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ब्रिटिश नागरिक ने जीता कोरोना से जंग, कहा- इंग्लैंड में भी नहीं हो पाता ऐसा इलाज

ब्रिटिश नागरिक ने जीता कोरोना से जंग, कहा- इंग्लैंड में भी नहीं हो पाता ऐसा इलाज

पूरी दुनिया में कहर मचाने वाला कोरोना वायरस देशभर में बहुत तेजी से फैल रहा है। अभी तक भारत के करीब-करीब सभी राज्य कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके है। वहीं केरल में रविवार तक कोरोना मरीजों की संख्या ३०६ दर्ज किया गया। यहां ४९ लोगों को घर भी भेजा जा चुका है। उन्हीं ठीक होने वाले मरीजों में से एक ब्रिटिश नागरिक ब्रायन लॉकवुड भी हैं।

ब्रायन अपनी पत्नी के साथ केरल घूमने आए थे। उनके साथ १८ और लोग भी थे। जैसे ही वह यहां से दुबई की फ्लाइट पकड़ने गए तो उनको कोरोना संक्रमित पाया गया। बहुत दिनों तक अस्पताल में रहने के बाद अब उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई है।

इंग्लैंड में नहीं हो पाता केरल जैसा इलाज

ब्रायन ने अनुभव में उन्होंने बताया कि केरल के अस्पताल में जैसी उनकी देखभाल हुई वैसी शायद ही उनके अपने देश में होती। उन्होंने बताया कि भारत में जिस तरह कोरोना से लड़ा जा रहा है और साथ-ही-साथ जिस तरह डॉक्टर मरीजो की देख-रेख कर रहे है इन सब को देखने के बाद में कह सकता हूं कि भारत जल्द ही कोरोना को हराने में कामियाब होगा।

ब्रायन ने अस्पताल के बारे में बताया कि भले ही वहां का माहौल थोड़ा कठोर था। परंतु यह सब हमारे भले के लिए ही था। आइसोलेशन रूम भी रोज सैनीटाइज किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मैं मानता हूं कि भारत के अस्पतालों में हमारे देश जैसा खाना नही मिलेगा पर मैंने वही किया जो मुझे डॉक्टरों ने कहा।

उन्होंने कहा कि मेडिकल टीम हमेशा बताया करती थी कि हमारे पास कौन-कौन से विकल्प है। उन्होंने मेडिकल टीम की तारीफ करते हुए कहा कि यहां की मेडिकल टीम वर्ल्ड क्लास है। यहां के लोग भी काफी विनम्र हैं और अच्छी तरह ख्याल भी रखते हैं।

कोरोना से जंग में केरल मॉडल सबसे कारगर

विशेषज्ञ बताते हैं कि कोरोना का पहला मामला केरल से ही आया था। परन्तु 26 जनवरी को ही कोरोना वायरस से निपटने के लिए यहां नियंत्रण कक्ष स्थापित कर लिया गया था। केरल जांच में इस वक्त सबसे आगे है। पूरे देश में शुक्रवार तक 66 हजार जाँच हुई तो वहीं अकेले केरल में 10 हजार जाँच की गई।

30 जनवरी को केरल में पहला मामला प्रकाश में आया जो धीरे-धीरे कुल तीन हो गए। तीनों संक्रमित लोग फरवरी में ही ठीक हो गए। साथ ही केरल सबसे पहले पुणे के एक निजी लैब से रैपिड-पीसीआर किट खरीदने वाला पहला राज्य है। इसके बावजूद केरल सरकार ने सतर्कता के साथ काम किया। केरल के साथ ही गुजरात और कर्नाटक भी संक्रमण को रोकने में काफी हद तक आगे है।

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