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कश्मीर घाटी में आधी रात को बजी फोन की घंटियां, मोबाइल-इंटरनेट सेवाएं बहाल

एक माह बाद कल आधी रात को घाटी के कुछ जिलों में मोबाइल की घंटियां बज उठीं। जबकि कश्मीर के एक बड़े इलाके में लैंड लाइन सेवा भी बहाल कर दी गई है।ठीक एक महीने पहले पांच  अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने से पहले राज्य में कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए गए थे।

चार अगस्त की आधी रात को संचार माध्यमों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। पूर्व मुख्यमत्रियों- फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला समेत मुख्यधारा के कई नेता हिरासत में हैं। सरकार ने कहा था कि अनुच्छेद 370 को रद्द करने के फैसले के बाद क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जम्मू – कश्मीर में मोबाइल, लैंडलाइन और इंटरनेट सेवाओं को निलंबित किया गया था।

वहीं जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के सलाहकार- फारूक खान और केके शर्मा हफ्ते में  गुरुवार और शुक्रवार को श्रीनगर में दो घंटे के लिए लोगों की शिकायत सुनेंगे। सोनवर में राज्यपाल शिकायत प्रकोष्ठ में सुबह 10 से 12 बजे के बीच एडवाइजर लोगों से उनकी समस्याओं को सुनेंगे।

“फोन, इंटरनेट आतंकियों के काम आते हैं। ये उनके लिए हथियार हैं। फोन, इंटरनेट से अफवाह फैलती है। राज्य में हालात सामान्य है।हम कुपवाड़ा और हंदवाड़ा जिलों मोबाइल फोन कनेक्टिविटी खोल रहे हैं, जल्द ही हम अन्य जिलों में भी कनेक्टिविटी खोलेंगे। अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाने के बाद कड़े प्रतिबंध आम नागरिकों की जान बचाने के लिए लगाए गए हैं। लोगों को चोट न पहुंचे, इसके लिए अत्यंत सावधानी बरती जा रही हैं । जम्मू-कश्मीर के लोगों की पहचान और संस्कृति को सुरक्षित रखा जाएगा।”                                                                                                                  सत्यपाल मालिक ,गवर्नर जम्मू -कश्मीर 

जिलाधिकारी शाहिद चौधरी ने संचार सेवाओं पर लगे प्रतिबंधों की स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि घाटी के ज्यादातर टेलीफोन एक्सचेंज 4 सितंबर यानी कल रात से ही काम करना शुरू कर दिया है । इसी तरह से मोबाइल सेवाओं को भी बहाल कर दिया जाएगा।
इसबीच दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग,कुपवाड़ा, उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिलों में मोबाइल फोन की घंटियां बज रही हैं। जबकि एक दिन पहले तक घाटी में 95 टेलीफोन एक्सचेंजों में से 76 में लैंडलाइन सेवाएं बहाल की जा चुकी हैं।
गौरतलब है कि पिछले महीने पांच अगस्त को केंद्र की ओर से अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करने और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के फैसले के बाद से घाटी में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं निलंबित हैं।
सुरक्षाबलों के साथ पिछले माह हुई झड़प में घायल एक प्रदर्शनकारी की कल  स्थानीय अस्पताल में मौत हो गई। इसके बाद सिविल लाइंस समेत शहर के कुछ संवेदनशील इलाकों में प्रतिबंध लगा दिए गए हैं।

समझा जा रहा  है कि पाबंदियां एहतियातन लगाई गई हैं। प्रशासन जल्द ही इन्हें हटा लेगा, क्योंकि श्रीनगर समेत घाटी के अन्य इलाकों में सामान्य हो रहे माहौल को बनाए रखने के लिए ऐसा जरूरी माना जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, पांच अगस्त को राज्य से अनुच्छेद 370 समाप्त किए जाने और जम्मू-कशमीर व लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने की घोषणा के विरोध में छह अगस्त को श्रीनगर के बाहरी इलाके सौरा में एक प्रदर्शन हुआ था।
इसमें सुरक्षा बलों के साथ हुई झड़पों में कई लोग घायल हुए थे। घायलों में असरार अहमद खान भी शामिल था। उसका इलाज सौरा स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ  मेडिकल साइंसेज में चल रहा था। लगभग एक महीने तक इलाज के बाद उसकी कल मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक सबूतों से पता चला कि चोट संभवत: पत्थर लगने से हो सकती है।

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