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खनन घोटाले को लेकर सीबीआई ने सत्येंद्र सिंह पर कसा शिकंजा

लखनऊ। सीबीआई ने खनन घोटाले के मामले में कौशांबी के जिलाधिकारी रहे और सेवानिवृत्त आईएएस सत्येंद्र सिंह के सभी ठिकानों पर छापेमारी की है। साथ ही उनके रिश्तेदारों के लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद तथा दिल्ली में नौ ठिकानों पर भी फरवरी को सीबीआई ने छापेमारी की। सीबीआई ने 10 लाख नकद और 51 लाख रुपये के फिक्स डिपाॅजिट सहित करोड़ों की संपत्ति बरामद की है। सत्येंद्र सिंह पर आरोप हैं कि कौशांबी में डीएम रहते हुए उन्होंने शासन के निर्देशों का पालन नहीं किया और अपने चहेतों को बिना टेंडर की शर्तों का अनुपालन किए हुए खनिज खनन का करोड़ों रुपये का ठेका दे दिया था। इसके अलावा सीबीआई ने नौ अन्य खनन ठेकेदारों के घर पर भी छापा मारी की हैं। माना जाता है कि सत्येंद्र सिंह तत्कालीन सपा सरकार के बहुत ही नजदीकी और चहेते अधिकारी रहे हैं। उस दौरान वह लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और लखनऊ के डीएम भी रहे हैं।

सीबीआई ने छापे में अचल संपत्ति से जुड़े 44 दस्तावेज भी बरामद किए हैं। सीबीआई इनकी कीमत की जांच-पड़ताल कर रही है। सूत्रों का दावा है कि वर्तमान में इन संपत्तियों की बाजार में कीमत लगभग 50 करोड़ रुपये के लगभग होगी। सीबीआई को छापे में 36 बैंक खातों की पता चला है। सीबीआई को उनके छह बैंक लाॅकरों की जानकारी भी मिली। बैंक लाॅकर की छानबीन में सीबीआई को 211 करोड़ रुपए कीमत के सोने तथा जेवर के साथ और भी अन्य जेवरात बरामद हुए हैं। वहीं लाॅकर से सीबीआई को एक लाख रुपये की पुरानी करेंसी भी मिली

इस पूरे प्रकरण पर सीबीआई के अधिकारियों ने कहा कि हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 में कौशांबी में गैरकानूनी ढंग से हुए घोटाले की जांच ‘सीबीआई’ को के आदेश दिए गए थे। इसके बाद से सीबीआई प्रारंभिक छानबीन कर रही थी और सबूत जुटाने के बाद सीबीआई ने छापा मार कर कार्रवाई की। सत्येंद्र सिंह ने वर्ष 2012-14 के समय अपने ही कुछ चहेतों को खनन का ठेका दिया था। उन्होंने शासन के नियमों के खिलाफ दो नए ठेके अलग-अलग भी जारी किए। इसी के साथ नौ पट्टों के नवीनीकरण को काम भी अपने ही खास लोगों को दिया था। सीबीआई ने ठेके से जुड़े दस्तावेजों का जांच-पड़ताल किया तो खामियां पाई गयी। वहीं शासन ने 31 मई 2012 को इस मामले की जांच आदेश दिए थे।

सीबीआई ने जांच करने के बाद सेवा निवृत्त आईएएस सत्येंद्र सिंह सहित 10 खनन व्यापारियों पर भी मामला दर्ज किया। इसमें मुख्य रूप से सत्येंद्र सिंह, कौशांबी के नेपाली निषाद, नरनारायण मिश्रा, रमाकांत द्विवेदी, खेमराज सिंह, मुन्नी लाल, शिव प्रकाश सिंह, राम अभिलाष, योगेंद्र सिंह और प्रयागराज निवासी राम प्रताप सिंह को आरोपी बनाकर एफआईआर दर्ज किया है। सत्येंद्र सिंह के खिलाफ पद के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 और आपराधिक न्याय भंग का मुकदमा दर्ज किया गया है। खनन व्यापारियों को धोखाधड़ी और सरकारी नियमों का उल्लंघन करने के मामले दर्ज हुए हैं।

सीबीआई ने छापे में अचल संपत्ति से जुड़े 44 दस्तावेज भी बरामद किए हैं। सीबीआई इनकी कीमत की जांच-पड़ताल कर रही है। सूत्रों का दावा है कि वर्तमान में इन संपत्तियों की बाजार में कीमत लगभग 50 करोड़ रुपये के लगभग होगी। सीबीआई को छापे में 36 बैंक खातों की पता चला है। सीबीआई को उनके छह बैंक लाॅकरों की जानकारी भी मिली। बैंक लाॅकर की छानबीन में सीबीआई को 211 करोड़ रुपए कीमत के सोने तथा जेवर के साथ और भी अन्य जेवरात बरामद हुए हैं। वहीं लाॅकर से सीबीआई को एक लाख रुपये की पुरानी करेंसी भी मिली।

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