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केंद्र की कठपुतली बनी जांच एजेंसियां

केंद्र की सत्ताधारी पार्टियों पर अपने राजनीतिक हित साधने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप अतीत में अक्सर लगते रहे हैं। मौजूदा केंद्र सरकार पर भी ऐसे आरोप लग रहे हैं। मोदी सरकार के छह वर्षों से ज्यादा के कार्यकाल में ऐसे कई मौके रहे, जहां सरकार पर अपने हितों के लिए सीबीआई, ईडी और आयकर विभाग जैसी एजेंसियों के इस्तेमाल का आरोप लगा। केंद्र में सत्ता संभालने के बाद मोदी सरकार पर सबसे पहले दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगा था। उस दौरान दिल्ली में आम आदमी पार्टी के 10 से ज्यादा विधायकों को पुलिस ने विभिन्न आरोपों में गिरफ्तार था, वहीं मुख्यमंत्री कार्यालय तक पर छापे की खबरें भी आई थीं। केजरीवाल के प्रमुख सचिव राजेंद्र कुमार को कथित भ्रष्टाचार के आरोपों में सीबीआई ने गिरफ्तार किया गया था, तो वहीं उस वक्त आम आदमी पार्टी का हिस्सा रहे कुमार विश्वास का आरोप था कि सीबीआई ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भ्रष्टाचार के मामले में फंसाने के लिए उन पर दबाव बनाया। वर्तमान की बात करें तो यह चर्चा फिर से सुर्खियों में है। फिलहाल देश के चार राज्यों में विधानसभा चुनाव सम्पन्न हो चुके हैं। पश्चिम बंगाल में चुनाव आठ चरणों में होने के कारण अभी पांचवे चरण के लिए मतदान होना है। पश्चिम बंगाल, इस समय सभी राज्यों में से सबसे ज्यादा खबरों में हैं, क्योंकि वहां हर रोज राजनीति कई रूप रंग बदलती नजर आ रही है।

यहां सत्ता पर आसीन होने के लिए राजनीतिक पार्टियां कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही हैं। केंद्र में आसीन बीजेपी पार्टी पर भी आरोप लग रहे हैं कि इन चुनावों को अपनी ओर करने के लिए पार्टी सभी हथकंडे अपना रही है। हालांकि जांच एजेंसियां किसी पार्टी, समूह या नेता के अधीन नहीं होती, वह निप्षक्ष होती हैं। लेकिन अब विपक्ष जांच एजेंसियों को केंद्र की कठपुतली कहकर पुकार रहा है। पांच राज्यों के चुनावों से पहले और चुनाव के बीच में ईडी, सीबीआई और अन्य जांच एजेंसियों ने बीजेपी की अपोजिट पार्टियों के नेताओं, रिश्तेदारों और कंपनियों पर छापेमारी की। तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों के लिए वोटिंग हो चुकी है और नतीजे 2 मई को आने हैं। बीजेपी एआईएडीएमके के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ रही है तो वहीं कांग्रेस डीएमके के साथ गठबंधन कर चुनाव मैदान में उतरी थी। मतदान से पहले 3 अप्रैल को डीएमके नेता एमके स्टालिन की बेटी के घर आयकर विभाग की छापेमारी की खबर आती है। आयकर विभाग ने यह रेड स्टालिन के दामाद सबरीसन के घर और दूसरे ठिकानों पर की थी। सबरीसन डीएमके के मुख्य रणनीतिकार और एमके स्टालिन के सलाहकार हैं। डीएमके ने इस पूरी घटना के बाद इसे सत्ता का गलत इस्तेमाल करार दिया था।

6 अप्रैल को तमिलनाडु चुनाव से पहले डीएमके नेताओं के खिलाफ कर छापों की यह दूसरी घटना है। पिछले महीने डीएमके के वरिष्ठ नेता और उम्मीदवार ईवी वेलू के घर पर छापा मारा गया था। आयकर अधिकारियों ने कहा था कि अभियान के दौरान नकदी के आदान-प्रदान के विश्वसनीय इनपुट की खबरें थीं। अधिकारियों ने दावा किया था कि राजनेता से बड़ी मात्रा में नकदी जब्त की गई थी। पिछले साल सितंबर में सीबीआई ने कुछ बैंक अधिकारियों और डीएमके के अधिकारी पूनजोलई श्रीनिवासन के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। यह मामला वेल्लोर में 2019 के चुनावों में आई-टी द्वारा छापे में 11 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली पर आधारित था। विदेशी मुद्रा उल्लघंन मामले में सितंबर में ईडी ने डीएमके के सांसद एस जगतरक्षकन और उनके परिवार से 89 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति जब्त की थी। इस साल फरवरी में सीबीआई ने एक कोयला घोटाला मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी की पत्नी रूजिरा बनर्जी से पूछताछ की।

मार्च में ईडी ने राज्य मंत्री पार्थ चटर्जी और पूर्व मंत्री मदन मित्रा को चिट फंड से संबंधित दो अलग-अलग मामलों में बुलाया था। दोनों टीएमसी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। मार्च में ही शारदा चिट फंड मामले में जोरासांको से टीएमसी उम्मीदवार विवेक गुप्ता से कई घंटों तक पूछताछ की गई थी। हाल ही में टीमसी नेता कुणाल घोष और सतबदी राॅय को मनी लाॅन्ड्रिंग मामले में ईडी ने तलब किया था।
जुलाई 2020 में एनआईए ने सोने की तस्करी के एक मामले में यूएपीए के तहत एफआईआर दर्ज की। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एम शिवशंकर से सितंबर में एनआईए ने पूछताछ की थी और उन्हें अक्टूबर में ईडी ने गिरफ्तार किया था। विधानसभा चुनावों से ठीक एक सप्ताह पहले ईडी और कस्टम विभाग ने कहा था कि स्वप्ना सुरेश सोने की तस्करी मामले में मुख्य आरोपी हैं, इसके साथ यह दावा भी किया था कि तस्करी सीएम पिनाराई विजयन के इशारे पर की गई थी। पिछले साल 29 अगस्त को ईडी ने सीपीएम के राज्य सचिव कोडिएरी बालाकृष्णन के बेटे को मनी लाॅन्ड्रिंग मामले में बेंगलुरु से गिरफ्तार किया था।

पिछले महीने की शुरुआत में, ईडी ने केरल इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड के अधिकारियों को तलब किया था, जिसके चेयरमैन सीएम विजयन थे, विदेशी मुद्रा उल्लघंन मामले में विजयन से भी पूछताछ की गई थी। पुडुचेरी में जब कांग्रेस की सरकार अल्पमत के कारण गिर गई थी, तब कांग्रेस के प्रभारी दिनेश गुंडु राव ने कहा था कि बीजेपी शासित केंद्र सरकार ने सीबीआई, इन्कम टैक्स डिपार्टमेंट, ईडी जैसी एजेंसियों का उपयोग कर हमारे विधायकों को धमकाया, उन्हें ब्लैकमेल किया। इतना ही नहीं कांग्रेस पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि करोड़ों रुपए देकर बीजेपी ने विधायकों की खरीद- फरोख्त की है। पुडुचेरी में चुनावो के लिए मतदान हो चुका है। बता दें कि पुडुचेरी में विधानसभा में फ्लोर टेस्ट से पहले ही कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी ने इस्तीफा दे दिया था।

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