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1919 के रॉलेट एक्ट जैसा काला कानून है CAA: उर्मिला 

1919 के रॉलेट एक्ट जैसा काला कानून है CAA: उर्मिला 

नागरिकता संसोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिकता को लेकर फिल्म अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर का बड़ा बयान सामने आया है। उर्मिला ने गुरुवार को एक सार्वजनिक बैठक के दौरान नागरिकता संशोधन कानून की तुलना 1919 के रॉलेट एक्ट से की।

यह बैठक सीएए, राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के खिलाफ नॉन वायलेंट पीपुल्स मूवमेंट ने महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के मौके पर आयोजित की गई थी। सीएए और एनआरसी पर आपत्ति केवल आम लोग ही नहीं बल्कि कई बॉलीवुड सेलेब्रिटीज ने भी दर्ज कराई है और प्रदर्शनों में हिस्सा लिया है। अभिनेत्री और कांग्रेस की पूर्व नेता उर्मिला ने सीएए की तुलना काला कानून से किया।

उर्मिला ने कहा, “1919 में आया रॉलेट एक्ट और 2019 में आया सीएए दोनों को इतिहास में काले कानून के तौर पर याद किया जाएगा। सीएए गरीबों के खिलाफ है। जैसा कि कहा जा रहा है कि ये कानून मुस्लिम विरोधी भी है। हम ऐसा कानून नहीं चाहते जो धर्म के आधार पर मेरी पहचान और नागरिकता का पता लगाता हो। यह हमारे संविधान में है कि आप धर्म, भाषा, लिंग या क्षेत्र के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकते।”

उन्होंने कहा, “अंग्रेज जानते थे कि 1919 में दूसरे विश्वयुद्ध के बाद भारत में विरोध बढ़ेगा। इसलिए वो रॉलेट एक्ट लेकर आ गए। 1919 का वह कानून और नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019, दोनों ही को इतिहास में काले कानून के रूप में दर्ज किया जाएगा।” उर्मिला मातोंडकर ने कहा कि कथित देशभक्त देश पर इस प्रकार की तानाशाही करना चाहते हैं।

क्या है रॉलेट एक्ट ?

रॉलेट एक्ट को काला कानून भी कहा जाता है। यह कानून तत्कालीन ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत में उभर रहे राष्ट्रीय आंदोलन को कुचलने के लिए बनाया गया था। ये कानून सर सिडनी रॉलेट की अध्यक्षता वाली सेडिशन समिति की सिफारिशों के आधार पर बनाया गया था।

 

इस कानून के तहत ब्रिटिश सरकार को थे बहुत सारे अधिकार 

इस कानून के तहत ब्रिटिश सरकार को ये अधिकार प्राप्त हो गया था कि वह किसी भी भारतीय पर अदालत में बिना मुकदमा चलाए, उसे जेल में बंद कर सकती थी। इस कानून के तहत अपराधी को उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने वाले का नाम जानने का भी अधिकार नहीं था। इस कानून का पूरे देश में जमकर विरोध हुआ था। देशव्यापी हड़तालें, जूलूस और प्रदर्शन होने लगे थे। महात्मा गांधी ने बड़े पैमाने पर हड़ताल का आह्वान किया था।

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