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दावा क्लीन स्वीप का, चिंता 2024 की

उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनावों में भाजपा ने नगर निगम की सभी 17 सीटों पर चुनाव जीतकर यह संदेश देने का काम किया है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में वह विजय पताका फहराने से चूकेंगे नहीं। मुख्यमंत्री योगी ने इस चुनाव में ट्रिपल इंजन की सरकार का नारा भी दिया था जिसमें उन्होंने देश, प्रदेश और शहर तीनों जगह भाजपा के शासन का मॉडल जनता के सामने रखा था। लेकिन दूसरी तरफ देखें तो इस निकाय चुनाव में भाजपा के लगभग 25 सांसदों के क्षेत्र में जनता ने भाजपा के प्रत्याशियों को हराकर भाजपा का यह गुमान तोड़ दिया है। विपक्षी दल इसे महंगाई, बेरोजगारी, ठप्प कारोबार, ध्वस्त कानून- व्यवस्था, नारी-युवा विरोधी करार दिया है और इसे भाजपाई सोच और भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता का फैसला बताया है। साथ ही कहा है कि लोकसभा चुनाव में जनता भाजपा की नाव पलट देगी।

ऐसा नहीं है कि सभी 17 मेयर सीट जीतकर भाजपा अपनी जीत के जश्न में डूबी हो, बल्कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर चिंतित भी नजर आ रही है। पार्टी इस सच को नहीं नकार सकती है जिसमें उसे नगर निगम से निचले स्तर के चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा है। फिलहाल यूपी में ‘मिशन 80’ की तैयारी में जुटी भाजपा के लिए निकाय चुनाव बहुत बड़ा झटका बनकर उभरा है। प्रदेश में कुल 91 नगर पालिका परिषद और 191 नगर पंचायतों में पार्टी को जीत मिली है जबकि 108 नगर पालिका परिषद और 353 नगर पंचायतों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। पार्टी उन दो दर्जन वर्तमान सांसदों के रिपोर्ट कार्ड को खंगालने में जुट गई है जिनके क्षेत्र में निकाय चुनाव का परिणाम प्रतिकूल रहा है। बहरहाल अब तक निश्चिंत दिख रही भाजपा को निकाय चुनाव में जमीनी हकीकत का पता चल जाने के बाद पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति में फेरबदल कर लिया है। जिसके तहत अब हर महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश आएंगे और गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा खुद चुनाव की कमान संभालेंगे। भाजपा के सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और अमित शाह अभी से पूरे अगले साल की रणनीति बनाने में जुट गए हैं।

सूत्रों के मुताबिक 13 मई को परिणाम आने के अगले ही दिन पार्टी मुख्यालय ने सभी जिला अध्यक्षों से रिपोर्ट मांग ली थी। 17, 18,19 मई की क्षेत्रीय बैठकों में इस पर बिंदुवार चर्चा की गई। कहा जा रहा है कि पार्टी के पास पूरा लेखा-जोखा आ गया है। सूत्र दावा कर रहे हैं कि आगामी जून माह से हर महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी न किसी उद्घाटन व शिलान्यास या लोकार्पण कार्यक्रम के जरिए पश्चिम से पूरब और अवध से बुंदेलखंड के जिलों तक पहुंचेंगे। वहीं, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा संगठनात्मक कार्यक्रमों को धार देकर यूपी की चुनावी रणनीति बनाएंगे।

इस चुनाव में भाजपा पर निर्दलीय भारी रहे। भले ही महापौर पद पर एक भी उम्मीदवार निर्दलीय न जीता हो पर पार्षद पर यह संख्या कम नहीं रही। प्रदेश में 206 निर्दलीय पार्षद जीत गए। उधर, 41 नगर पालिका अध्यक्ष भी निर्दलीय जीते जबकि पालिका में ही 3130 निर्दलीय सदस्य जीते हैं। नगर पालिकाओं में तो 58 प्रतिशत से ज्यादा सदस्य ऐसे रहे जो निर्दलीय रूप में चुनाव जीत गए। इसी तरह से नगर पंचायतों में भी 67 प्रतिशत से ज्यादा निर्दलीय सदस्य विजयी रहे। राजनीतिक दलों में भाजपा को सबसे ज्यादा 31.22 प्रतिशत मत मिले, लेकिन निर्दलियों को उससे भी ज्यादा 33.75 प्रतिशत वोट मिले।

