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सकते में केंद्र सरकार पेगासस बना बड़ा जंजाल

सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस जासूसी मामले की जांच एक स्वतंत्र कमेटी द्वारा कराए जाने का आदेश दे केंद्र सरकार को सकते में डाल दिया है। कोर्ट ने 27 अक्टूबर को सुनाए अपने फैसले में केंद्र सरकार के खिलाफ कई प्रतिकूल टिप्पणियां भी की है। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर अपने फैसलों का बचाव नहीं कर सकती है। पेगासस जासूसी कांड को नागरिकों की निजता के अधिकार से जोड़ते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की सभी दलीलों को खारिज कर एक स्वतंत्र कमेटी का गठन कर पूरे प्रकरण की जांच का आदेश दिया है। सुप्रीर्म कोर्ट के सेवानिवृत न्यायाधीश आर वी रविंद्रन इस जांच कमेटी के प्रमुख बनाए गए हैं। इस कमेटी के अन्य सदस्यों में तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला केंद्र सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

 

सरकार के खिलाफ प्रदर्शन

गौरतलब है कि इसी वर्ष जुलाई में ‘द वायर’ न्यूज पोर्टल ने यह सनसनीखेज खुलासा किया था कि इजराइल के एक जासूसी साफ्टवेयर ‘पेगासस’ का इस्तेमाल भारत में कई नेताओं, पत्रकारों, मानवधिकार कार्यकर्त्ताओं और नौकरशाहों की जासूसी के लिए किया जा रहा है। बकौल ‘द वायर’ एक इलेक्ट्रॉनिक वायरस भारत के लगभग तीन सौ लोगों के स्मार्ट फोन में प्रवेश कर उनकी समस्त निजी जानकारियों को अपने कब्जे में ले चुका है। इस खबर के सामने आते ही भारतीय राजनीति में भारी भूचाल आ गया। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर संसद नहीं चलने दी। उनकी मांग थी कि सरकार यह स्पष्ट करें कि क्या सरकार ने ऐसा कोई साॉफ्टवेयर पेगासस कंपनी से खरीदा है? यदि खरीदा है तो उसका इस्तेमाल किन कारणों से, किसके खिलाफ किया जा रहा है? संसद का मानसून सत्र इस कांड की भंेट चढ़ गया। केंद्र सरकार स्पष्ट रूप से कुछ भी कहने से बचती रही। विपक्ष द्वारा पूरे मामले की जांच संयुक्त संसदीय कमेटी से कराए जाने की मांग को भी केंद्र सरकार ने सिरे से खारिज कर डाला था। एक तरफ संसद से लेकर सड़क तक विपक्षी दल सरकार को घेरने में जुटे थे तो दूसरी तरफ पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, सीपीएम नेता जोन ब्रिटास, एडवोकेट एम एल शर्मा एवं एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया समेत कई स्वत्रंत पत्रकारों ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं डाल दी थीं। इन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने लंबी सुनवाई की। पीठ में मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और हिमा कोहली शामिल थे। केंद्र सरकार की तरफ से एक हलफनामा दायर कर अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया गया। सरकार ने पूरे प्रकरण को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला बताते हुए कोर्ट को ज्यादा जानकारी देने से मनाकर डाला। सरकार की तरफ से कहा गया कि वह एक एक्सपर्ट कमेटी बना पूरे प्रकरण की जांच कराने को तैयार है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में सरकार की सारी दलीलों को खारिज कर डाला है। कोर्ट ने कहा है कि सरकार पर जब स्वयं आरोप लग रहे हो तो उसे एक्सपर्ट कमेटी बनाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। इतना ही नहीं कोर्ट ने सरकार द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिए जाने पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दे डाली। कोर्ट ने कहा कि नागरिकों की निजता का उल्लघंन एक गंभीर मामला है। इस मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दे सरकार बच नहीं सकती है। इस फैसले के बाद केंद्र सरकार की मुश्किलें बढ़नी तय हैं। गौरतलब है कि इजराइल की एक कंपनी ‘पेगासस’ द्वारा तैयार किए गए इस जासूसी सॉफ्टवेयर को कंपनी केवल सरकारी संस्थाओं अथवा सीधे सरकारों को ही बेचती हैं।

यह जानकारी स्वयं कंपनी द्वारा पूरे प्रकरण के सामने आने पर दी गई थी। ऐसे में अब सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि किसके कहने पर यह सॉफ्टवेयर खरीदा गया। यह भी बताना होगा कि किस भारतीय एजेंसी अथवा मंत्रालय द्वारा यह सॉफ्टवेयर खरीदा गया और इसके जरिए किन लोगों की जासूसी कराई गई।

 

 

 

अदालत ने हमारे रुख का समर्थन किया है। संसद के मानसून सत्र में समूचे विपक्ष ने एकजुट हो यह मामला उठाया था। हमारे तीन सवाल हैं। पहला, पेगासस को किसने खरीदा और किसने इसे खरीदने को कहा? दूसरा, किन लोगों के खिलाफ इस स्पाईवेयर का इस्तेमाल किया गया? और तीसरा, क्या किसी अन्य देश ने हमारे लोगों से जुड़ी सूचना हासिल की है? अभी तक इनके जवाब नहीं मिले हैं। इससे जुड़े सभी सवालों के जवाब मिलने ही चाहिए।
राहुल गांधी, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष

 

झूठ बोलना और भ्रम फैलाना विपक्ष की आदत है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर कांग्रेस ने फिर उन्हीं शब्दों का इस्तेमाल किया जिनका प्रयोग वह हमेशा करती है। पार्टी के पास कहने को कुछ नया नहीं है। वो पुरानी बातें और शब्दावली ही दोहराती रहती है। केंद्र ने कोर्ट में जो हलफनामा दिया था, उसमें स्पष्ट कहा गया था कि निहित स्वार्थ के लिए एक समूह विशेष के लोग गलत धारणा फैलाने में जुटे हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला केंद्र सरकार के हलफनामे के अनुरूप ही है।
संबित पात्रा, भाजपा प्रवक्ता

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