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सेना में महिलाओं की भागीदारी के मामले में सीआईएसएफ शीर्ष पर

घर से लेकर बाहर तक विभिन्न क्षेत्रों में महिलाएं अपने साहस का लोहा मनवा रही हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 31 दिसम्बर 2017 तक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी के मामले में सीआईएसएफ शीर्ष पर है। भारतीय सेना में महिलाओं की भागीदारी सीआईएसएफ में 5.82% , सीआरपीएफ में 2.55% , एसएसबी में 2.36% , आईटीबीपी में 2.30% , बीएसएफ में 2.09% औऱ असम राइफल्स में 1.23% है।
पिछले 30 सालों में, भारत में महिलाओं ने जांबाज़ी का लंबा सफर तय किया है। ये बदलाव कुछ प्रेरक महिलाओं द्वारा दिए गए योगदान का ही परिणाम है कि महिलाएं हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रहीं हैं।
कुछ नाम जिन्होंने बढ़ाया देश का नाम
पुनिता अरोड़ा : इंडियन आर्मी की पहली महिला ले. जनरल
पुनिता अरोड़ा पंजाबी परिवार से थीं। भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद वह यूपी के सहारनपुर शहर में रहने लगीं। वह पहली इंडियन महिला थीं, इंडियन आर्म्ड फोर्स में दूसरी रैंक प्राप्त की थी वह भारतीय सेना की पहली महिला लेफ्टिनेंट जनरल रहीं, यही नहीं,  इंडियन नेवी में भी उन्होने सर्जन वाइस एडमिरल रैंक प्राप्त की थी। उसके बाद आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज 2004 में कमांडेंट के रूप में काम करने वाली देश की पहली महिला थीं।
पद्मावती बंदोपाध्याय : इंडियन एयर फोर्स की पहली महिला  ‘एयर मार्शल’
(पद्मावती बंदोपाध्याय पहली महिला ‘एयर मार्शल’ इंडियन एयर फोर्स)
पहली भारतीय महिला, जो इंडियन एयर फोर्स में ‘एयर मार्शल’ थीं। 1968 मे वह वाईएएफ से जुड़ी और 1978 उन्होंने डिफेन्स सर्विस स्टाफ कॉलेज से कोर्स पूरा किया। ये कोर्स करने वाली वह पहली महिला थीं।  उन्होंने 1971 में इंडिया-पाकिस्तान युद्ध में भी अपनी सेवाएं दीं। इसके लिए उन्हें विशिष्ट मैडल से सम्मानित किया गया।
प्रिया झिंगन : भारतीय सेना की पहली महिला कैडेट मिला था रोल नम्बर- 001
21 सितंबर, 1992 को बहादुर प्रिया झिंगन को पहली महिला कैडेट 001 के रूप में भारतीय सेना में भर्ती किया गया था। झिंगन ने हमेशा से ही सेना में शामिल होने का सपना देखा था। यहां उन्हें सभी ‘सर’ कहकर बुलाते थे और वे पुरुष कैडेट्स की तरह ही रहती थीं। सेना में भर्ती होने के बाद 1992 में, उन्होंने सेना प्रमुख को एक पत्र लिखा था, जिसमें उसने अन्य महिलाओं को भी भारतीय सेना में शामिल करने का सुझाव दिया था, उनकी बात मानी गई और 24 महिला कैंडिडेट्स भारतीय सेना में शामिल हुईं।
अंजना भदुरिया : महिलाओं के प्रथम बैच में शामिल होकर प्राप्त किया स्वर्ण पदक
अंजना भदुरिया भारतीय सेना में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली महिला है। वह हमेशा भारतीय सेना में एक अधिकारी बनना चाहती थीं। माइक्रोबायोलॉजी में एमएससी की डिग्री प्राप्त करने के बाद अंजना भदुरिया ने महिला विशेष प्रवेश योजना के माध्यम से सेना में महिला अधिकारियों को शामिल करने के एक विज्ञापन पर आवेदन किया और 1992 में भारतीय सेना में महिला कैडेट्स के पहले बैच में भर्ती की गईं।
शांति टिग्गा : गजब के फायरिंग स्किल्स वाली जांबाज पहली महिला जवान
शांति टिग्गा ने पति की मृत्यु के बाद जब भारतीय सेना ज्वाइन की थी तब उनके दो बच्चे थे, लेकिन उन्होंने अपने फिजिकल टेस्ट में पुरुष प्रतिभागियों को भी पीछे छोड़ 50 मीटर की दौड़ को 12 सेकेंड में पूरा कर लिया था। शांति टिग्गा ने 2011 में टेरिटोरियल आर्मी की 969 रेलवे इंजिनियर रेजिमेंट में शामिल हुईं। 35 साल की उम्र में उन्होंने ये उपलब्धि हासिल की। उनके इंस्ट्रक्टर उनके फायरिंग स्किल्स से इतने प्रभावित थे कि उन्हें अपनी ट्रेनिंग के लिए बेस्ट ट्रेनी अवार्ड दिया गया। उनसे पहले भारतीय सेना में कोई महिला जवान नहीं थी।
गुंजन सक्सेना: युद्ध क्षेत्र में विमान उड़ाने वाली पहली महिला पायलट
करगिल युद्ध के दौरान, फ्लाइंग ऑफिसर गुंजन सक्सेना ने युद्ध क्षेत्र में उड़ान भरने वाली पहली इंडियन एयर फोर्स की पहली महिला अधिकारी बनकर इतिहास रचा था। 1994 में गुंजन सक्सेना, 25 युवा महिलाओं में से एक थीं जिन्होंने IAF के प्रशिक्षु पायलटों के पहले बैच को ज्वाइन किया। कारगिल के दौरान, उन्होंने युद्ध क्षेत्र में दर्जनों हेलिकॉप्टरों से उड़ान भर कर सेना को हवाई मदद की और घायल भारतीय सेना के सैनिकों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। बाद में, वह शौर्य वीर पुरस्कार प्राप्त करने वाली पहली महिला बनीं।

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