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घाटी में मची अफरा-तफरी, अमरनाथ यात्रा बंद

कश्मीर में इन दिनों भारी अफरा-तफरी का माहौल है। यहां हर सुबह खौफ का नया मंजर लेकर आती है और शाम होते-होते इस खौफ में भारी इजाफा हो जाता है। शुक्रवार, एक अग्रस्त को जम्मू कश्मीर के प्रमुख सचिव गृह के दो आदेश ने इस खौफ को कई गुना बढ़ा डाला। गृहसचिव शालीन काबरा ने अपने आदेश में खुफिया ऐजन्सियों से मिले नऐ इनपुट का हवाला देते हुए घाटी में मौजूद सभी टूरिस्ट और अमरनाथ यात्रा के श्रद्धालुओं को तत्काल वापस लौटने की बात कही है। इस आदेश ने अमरनाथ यात्रा को समय पूर्व ही समाप्त कर दिया है। कश्मीर में ऐसा पहले कभी देखने को नहीं मिला है। चरमपंथ के सबसे बुरे दौर में भी अमरनाथ यात्रा को कभी नहीं रोका गया था। जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन और केंद्र में भाजपा सरकार के सत्तागढ़ होने पर उठाए गए इस कदम ने कश्मीर के सियासी दलों में भारी बैचेनी पैदा कर दी है। यह आशंका बलवती हो गई है कि केंद्र सरकार धरा 370 और अनुछेद 34 ए पर कोई फैसला देने का मन बना चुकी है।
कश्मीर में जिस तरह के हालात बना दिए गए है उससे यहां रहने वाले लोग डरे हुए हैं। जिस तरह का खौफ मैं आज देख रही हूं, वैसा मैंने पहले कभी नहीं देखा।
महबूबा मुफ्ती, पूर्व मुख्यमंत्री
अमरनाथ यात्रा के यात्रियों और विदेशी पर्यटकों का मिलाकर इस समय घाटी में ग्यारह हजार टूरिस्ट मौजूद है। गृह सचिव के आदेश बाद अब यह तय है कि अमरनाथ यात्रा को समाप्त कर दिया गया है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि ऐसा यात्रा पर संभावित बड़े आतंकी हमले के चलते किया गया है। इससे पहले जुलाई-25 को केंद्रीय गृह मंत्रालय में पेरामिलेट्री फोर्सेस की 100 अतिरिक्त कंपनियां घाटी में तैनात कर दी थी। ये 100 कंपनियां उन 400 कंपनियों के अतिरिक्त है जो पुलवामा हमले के बाद घाटी में भेजी गई हैं। इन एक्सट्रा कंपनियों की तैनाती बाद से ही यह आशंका व्यक्त की जाने लगी थी कि केंद्र सरकार कश्मीर पर कोई बड़ा फैसला लेने जा रही है। 27 जुलाई को जम्मू कश्मीर प्रलिस एक वायरलेस मैसेज ने अफरा-तफरी के माहौल को और गर्मा दिया। इस मैसेज में डिसट्कि पुलिस अधीक्षकों से पूछा गया कि उनके यहां फोर्स की यदि कमी है तो तत्काल हेडक्र्वाटर को बताएं। साथ ही निर्देश दिए गए कि हर थाने में एक वायरलैस फोन और एक बुलडोजर तैनात किया जाए। इस आदेश के बाद यह आशंका तेज हो गई कि घाटी की नार्मल संचार व्यवस्था को रोका जा सकता है। 28 जुलाई को रेल मंत्रालय के जम्मू में तैनात डिविजनल स्क्रिोटरी कमीश्नर का आदेश सामने आ गया। इसमें कमीशनर ने रेल अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इमरजेंसी हालातों से निपटने के लिए अपने यहा चार महिने तक का राशन रखें और अपने परिवारों को कश्मीर से हटा लें। हालांकि हो-हल्ला मचने के बाद यह आदेश वापस से लिया गया। 28 जुलाई को ही पुलिस मुख्यालय ने श्रीनगर पुलिस को निर्देश दिए कि वे घाटी में मौजूद सभी मस्जिदों की और उनके मैनेजमेंट की जानकारी तत्काल भेजें। इस प्रकार के संदेश और आदेश घाटी में माहौल को और खराब करते नजर आने पर स्वयं राज्यपाल सतपाल मलिक ने इन्हें ‘फेक न्यूज’ कह खारिज कर दिया। हालांकि इसके बाद ही रेलवें मंत्रालय ने अपने सेफ्टी कमिश्नर के आदेश की प्रमाणिकता पर मुहर लगा थी।
अमरनाथ यात्रा के यात्रियों और पयर्टकों के घाटी छोड़ने का फरमान आते ही राज्य के क्षेत्रिय दल सक्रिय होते नजर आने लगे है। पीडीपी के अध्यक्ष पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार देर रात अपने निवास पर एक आपात बैठक की। इस बैठक में नेशनल के फारूख अब्दुल्लाह, पीपुल्स कान्प्रफेस के सज्जाद लोन समेत केई नेता मौजूद रहे। जपा ने लेकिन इसमें भाग नहीं लिया। बैठक में इस बात की आशंका व्यक्त की गई है कि केंद्र सरकार आर्टिकल 35ए और राज्य को मिले विरोध दर्जे में बदलाव का एक्शन देने जा रही है।

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