बिहार में चमकी बुखार से बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है। 180 बच्चों की मौत हो गई है। बिहार में लगभग दो दशकों से गर्मियों के मौसम में यह बुखार अपना प्रकोप दिखाता रहा है। मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, वैशाली, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, दरभंगा, गया, जहानाबाद, किशनगंज, नालंदा, पश्चिमी चंपारण, पटना, पूर्णिया, शिवहर, सुपौल चमकी बुखार से प्रभावित जिलों में हैं। सबसे ज्यादा मुजफ्फरपुर जिला प्रभावित हैं। यहां मेडिकल काॅलेज और केजरीवाल अस्पता में कई बच्चों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। शामिल हैं। सबसे भी ज्यादा मुजफ्फरपुर, चंपारण जिले में ज्यादा मौंते हुई हैं।

बिहार में चमकी बुखार से हुईं बच्चों की मौतों पर सुप्रीम कोर्ट ने भी आदेश जारी कर दिया है।। कोर्ट ने केंद्र सरकार और बिहार सरकार से इस बीमार पर जवाब मांगा है। कोर्ट ने सरकारों इस मामले में हलफनामा जारी करने को कहा है।

चमकी बुखार एक संक्रामक दिमागी बीमारी है। इसके वायरस शरीर में पहुंचते ही खून में शामिल होकर अपना काम करना शुरू कर देते हैं। शरीर में इस वायरस की संख्या बढ़ने पर खून के साथ मिलकर व्यक्ति के मस्तिष्क तक पहुंच जाते हैं। मस्तिष्क में पहुंचने पर ये वायरस कोशिकाओं में सूजन पैदा हो जाती है। इससे शरीर के अंदर काम करना बंद कर देता है। दांत चढ़ाए रहता है। शरीर में कमजोरी की वजह से बच्चा बार-बार बेहोश होता रहता है। शरीर में कंपन के साथ बार-बार झटके लगते रहते हैं।

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