्मद ने हत्याकांड को अंजाम दिया है उनका संबंध पाकिस्तान के दावत-ए-इस्लामी संगठन से हो सकता है। और उनके इशारे पर ही इस क्रूर हत्याकांड को अंजाम दिया गया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी आतंकी साजिश का शक जताया है। कहा जा रहा है कि आरोपियों ने जिस तरह दर्जी कन्हैया लाल की हत्या को अंजाम दिया, वह बड़े खतरे का संकेत दे रहा है। आरोपियों ने न केवल हत्या करने का पूरा वीडियो बनाया, बल्कि बाद में अपने गुनाह को भी वीडियो के जरिए कुबूल किया उससे साफ है कि वह ऐसा कर दहशत फैलाना चाह रहे थे। इसलिए जांच एजेंसियों को बड़ी साजिश का भी अंदेशा सता रहा है।


कन्हैयालाल के अलावा राजस्थान में धार्मिक उन्माद पिछले कुछ सालों में बढ़ा है। इससे पहले ऐसा ही एक मामला जोधपुर में भी हुआ था। तब परशुराम जयंती और ईद के मौके पर धार्मिक झंडा को लेकर दो समुदाय में झड़प हो गई थी। इस दौरान जालोरी गेट चौराहे पर झंडे लगाने को लेकर विवाद हुआ था। पूरे शहर में तीन दिन तक कर्फ्यू लगा हुआ था। करौली : दो अप्रैल को करौली में हिंदू नव वर्ष के मौके पर बाइक रैली निकालने के दौरान हिंसा भड़क गई थी। मामला रैली के दौरान पथराव से बिगड़ गया। उपद्रवियों ने 35 से ज्यादा दुकानों, मकानों और बाइकों को आग के हवाले कर दिया। करीब 15 दिन तक कर्फ्यू रहा।


झालावाड़ : 19 जुलाई 2021 को दो समुदाय के बीच विवाद हो गया। इसके कुछ देर बाद यहां हिंसा भड़क गई। घरों, दुकानों और बाइकों में आगजनी और तोड़-फोड़ की गई। बारां : 11 अप्रैल 2021 को दो युवकों की हत्या कर दी गई। जिसके कारण दो समुदायों में हिंसा भड़क गई। इसके अलावा वर्ष 2006 में जैन तीर्थ स्थल ऋषभदेव में उपद्रव हुआ था। प्रसिद्ध ऋषभदेव मंदिर के विवाद को लेकर आदिवासी और जैन समाज के बीच विवाद हुआ था। यह मामला करीब 6 दिन तक चला। इसमें एक पक्ष से जुड़े लोग दूसरे के घरों में घुसे और तोड़-फोड़ और आगजनी हुई थी। मामला आउट ऑफ कंट्रोल हो चुका था। एक बार तो पुलिस भी बैकफुट पर आ गई थी। कई लोगों को पुलिस सुरक्षा में घरों से बाहर निकाला था। फिर पुलिस ने हवाई फायरिंग की तब जाकर मामला शांत हुआ।


उदयपुर जिले के खेरवाड़ा तहसील में ऐसा उपद्रव हुआ जो पुलिस की फायरिंग के बाद शांत हुआ। दरअसल शिक्षक भर्ती के अनारक्षित पदों को एसटी अभ्यथि्र्ायों से भरने की मांग को लेकर हजारों की संख्या में युवक डूंगरपुर जिले के काकरी-डूंगरी इलाके में विरोध कर बैठे थे। मामला बढ़ा तो उन्होंने गुजरात हाईवे जाम कर दिया। मामला देखते ही देखते खेरवाड़ा कस्बे तक पहुंच गया। उपद्रवियों ने हाईवे पर खड़े वाहन सहित अन्य सामान से भरे ट्रकों को आग के हवाले कर दिया। पुलिस पर पथराव किया तो पुलिस खुद जान बचाकर भागी। घरों और दुकानों में लूट की और लोगों के साथ मारपीट भी की। 4 दिन तक ऐसा ही माहौल रहा फिर अंतिम दिन स्थिति आउट ऑफ कंट्रोल हुई तो पुलिस ने फायरिंग की जिसमें एक युवक की मौत हुई थी।
उदयपुर संभाग के राजसमंद जिले में 6 दिसंबर 2017 को दिल दहला देने वाला हत्याकांड हुआ था। अवैध संबंधों को लेकर शंभु रेगर नामक आरोपी ने बंगाल के निवासी राजसमंद में मजदूरी करने वाले मोहम्मद अफराजुल की हत्या की थी। हत्या भी सामान्य नहीं थी। शंभु रेगर ने अपने भांजे को मोबाइल दिया और वीडियो ऑन कर दिया। फिर शंभु ने अफराजुल पर धारदार हथियार से वार किए और फिर पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया। जैसे ही सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ तो उदयपुर ही नहीं देशभर को चौंका दिया। इसके बाद उदयपुर में तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी जिसे पुलिस ने बमुश्किल काबू किया था।


गौरतलब है कि कुछ इसी प्रकार की घटना उत्तर प्रदेश में वर्ष 2019 में हुई थी। लखनऊ के नाका हिंडोला स्थित ऑफिस में हिंदू समाज पार्टी के अध्यक्ष कमलेश तिवारी की भी कन्हैया लाल के समान ही हत्या कर दी गई थी। दरअसल भगवा कुर्ता पहने आरोपी मिठाई के डिब्बे में छिपाकर चाकू और पिस्टल लाए थे। उन्होंने कमलेश तिवारी के गले में करीब 15 से ज्यादा वार करने के बाद गोली मारकर हत्या कर दी थी। पकड़े गए आरोपी शेख अशफाक और पठान मोइनुद्दीन के अनुसार वे कमलेश तिवारी की तरफ से 2015 में पैगंबर मोहम्मद को लेकर दिए गए बयान से नाराज थे। इन्होंने भी वारदात के पहले ही तिवारी को सर कलम करने की धमकी दी थी। हत्या के बाद इन दोनों को राजस्थान और गुजरात सीमा पर गिरफ्तार किया गया था। पिछले कुछ सैलून में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनआरसीबी) के आंकड़ों के अनुसार देश में सबसे ज्यादा सांप्रदायिक हिंसा के मामले बिहार में सामने आए हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश में भी बड़ी संख्या में सांप्रदायिक हिंसा के मामले सामने आए हैं।

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