पार्टी की निकाय चुनाव में जो स्थिति सामने आई है उसके अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी को केंद्रीय मंत्री डॉ संजीव बालियान के इलाके में ही बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। जिले की 2 नगर पालिका परिषदों और आठ नगर पंचायतों में से भाजपा 9 सीट हार गई है। महज मुजफ्फरनगर सीट पर ही भाजपा अपनी इज्जत बचाने में सफल रही है। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह के चुनाव क्षेत्र एटा में भी स्थिति उनके लिए अनुकूल नहीं कही जा सकती है। एटा जिले की चार नगर पालिकाओं में से केवल दो पर भाजपा जीत पाई है जबकि नगर पंचायतों में 6 में से केवल एक पर ही भाजपा जीती है।

सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र की बात करें तो वहां भाजपा के लिए निकाय चुनाव से पार्टी ज्यादा खुश नहीं है। सहारनपुर में मेयर का चुनाव बेशक भाजपा जीत गई है तो वहीं पहली बार देवबंद में भी भाजपा ने विजय हासिल की है। नकुड और सरसावा भी भाजपा के खाते में आए हैं। यही नहीं बल्कि इसी लोकसभा क्षेत्र की शामली नगर पालिका भी भाजपा ने जीत ली है लेकिन इसके अलावा पूरे लोकसभा क्षेत्र में भाजपा ने सभी सीटें गंवा दी है। सहारनपुर जिले में भी सरसावा में निर्दलीय, गंगोह में बसपा, नानौता में निर्दलीय, रामपुर मनिहारान में बसपा, अंबेहटा पीर में रालोद, तीतरों में सपा, बेहट में निर्दलीय और छुटमलपुर में गठबंधन प्रत्याशी विजयी हुए हैं। शामली जिले में कैराना, कांधला नगर पालिका और थाना भवन, जलालाबाद, गढ़ी पुख्ता, एलम, ऊन नगर पंचायत भी भाजपा हार गई है। इटावा के सांसद रमाशंकर कठेरिया के निर्वाचन क्षेत्र में भी पार्टी की स्थिति संतोषजनक नहीं रही है। भाजपा यहां नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत में एक भी सीट नहीं जीती है। इसके अलावा फर्रुखाबाद के सांसद मुकेश राजपूत के लोकसभा क्षेत्र में भी दो नगर पालिका और सात नगर पंचायतें भाजपा के हाथ से निकल गई हैं। यहां सदर नगर पालिका पर बसपा ने फिर से जीत दर्ज की है। जबकि भाजपा तीसरे नंबर पर आई है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई मुस्लिम इलाके ऐसे हैं जहां भाजपा ने मुस्लिम कार्ड खेलते हुए मुस्लिम प्रत्याशियों के सामने अपनी पार्टी से भी मुस्लिम उम्मीदवार ही मैदान में उतारे थे। लेकिन अधिकतर स्थान ऐसे है जहां से भाजपा परास्त हुई है। जिनमें बिजनौर की अफजलगढ़ पालिका अध्यक्ष सीट है। यहां से निर्दलीय प्रत्याशी तबस्सुम ने जीत हासिल की है। जबकि मुस्लिम भाजपा प्रत्याशी खतीजा हार गई। वहीं, रामपुर की टांडा पालिका पर निर्दलीय प्रत्याशी साहिबा सरफराज ने जीत दर्ज की है यहां बीजेपी के मेहनाज यह चुनाव हार गए। रामपुर नगर पालिका सीट पर सबको चौंकाते हुए आम आदमी पार्टी ने दमदार जीत हासिल कर ली है। यहां से ‘आप’ की सना खानम ने बाजी मार ली है। बदायूं की ककराला पालिका अध्यक्ष पर मरगून अहमद खां हार गए हैं। यहां निर्दलीय उम्मीदवार इन्तखाब ने जीत हासिल की है। जबकि आजमगढ़ पर निर्दलीय उम्मीदवार डॉ सबा शमीम ने परचम लहराया है।

