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प्रतिबंधों के बाद भी हो रहे बाल विवाह

बाल विवाह को लेकर भारत का इतिहास काफी पुराना रहा है। बाल विवाह के विरोध में उठे आंदोलनों,संविधान और कानूनों के द्वारा प्रदान किये गए अधिकारों और नियमों के आधार पर बाल विवाह पर रोक लगाकर इसे गैरकानूनी घोषित कर दिया गया। लेकिन आज भी बाल विवाह के कई मामले सामने आते रहते हैं। हाल ही में आई एक गैर सरकारी संस्था चाइल्ड राइट्स एंड यू (क्राई) की एक रिपोर्ट के अनुसार हर पांच में से तीन बाल वधू किशोरावस्था में ही गर्भवती हो जाती हैं जिसका उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। यह रिपोर्ट भारत के 4 राज्यों आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा के चार जिलों चित्तूर, चंदौली, परभणी और कंधमाल के आठ ब्लॉकों के 40 गांवों के सर्वेक्षण के आधार पर जारी की गई है। यह सर्वे बाल दिवस और बाल सुरक्षा सप्ताह (14-20 नवंबर) के दौरान किया गया था । रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जब लड़कियां किशोरावस्था में ही माँ बन जाती हैं तो उनपर शाररिक और मानसिक रूप से इसका हानिकारक प्रभाव पड़ता है। रिपोर्ट के अनुसार सर्वेक्षण किए गए क्षेत्रों में केवल 16 प्रतिशत माता-पिता या सास-ससुर और 34 प्रतिशत बाल वर या वधू ही ऐसे हैं जो बाल विवाह के नकारात्मक परिणामों से अवगत हैं

बाल विवाह का लड़कियों को ज्यादा खतरा

 

अध्ययन के अनुसार भारतीय समाज में पहले से चली आ रही प्रथाओं के अलावा अन्य कई कारण भी हैं जिनमें गरीबी, जबरन प्रवास और लैंगिक असमानता अदि शामिल है। साथ ही रिपोर्ट में यह भी बतया गया है कि कई बार स्कूलों तक पहुँच न होने के कारण व अवसरों आदि की कमी के कारण शैक्षिक अवसरों की कमी लड़कियों को स्कूल न जाने और स्कूल छोड़ने के लिए बाध्य करती हैं । यही कारण है कि लड़कों की तुलना में बाल विवाह कराये जाने का खतरा लड़कियों पर अधिक होता है।

किशोरावस्था में गर्भवती होने के नुकसान

 

किशोरावस्था में लड़कियों के शरीर में कई परिवर्तन होतें हैं लेकिन इस अवस्था में वह बच्चे को जन्म देने के लिए पूर्ण रूप से परिपक्व नहीं होती है । क्योंकि विकास के इस चरण में वह अपने अंदर एक शिशु को पर्याप्त मात्रा में पोशक तत्व दे पाने और पालने के लिए सक्षम नहीं होती हैं । गौरतलब है कि युवावस्था में शरीर को सबसे ज्यादा पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है जिस कारण दोनों को बराबर मात्रा में पोषक तत्व पहुंचना कठिन हो जाता है। जिसका नतीजा यह कि जन्म देने वाली मां के साथ-साथ उसके गर्भ में पल रहे उसके शिशु को भी खतरा रहता है और कई बार यह माता या बच्चे के लिए जानलेवा सिद्ध होता है।

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