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राजस्थान में मुख्यमंत्री बनाम राज्यपाल की लड़ाई सड़कों पर आई

राजस्थान में मुख्यमंत्री बनाम राज्यपाल की लड़ाई सड़कों पर आई

राजस्थान में सियासी संग्राम का पारा तेज होता जा रहा है। अब से पहले रेगिस्तान के सियासी संग्राम में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट की लडाई चल रही थी। लेकिन अब यह लडाई गहलोत और सचिन पायलट के बीच से हटकर गहलोत और कलराज मिश्रा के बीच आ गयी है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी लड़ाई का रुख राजभवन की ओर कर दिया है। पिछले 2 दिन से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजभवन पर राजनीतिक वार कर रहे हैं। कल तो मुख्यमंत्री ने राज्यपाल कलराज मिश्रा पर यह तक आरोप लगा डाला कि वह ऊपर के दवाब में है और प्रेशर में है। जिसके चलते राज्यपाल विधानसभा सत्र की परमिशन नही दे रहें हैं।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कल अपने साथ सभी समर्थित विधायकों को लेकर राजभवन जा पहुंचे थे। जहां उन्होंने तथा उनके समर्थित विधायकों ने राजभवन में धरना दे दिया। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समर्थित सभी विधायक धरने पर बैठ गए थे । उसके बाद जब राज्यपाल कलराज मिश्र की तरफ से उन्हें कोई आश्वासन नहीं मिला तो वह वापिस फेयरमोंट होटल पहुंच गए । जहां जाकर रात 2 बजे तक कैबिनेट की मीटिंग होती रही। जिसमें फैसला लिया गया कि आज पूरे प्रदेश के सभी 31 जिलों में कांग्रेस के कार्यकर्ता राज्यपाल कलराज मिश्रा और केंद्र सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन करेंगे।

जबकि तय यह भी हुआ कि जयपुर में खुद मुख्यमंत्री इस धरने का नेतृत्व करेंगे। फिलहाल पूरे राजस्थान में जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन चल रहे हैं । यह शायद पहली बार है जब राजस्थान में सरकार ही खुद जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन कर रही है । हालांकि आज शाम को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत विधायकों की बैठक भी करेंगे।

उधर दूसरी तरफ राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्रा ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को फिलहाल विधानसभा सत्र न चलाने की सलाह दी है। साथ ही कोरोना महामारी के बढते प्रकोप के चलते विधानसभा सत्र न कराने की हिदायत भी दी है। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को न केवल पत्र लिखा बल्कि उनके समक्ष 6 बिन्दुओं के सवाल उठा दिए हैं। जिनमें इस समय विधानसभा सत्र की जरूरत पर ही सवाल खडे कर दिए गयें हैं।

राजस्थान के राज्यपाल ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को एक पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने कहा है कि इससे पहले की मैं विधानसभा सत्र बुलाने पर विशेषज्ञों से चर्चा कर पाऊं, उससे पहले ही आपने सार्वजनिक रूप से कह दिया कि यदि आज राजभवन का घेराव होता है, तो आप की जिम्मेदारी नहीं है। इस पर उन्होंने कहा कि आप और आपका गृह मंत्रालय राज्यपाल की रक्षा भी नहीं कर सकता है तो राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति के संबंध में आपका क्या मंतव्य है?

इसके अलावा राजभवन द्वारा जिन छह बिंदुओं को उठाया गया है उनमें से एक यह भी है कि राज्य सरकार के पास बहुमत है तो विश्वास मत प्राप्त करने के लिए सत्र आहूत करने का क्या औचित्य है? इसके साथ ही इसमें कहा गया है कि विधानसभा सत्र किस तिथि से आहूत किया जाना है, इसका उल्लेख कैबिनेट नोट में नहीं है और ना ही कैबिनेट द्वारा कोई अनुमोदन प्रदान किया गया है।

राज्यपाल ने 6 बिन्दुओं के पत्र में आगे कहा कि कुछ विधायकों की निर्योग्यता का प्रकरण उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। उसका संज्ञान भी लिया जाए। कोरोना के राजस्थान राज्य में वर्तमान परिपेक्ष्य में तेजी से फैलाव को देखते हुए किस प्रकार से सत्र आहूत किया जाएगा? साथ ही प्रत्येक कार्य के लिए संवैधानिक मर्यादा और सुसंगत नियमावलियों में विहित प्रावधानों के अनुसार ही कार्यवाही की जाए। इस पत्र से मुख्यमंत्री गहलोत खुद ही घिरते नजर आ रहे हैं।

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