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भारत के पड़ोसी देशों में फूट डालने की कोशिश कर रहा चालबाज चीन

भारत -चीन सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों में तनाव जारी है। भारत के खिलाफ अब चालबाज चीन कई तरह की कूटनीतिक चालबाजी  कर रहा है। आशंका जताई गई है कि दक्षिण एशिया में खुलकर दखल के मौके तलाश रहा चीन भारत के बिना रीजनल फोरम बनाकर दबाव की नई रणनीति पर काम कर रहा है। हालांकि, नेपाल और अफगानिस्तान का रुख अभी रीजनल फोरम के पक्ष में नहीं है। लेकिन चीन और पाकिस्तान की साझा साजिश इस इलाके में भारत को परेशान करने की है। भारत ने स्थिति के अनुरूप सहयोगी देशों से संपर्क बढ़ाया है।

चीन और नेपाल के साथ सीमा विवाद अभी खत्म नहीं हुआ कि भारत का पाकिस्तान के साथ भी सीमा पर तनाव जारी है। इस बीच पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा ने एलओसी का दौरा किया। बाजवा का यह दौरा पहले से तय नहीं नहीं था। और इसकी जानकारी मीडिया को भी नहीं दी गई थी। बाजवा ने यहां कश्मीर का जिक्र कर  सैनिकों का हौसला बढ़ाया  साथ ही सैनिकों से कहा कि उन्हें हर चुनौती के लिए तैयार रहना रहना होगा।

पाकिस्तान ने कल शनिवार एक अगस्त को भी सीजफायर तोड़ा। उसकी फायरिंग में भारतीय सेना का एक जवान शहीद हो गया। भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई की। हाल के दिनों में पाकिस्तानी सेना ने फायरिंग की आड़ में घुसपैठ की कोशिशें तेज की हैं।

चीन ने कुछ दिन पहले पाकिस्तान के अलावा दक्षिण एशिया के दो अन्य देशों नेपाल और अफगानिस्तान के साथ कोरोना  संकट के बहाने वर्चुअल बैठक की थी, लेकिन इसमें चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर और वन बेल्ट वन रोड इनीशिएटिव को लेकर भी चर्चा की गई। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने इस बैठक में पाकिस्तान के साथ अपनी दोस्ती की मिसाल देते हुए नेपाल और अफगानिस्तान से भी सहयोग बढ़ाने को कहा था।

चालबाज चीन जिस तरह की नीति अपना रहा है उससे भारत पूरी तरह वाकिफ  है। भारत ने बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, अफगानिस्तान जैसे देशों में अपना राजनयिक संपर्क बढ़ाया है। नेपाल पर भी भारत का रुख बहुत सधा हुआ है, लेकिन नेपाल का रुख इस समय भारत भारत क्र खिलाफ  बना हुआ है। हलाकि नेपाल ने किसी तरह के रीजनल फोरम की संभावना से तो इनकार किया है, लेकिन उसने नए नक्शे को संयुक्त राष्ट्र में मान्यता दिलाने के लिए प्रयास शुरू करने की बात कही है। वह अपना नया नक्शा, जिसमें उसने हाल में भारतीय क्षेत्र कालापानी, लिपुलेख को शामिल किया है, संयुक्त राष्ट्र को देगा। गोरखा रेजीमेंट पर विचार की बात भी नेपाल के विदेश मंत्री द्वारा कही गई है। इन सब बातों को सीधे चीन से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है चीन भारत पर दबाव बनाने के लिए तमात तरह के हथकंडे अपना रहा है।

भारत के कड़े विरोध के बावजूद नेपाल की संसद ने नए राजनीतिक नक्शे को अद्यतन (अपडेट) करने के लिए संविधान में बीते 18 जून को संशोधन कर दिया था, जिसमें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भारत के तीन क्षेत्रों को शामिल किया गया है। भारत ने नेपाल के मानचित्र में बदलाव करने और कुछ भारतीय क्षेत्रों को उसमें शामिल करने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को नेपाली संसद के निचले सदन में पारित किए जाने पर 13 जून को प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि यह कृत्रिम विस्तार साक्ष्य एवं ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं है और यह ”मान्य” नहीं है।

इससे पहले भारत ने नवंबर 2019 में एक नया नक्शा जारी किया था, जिसके करीब छह महीने बाद नेपाल ने इस साल मई महीने में देश का संशोधित राजनीतिक और प्रशासनिक नक्शा जारी कर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इन इलाकों पर अपना दावा बताया था। नेपाली संसद के ऊपरी सदन यानी नेशनल असेम्बली ने संविधान संशोधन विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया था। इसके बाद नेपाल के राष्ट्रीय प्रतीक में नक्शे को बदलने का रास्ता साफ हो गया था।

भारत और नेपाल के बीच रिश्तों में उस वक्त तनाव दिखा जब रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने आठ मई को उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रे को धारचुला से जोड़ने वाली रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 80 किलोमीटर लंबी सड़क का उद्घाटन किया। नेपाल ने इस सड़क के उद्घाटन पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि यह सड़क नेपाली क्षेत्र से होकर गुजरती है। भारत ने नेपाल के दावों को खारिज करते हुए दोहराया कि यह सड़क पूरी तरह उसके भूभाग में स्थित है।

नेपाल ने 18 मई को देश का संशोधित राजनीतिक और प्रशासनिक नक्शा जारी कर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इन इलाकों पर अपना दावा बताया था। भारत यह कहता रहा है कि यह तीन इलाके उसके हैं। काठमांडू द्वारा नया नक्शा जारी करने पर भारत ने नेपाल से कड़े शब्दों में कहा था कि वह क्षेत्रीय दावों को “कृत्रिम रूप से बढ़ा-चढ़ाकर” पेश करने का प्रयास न करे।

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