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बंगला नंबर 35 : राजनीति से चाय के निमंत्रण तक, प्रियंका की परिपक्वता

दिल्ली के लोधी स्टेट स्थित बंगला नंबर 35 एक महीना पहले उस समय चर्चा में आया था जब शहरी विकास मंत्रालय ने इस बंगले को खाली करने के आदेश दिए थे। इस बंगले में रह रही कांग्रेस की उत्तर प्रदेश महासचिव प्रियंका गांधी से एक अगस्त तक बंग्ला खाली करने के आदेश के साथ ही राजनीति भी शुरू हो गई थी। तब कांग्रेस के एक नेता ने यहां तक कहा था कि केन्द्र सरकार को जिस वक्त चीन से अपनी जमीन खाली करवानी चाहिए, उस वक्त सरकार प्रियंका गांधी से बंगला खाली करवाने में जुट गई है। बंगला नंबर 35 एक बार फिर चर्चाओं में है।

बंगला चर्चाओं में इसलिए है कि इस बार बंगला खाली करने से तीन दिन पहले प्रियंका गांधी ने एक अगस्त से इस बंगले में आने वाले अनिल बलूनी को चाय पर बुलाया है। हालांकि प्रियंका गांधी के चाय के आमंत्रण को फिलहाल बलूनी ने स्वास्थ्य कारणों से स्थगित कर दिया है। लेकिन वही दूसरी तरफ राज्य सभा सांसद और भाजपा के प्रवक्ता अनिल बलूनी ने लगे हाथ प्रियंका गांधी को पहाड़ी खाने का निमंत्रण दे डाला।

प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में पहले मजदूरों के पलायन पर तो अब राज्य की बिगडती कानून व्यवस्था पर लगातार हमलावर है। जो लोग प्रियंका गांधी को भाजपा विरोधी समझते थे उनके लिए प्रियंका का बलूनी को चाय का आमंत्रण बेहद अटपटा लग रहा है। देखा जाए तो यह प्रियंका गांधी का अनौपचारिक चाय पर निमंत्रण है। लेकिन सोशल मीडिया पर इसको लेकर प्रियंका गांधी की खूब वाहवाही हो रही है। लोग प्रियंका गांधी के इस चाय आमंत्रण को उनकी परिपक्व होती राजनीति के नजरिए से देख रहे हैं।

चाय आमंत्रण पर जहां प्रियंका गांधी ने बकायदा ट्वीट किया और कहा कि आज श्री अनिल बालुनी और उनकी पत्नी से बात हुई। मैं ईश्वर से उनके अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करती हूँ। उन्हें नए घर की शुभकामनाएँ देते हुए आशा करती हूँ कि उन्हें भी इस घर में उतनी ही ख़ुशियाँ मिलें जितनी मुझे और मेरे परिवार को मिलीं। तो वही दूसरी तरफ अनिल बलूनी ने भी उन्हें निमंत्रण भेजा है। बलूनी ने प्रियंका गांधी को पत्र लिखकर कहा कि प्रियंका गांधी वाड्रा जी, आपका पत्र मिला, आभारी हूं। शायद आपको संज्ञान में नहीं होगा कि मैं कैंसर के उपचार के बाद दिल्ली लौटा हूं और चिकित्सकों का मानना है कि अभी मुझे कुछ और समय घर पर ही आइसोलेशन में रहना चाहिए।

अपनी चिट्ठी में बलूने आगे लिखते हैं कि आपने मुझे चाय पर आमंत्रित किया इसके लिए आपका धन्यवाद। मैं 35 लोदी एस्टेट जाने के उपरांत आपको सपरिवार भोजन पर आमंत्रित करता हूं। जिससे आपको मेरे उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजन मंडुवे की रोटी, झंगोरे की खीर, पहाड़ी रायता, भट्ट की चुठकनी का रसास्वादन मिलेगा, आपका पुनः आभार आपने मुझे आमंत्रित किया, अनिल बलूनी, राज्य सभा सांसद।

गौरतलब है कि प्रियंका गांधी 1997 से 35 लोधी एस्टेट बंगले में रह रही हैं। गृह मंत्रालय द्वारा प्रियंका गांधी को मिले एसपीजी सुरक्षा को वापस लेने के बाद आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने उन्हें यह बंगला खाली करने का नोटिस भेजा था। केंद्र सरकार ने इस महीने की शुरुआत में 35 लोधी एस्टेट का बंगला राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी को आवंटित किया।

बलूनी अभी दिल्ली में 20 गुरुद्वारा रकाबगंज रोड स्थित टाइप-6 के बंगले में रहते हैं। बलूनी ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों के चलते उन्हें आवंटित बंगले को बदलने का सरकार से अनुरोध किया था। इसी दौरान प्रियंका गांधी को आवंटित 35 लोधी रोड स्थित बंगले का आवंटन निरस्त कर दिया गया है। यह भी टाइप-6 बंगला है।

याद रहे कि इसी बंगले को खाली कराने को लेकर कांग्रेसी बीजेपी पर हमलावर हो गयें थे और इसे निजी तौर पर बदले की भावना से तहत कार्रवाई करने का आरोप लगाया था। तब इस मुद्दे पर कांग्रेसी अपने-अपने तरीके से बीजेपी को घेरने में लगे रहे थे। यहां तक की पोस्टर जारी तक किए गए।

तब पोस्टर जारी करने वाले नेता का साफ तौर पर कहना था कि केन्द्र सरकार को जिस वक्त चीन से अपनी जमीन खाली करवानी चाहिये उस वक्त सरकार प्रियंका गांधी से बंगला खाली करवाने में जुट गयी है। कांग्रेसी नेताओ का आरोप था कि प्रियंका गांधी चीन के मुद्दे के साथ ही मजदूरों गरीबों की परेशानियों पर सरकार को घेरने का काम कर रही थी, जिस वजह से बीजेपी सरकार डर गयी और बदले की भावना से कांग्रेस महासचिव से सरकारी बंगला खाली करवाने की ओछी राजनीति पर उतर आई।

फिलहाल, प्रियंका गांधी 35, लोधी एस्टेट स्थित आवास खाली करने की प्रक्रिया में हैं। तीन दिन बाद वह बंगला खाली भी कर देगी। शहरी विकास मंत्रालय ने एक जुलाई को उन्हें नोटिस जारी कर उनसे एक अगस्त तक बंगला खाली करने को कहा था। क्योंकि पिछले साल उनका सुरक्षा कवर घटाने के बाद वह इसके लिये योग्य नहीं रह गई हैं।

कहा जा रहा है कि प्रियंका गांधी ने दिल्ली में एक मकान देख लिया है और वह वहां जल्द ही रहने के लिये चली जाएंगी। चर्चा है कि उन्होंने गुड़गांव सेक्टर 42 की एक रिहायशी सोसाइटी में एक मकान में अपना कुछ सामान भेजा है। लेकिन वह वहां नहीं रहेंगी। बताया जा रहा है कि गुड़गांव के मकान का इस्तेमाल उनके बच्चे कभी-कभी किया करेंगे और वह मध्य दिल्ली में ही रहेंगी।

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