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चुनाव को हथियार बनायेगा आलू किसान

मुख्यमंत्री की वादाखिलाफी आलू किसानों को रास नहीं आ रही। यही वजह है कि आलू किसान इस बार चुनावी माहौल का पूरा फायदा उठाने की फिराक में है। आलू किसान अपनी मांगों को मनवाने के लिए होली के पश्चात यूपी में कई बड़ी रैलियां कर भाजपा के चुनाव प्रचार को प्रभावित कर सकता है। जानकारी सरकार को भी है लेकिन आलू किसानों के हितों को लेकर पसरा सन्नाटा कहीं से भी इस बात के संकेत देता प्रतीत नहीं हो रहा है कि यूपी सरकार को प्रदेश के लगभग 2 लाख आलू किसानों की चिंता भी है। हालांकि पिछले दो बार से आलू किसानों का आलू सरकार खरीद तो रही है लेकिन इतने कम दामों पर कि फसल की पूरी कीमत भी नहीं निकल पा रही। वैसे इस वर्ष जनवरी माह में योगी सरकार ने घोषणा की थी कि आलू किसानों का आलू इस बार 600 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जायेगा लेकिन मार्च का आधा महीना बीत चुका है और आलू पूरी तरह से तैयार होकर खेतों में पड़ा है लेकिन सरकार वायदों के अनुरूप आलू किसानों को राहत पहुंचाती प्रतीत नहीं हो रही। यही वजह है कि भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले इस बार आलू किसान सरकार के खिलाफ ‘‘सरकार वायदा निभाओ’’ रैली करने जा रहा है। इस रैली में लाखों की संख्या में किसानों के शामिल होने की उम्मीद जतायी जा रही है और यह रैली सबसे पहले राजधानी लखनऊ से ही शुरु होगी। वैसे कहा तो यही जा रहा है कि उद्यान विभाग लगातार भारतीय किसान यूनियन से वार्ता कर रहा है और किसी तरह से आलू किसानों की रैली को चुनाव सम्पन्न होने तक टालने की कवायद में है लेकिन आलू किसान इस अवसर को हाथ से जाने नहंी देना चाहता। वह अपनी कमजोर आवाज को रैली के सहारे बुलन्द करने की ठान चुका है।
आलू किसानों की परेशानी की खास वजह यह है कि देर से हुई बारिश ने फसल को काफी हद तक प्रभावित किया है। उद्यान विभाग की रिपोर्ट भी कमोवेश यही बताती है कि इस बार आलू उत्पादन में 5 से 7 प्रतिशत की कमी दर्ज की गयी है, वहीं आलू किसानों का भी यही कहना है कि लगातार यह दूसरा वर्ष है जब आलू किसानों की खेती बुरी तरह से प्रभावित हुई है। सरकार से आलू किसान तमाम बार अनुरोध कर चुका है लेकिन सरकार उदासीन बनी हुई है लेकिन आलू किसान इस बार उदासीन नहीं है वह सरकार को नींद से जगाने के लिए चुनाव प्रचार के दौरान मोर्चा खोलेगा।
बताते चलें कि इस वर्ष जनवरी माह में योगी सरकार ने किसानों से 600 रुपये प्रति कुंतल की दर से आलू खरीदने का वायदा किया था। यह वृद्धि आलू बीज के दाम में वृद्धि को देखते हुए की गयी थी और इसकी संस्तुति केन्द्र सरकार से भी ले ली गयी थी लेकिन जनवरी माह में किए गए वायदों के अनुरूप मार्च महीने में भी आलू खरीद को लेकर किसी प्रकार की हलचल सरकार में नजर नहीं आ रही जबकि योगी सरकार ने ऐन चुनाव के वक्त आलू किसानों के विरोध को दबाने की गरज से ही आलू किसानों का आलू खरीदने का वायदा किया था। स्थिति यह है कि आलू किसान आलू को सड़ने से बचाने के लिए लागत से भी कम कीमत में अपना आलू बिचैलियों के हाथों बेचने पर विवश है। देखा जाए तो आलू किसान इस बार दोहरा घाटा झेलने पर विवश है। एक तो कम बारिश ने आलू की खेती को प्रभावित किया और अब सरकार की उदासीनता के चलते बिचैलिए आलू किसानों को लूट रहे हैं।
इस सन्दर्भ में भारतीय किसान यूनियन का आरोप है कि मार्च का आधा महीना बीत चुका है लेकिन अभी तक योगी सरकार ने यह भी नहीं बताया है कि आखिरकार वह आलू किसानों से कितना आलू खरीदेगी। यूनियन का आरोप है कि चुनाव का समय होने के कारण सरकार आलू किसानों की फरियाद तक सुनने के लिए तैयार नही है लिहाजा रैली ही एकमात्र विकल्प शेष बचता है।
ज्ञात हो विगत वर्ष योगी सरकार ने 130 लाख मीट्रिक टन आलू खरीदने का वायदा किया था लेकिन खरीदा मात्र 12 लाख मीट्रिक टन। देखा जाए तो आलू किसान विगत वर्ष भी योगी सरकार द्वारा ठगा जा चुका है। आलू किसानों ने सरकारी खरीद की आस में अपना आलू बचाकर रखा था लेकिन शर्तों के अनुसार दस प्रतिशत से कम की खरीद के चलते किसानों को अपना आलू बिचैलियों के हाथों कौड़ियों के भाव बेचना पड़ा था। कुछ ऐसी ही स्थिति वर्तमान वर्ष की भी नजर आ रही है।
बताते चलें कि 15 मार्च तक आलू किसान अपना आलू खेतों से निकालकर 15 अप्रैल तक कोल्ड स्टोरेज में पहुंचा देता है। यहां यह भी बताना जरूरी है कि उत्तर प्रदेश ही एक ऐसा राज्य है जहां पूरे देश का सर्वाधिक आलू उत्पादन किया जाता है। भारतीय किसान यूनियन की मानें तो इस बार 150 लाख मीट्रिक टन आलू उत्पादन की उम्मीद है। अभी खेतों से आलू निकाला जा रहा है। इस बार 6.1 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू का उत्पादन किया गया था जबकि लक्ष्य 6.25 लाख हेक्टेयर में आलू की पैदावार का था।
यदि राज्य सरकार की संस्तुतियों को केन्द्र सरकार मान लेती है तो आलू खरीदने वाला उद्यान विभाग आलू किसानों से प्रति कुंतल 600 रुपये की दर से आलू किसानों से आलू खरीदेगा। इस बार का प्रस्तावित मूल्य पिछले साल से 51 रुपये प्रति कुंतल अधिक है। वर्ष 2018 में आलू का समर्थन मूल्य 549 रुपये था जबकि वर्ष 2017 में 487 रुपये प्रति कुंतल तय किया गया था।

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