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सीबीआई ने पूर्व पुलिस कमिश्नर आलोक कुमार के घर पर मारे छापे

कर्नाटक के बहुचर्चित फोन टैपिंग मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बेंगलुरू के पूर्व पुलिस कमिश्नर आलोक कुमार के घर और दफ्तर दोनों पर एक साथ छापे मारे है। वर्तमान में कुमार कर्नाटक राज्य रिजर्व पुलिस में एडीजीपी हैं। सीबीआई के 20 अधिकारियों द्वारा 26 सितंबर को कुमार के घर छापा मारा और पहले से दर्ज ऑडियो के आधार पर अपनी जांच शुरू की। 
 
सीबीआई के अधिकारियों की टीम एक पेन ड्राइव की तलाश कर रही थी। कहा जा रहा है कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य में कथित तौर पर 300 से अधिक लोगों के फोन से जुड़ा ब्यौरा है। अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि क्या तलाशी के दौरान वे पेन ड्राइव का पता लगाने में सफल रहे या नहीं।
आलोक कुमार अभी राज्य रिजर्व पुलिस बल के अतिरिक्त महानिदेशक हैं। सीबीआई द्वारा आलोक कुमार से भी पूछताछ की गई क्योंकि सीबीआई जानना चाहती है कि क्या वास्तव में टैपिंग हुई और यह किसके आदेश पर हुई। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने कहा कि उनका मामले से कोई लेना- देना नहीं है इसलिए वह चिंतित नहीं हैं। कुमारस्वामी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘वे जिस पर चाहें छापेमारी करें। आप मुझसे क्यों पूछ रहे हैं? मैं इससे कैसे जुड़ा हुआ हूं?’’ यह पूछने पर कि सीबीआई उनसे भी पूछताछ कर सकती है, जद (एस) नेता ने कहा, ‘‘उन्हें आने दीजिए। कानून के मुताबिक किसी से भी पूछताछ हो सकती है और उसकी जांच की जा सकती है। मुझे क्यों भयभीत होना चाहिए?’’ कुमारस्वामी ने कहा,  ‘‘अपने कार्यकाल में हर कोई ऐसा करता है। अगर वे जांच कर रहे हैं कि विगत में फोन टैपिंग कैसे हुई तो मुझे इस बारे में क्यों चिंतित होना चाहिए।’’ 
 
अधिकारियों ने कहा कि जांच का जिम्मा संभालने के बाद संदिग्धों से पूछताछ के दौरान सीबीआई को पता चला कि इंटरसेप्शन की एक कॉपी पुलिस के मुख्य सर्वर से डाउनलोड की गई थी और कथित तौर पर एक पेन ड्राइव में बेंगलुरु पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी को सौंप दी गई थी। एजेंसी को संदेह है कि वरिष्ठ अधिकारी 1990 बैच के कर्नाटक कैडर के आईपीएस अधिकारी आलोक कुमार हैं। माना जाता है कि पेन ड्राइव में नेताओं, पुलिस अधिकारियों, नौकरशाहों और अन्य व्यक्तियों की बातचीत का विवरण है। बीएस येदियुरप्पा सरकार ने इस मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। जद(एस) के अयोग्य ठहराए गए विधायक ए एच विश्वनाथ ने एच डी कुमारस्वामी सरकार पर आरोप लगाया था कि उन्होंने 300 से ज्यादा लोगों की फोन पर हुई बातचीत टैप की और जासूसी की।
 

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