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नेपाल की धरती का इस्तेमाल भारत के खिलाफ कर सकता है चीन!

नेपाल की धरती का इस्तेमाल भारत के खिलाफ कर सकता है चीन!

नेपाल इन दिनों उत्तराखंड से लगी अपनी सीमाओं पर न सिर्फ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर रहा है, बल्कि कुछ ऐसे निर्माण कार्य भी करवा रहा है जो संदेह पैदा करते हैं कि वास्तव में यह सबकुछ चीन की सुविधा के लिए तो नहीं है? कहीं चीन नेपाल के सीमा क्षेत्रों का इस्तेमाल भारत विरोध के लिए तो नहीं करना चाह रहा है?

नेपाल ने इस बीच भारत के साथ अपने वर्षों पुराने रिश्तों की परवाह न करते हुए भारत के लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा पर अपना कब्जा जताया और बाकायदा इन्हें अपने देश के नक्शे में भी शामिल कर डाला है। नेपाल के इस कदम के बारे में सभी मान रहे हैं कि ऐसा वह चीन के उकसावे पर कर रहा है। अब तो वह भारत के सीमांत पिथौरागढ़ जिले से लगी अपनी सीमाओं पर जिस कदर जवानों की संख्या बढ़ा रहा है।

सेना प्रमुख जैसे बड़े अधिकारी जिस तरह सुरक्षा का जायजा ले रहे हैं, उससे यह संदेह और भी गहरा रहा है कि कहीं चीन नेपाल की धरती का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करने की ताक में तो नहीं है। नेपाल को उसने इसके लिए राजी तो नहीं कर लिया है? आखिर क्या वजह है कि जिन सीमाओं पर कल तक रस्म अदायगी भर के लिए अस्थाई चौकियां होती थी, वहां आज स्थाई चौकियां बनाकर हथियारबंद जवान तैनात किये जा रहे हैं।

इस बीच एक खास खबर यह है कि नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारतीय क्षेत्र मालपा के सामने अपने इलाके में काली नदी के पास एक हेलीपैड का निर्माण किया है। इसके अलावा यहां अस्थायी टिन शेड्स का निर्माण भी किया जा रहा है। यही नहीं वह अपने यहां दार्चुला से तिंकर तक एक पैदल मार्ग का निर्माण भी कर रहा है। वह चाहता है कि इस मार्ग के बनने से नेपाल के उच्च हिमालयी इलाकों की ओर माइग्रेशन करने वाले लोग भारत पर निर्भर न रहें। अब तक ये लोग भारत के धारचूला से होकर माइग्रेशन करते आये हैं।

-दाताराम चमोली

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