सांसद साक्षी महाराज के चुनाव क्षेत्र उन्नाव जिले में तीन नगर पालिका और 16 नगर पंचायत हैं। जिनमें भाजपा को उन्नाव सदर के साथ ही सिर्फ दो नगर पंचायतों में जीत मिली है। यही नहीं बल्कि आजमगढ़ के सांसद और भोजपुरी गायक दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ के चुनाव क्षेत्र में भी भाजपा को बड़ा झटका लगा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में बस्ती के सांसद हरीश द्विवेदी हों या खलीलाबाद के सांसद प्रवीण निषाद या डुमरियागंज के सांसद जगदंबिका पाल, सबके लोकसभा इलाके में भाजपा का बुरा हाल है।

 

ओवेसी की उड़ी ‘पतंग’
उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव में ओवेसी की जिस पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी एआईएमआईएम को भाजपा की ‘बी टीम’ करार दिया जाता है उसने भी इस चुनाव में अपना जादू दिखा दिया है। इस चुनाव में ओवेसी की पतंग खूब उड़ी। यह पार्टी प्रदेश की 5 नगर पालिका परिषद सीटों के अलावा 75 पार्षदों के साथ जीतकर चर्चाओं में है। मेरठ में ओवेसी की पार्टी का दूसरे नंबर पर आना सपा के लिए चिंता का विषय है। एआईएमआईएम ने संभल (एशिया मुशीर), हाथरस जिले में सिकंदरा राव (मोहम्मद मुशीर), कानपुर जिले में घाटमपुर (अब्दुल अहद), मुरादाबाद में कुंदरकी नगर पंचायत (जीनत मेहंदी) में नगर पालिका परिषद की सीटें जीती और राज्य के बरेली जिले में थिरिया निजावत खान नगर पंचायत (इमरान खान) जीत ली है। मेरठ नगर निगम की ही बात करें तो यहां भाजपा के हरिकांत अहलूवालिया ने 1 लाख से अधिक मतों के अंतर से चुनाव जीता है। ओवैसी की पार्टी के प्रत्याशी अनस मेरठ के दूसरे स्थान पर रहे। उन्हें करीब 1.28 लाख मत मिले। मुस्लिम मतदाताओं द्वारा एआईएमआईएम उम्मीदवार के पक्ष में भारी मतदान के चलते ही सपा उम्मीदवार सीमा प्रधान को लगभग 1.15 लाख वोटों के साथ तीसरे स्थान पर धकेल दिया गया।

मतदान कम, मतगणना ज्यादा
गोरखपुर में डाले गए वोटों से ज्यादा वोट गिने जाने की धांधली की खबर पर चुनाव आयोग तत्काल संज्ञान लेकर मतगणना की सत्यता को जांचे और गलत पाए जाने पर रिकाउंटिंग करवाए। यह ट्वीट उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उस समय किया जब गोरखपुर में वोटों की गिनती के दौरान आश्चर्य चकित करने वाला मामला सामने आया। बताया जा रहा है कि गोरखपुर के नगर निगम चुनाव में कुल 3 लाख 63000 हजार पोलिंग हुआ था। लेकिन जब मतगणना की गई तो कुल वोटो की संख्या 4 लाख 87 हजार 1989 वोट पाए गए। इस पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी का कहना है कि इस चुनाव में भाजपा ने बेईमानी की है। गिनती में कई जगह धांधलेबाजी सामने आई है। छुटमलपुर में सपा का प्रत्याशी जब 26 मतों से जीत गया तो इस बात पर वहां की एसडीएम को डीएम कार्यालय से अटैच कर दिया गया। इसके अलावा मुगलसराय में जब एक सपा के किन्नर की जीत हो गई तो जबरन भाजपा के कैंडिडेट को हरा दिया गया। इसके बाद आक्रोशित किन्नर सड़क पर आ गए और नंगे हो गए। प्रशासन को फिर से गिनती करानी पड़ी। जिसमें किन्नर की जीत हुई।

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