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‘शाहीन बाग के प्रदर्शन में मुझे मानवता खींच ले आई’

'शाहीन बाग के प्रदर्शन में मुझे मानवता खींच ले आई'

नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध में करीब एक महीने से दिल्ली के शाहीनबाग इलाके में महिलाएं डटी हुई हैं। इस प्रदर्शन की अगुवाई शाहीनबाग और जामिया नगर इलाके की औरतें कर रही हैं। यहां की महिलाएं कड़कड़ाती ठंड में भी लगातार जमी हुई हैं।

प्रदर्शन में एक महीने लेकर 90 साल तक की महिलाएं शामिल हैं। यह बेहद आकर्षित करता है कि असमा खातून 90 साल की हैं तो वहीं बिलकीस की उम्र 82 साल है। और सरवरी की उम्र 75 वर्ष है। ये वो बुजुर्ग महिलाएं हैं जो अपने उम्र को चुनौती दे रही हैं।

यहां लोगों के बीच बेहद गुस्सा है। धरने पर बैठी महिलाओं से हमने बात करने की कोशिश की। असमा खातून जो यहां सबसे बुजुर्ग नजर आती हैं, उनसे जब हमने सवाल किया तो उन्होंने कहा, “जाकर मोदी से पूछिए हम प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं। हमें ऐसा दिन क्यों देखना पड़ा। इसकी जरूरत क्यों पड़ी कि मैं प्रदर्शन करूं।”

बिलकीस कहती हैं, “नागरिकता साबित करने के लिए दस्तावेज दिखाने को कह रहे हैं। इस देश में तमाम ऐसे लोग हैं जिनके पास कोई कागज नहीं है। कई लोगों के दस्तावेज बाढ़-बारिश में बह गए। वे कहां से लाएंगे कागज? हमलोग मोदी को चुनौती देते हैं कि वे अपनी 7 पुश्तों का नाम बताएं। हमलोग नौ पुश्तों का बताएंगे।

कुछ ही समय पहले ऊना खातून अपने नवजात बच्चे से साथ अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद प्रदर्शन में शामिल हुई। ऊना कहती है कि जब तक सरकार सीएए कानून को वापस नहीं लेती तब तक ये प्रदर्शन जारी रहेगा भले हमारी ही क्यों न चली जाए।

अश्मी नाम की प्रदर्शकारी कहती है, “सरकर चाहे गोलिया चला दे। चाहे ठंडी हो या बरसात हम यहीं बैठे रहेंगे जब तक सरकार काले कानून को वापस नहीं लेती।” शाहीनबाग के प्रदर्शन में कौमी एकता भी देखने को मिला। यहां मौजूद एक सरदार कहते हैं, “मुझे मानवता यहां तक खींच ले आई। पर नेताओं या मीडिया को कोई फर्क नहीं पड़ा।” योगेंद्र सिंंह ने कहा कि सरकार को इन महिलाओं की बीत सुननी चाहिए।

रहमान कहते हैं कि यहां किसी भी तरह का बाहरी फण्ड नहीं लिया जा रहा है। बस जिसको मदद करना है वो खुद खाने-पीने का सामान लाकर बांट सकता है। यहां मौजूद लोग कहते हैं कि विरोध इसलिए किया जा रहा है क्योंकि खुद गृहमंत्री अमित शाह ने अपने भाषणों और बयानों में नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी दोनों को जोड़कर पेश किया है। सरकार ने मुसलमानों को आश्वस्त करने के लिए न अब तक कुछ ठोस न कहा है, न किया है।

फातिमा नाम की एक प्रदर्शनकारी कहती है, “हमें क्या न्याय देंगे, गृहमंत्री अमित शाह तो खुद तड़ीपार है।” यहां प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने सरिता बिहार और नोएडा की ओर जाने वाले रास्तों को बंद कर दिया है। इससे आने-जाने वालों लोगों को दिक्कत का सामना है।

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