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अध्यादेश लाओ, हाईकोर्ट से बचाओ

 

एक तरफ देहरादून  की रूरल लिटिगेशन संस्था है, जिसने 2015 में हाईकोर्ट नैनीताल में एक जनहित याचिका दायर कर पूर्व मुख्यमंत्रियों सरकार की तरफ से  निशुल्क दी जाने वाली सभी सुविधाओं को हटाने की मांग की थी। फलस्वरूप कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों पर डंडा चला दिया और उत्तराखंड सरकार से सभी सुविधाए हटाए जाने के आदेश दिए साथ ही बाजार दर पर शुल्क वसूली के भी आदेश दिए। तो वही दूसरी तरफ ऊतराखंड की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार है जिसने अपने मुख्यमंत्रियों को बचाने के लिए सारे नियम कानूनों को तिलांजलि दे दी।

सरकार पूर्व मुख्यमंत्रियों के बचाव में खुलकर आ गयी और बाकायदा अध्यादेश पास करा दिया। जिसमे हाईकोर्ट के आदेशों से बचा जा सके। इस अध्यादेश में उत्तराखंड सरकार ने न्यायालय के सापेक्ष एक  कानून भी बनाने की पूरी तैयारी कर ली। जिसमे पूर्व के सभी मुख्यमंत्रियों को सभी सुविधाएं देने का प्रावधान है। एक तरफ सरकार करोडो के कर्ज तले  दबी है तो वही दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुविधाओं के नाम पर करोडो की बर्बादी के इस फैसले से उत्तराखंड की जनता सरकार के खिलाफ हो चली है। लोग त्रिवेंद्र सरकार के इस कदम की जमकर आलोचना कर रहे है।

 

१ दिसंबर 2015

हाई कोर्ट ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों को बिना प्रावधानों के दी जा रही सुविधाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए सचिव गोपन से शपथ पत्र के साथ 15 दिसंबर तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए। साथ ही पूछा है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को किस प्रावधान के अनुसार सरकारी भवनों का आवंटन किया गया है, यदि उनके निजी आवास हैं तो यह भी बताना होगा।

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पूर्व मुख्यमंत्रियों से सुविधाएं हटा ली गई हैं। जबकि याचीकर्ता ने सरकार के कथन का विरोध करते हुए कहा कि अब तक सुविधाएं वापस नहीं ली गई हैं। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोजफ व न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद सचिव गोपन को शपथ पत्र के साथ 15 दिसंबर 2018  तक जवाब दाखिल करने के कड़े निर्देश दिए।

2 मई 2019 

नैनीताल हाईकोर्ट में देहरादून की रूलर लिटिगेशन संस्था द्वारा दायर की गयी जनहित याचिका में हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आदेश दिये कि वो सरकार को छः महिने के अंदर मार्केट रेट के अनुसार आज तक का सरकारी आवास में रहने और सारी सुविधाओं का सारा किराया जमा करे।वरना उसके बाद सरकार इनसे किराया वसूले।

हाईकोर्ट की ओर से जिन पूर्व मुख्यमंत्रियों को झटका लगा है उनमें पूर्व सीएम निशंक पर 40 लाख 95 हजार, बीसी खंडूरी पर 46 लाख 59 हजार,विजय बहुगुणा पर 37लाख 50हजार,भगत सिंह कोश्यारी पर 47 लाख 57हजार,रूपये बकाया है।वहीं पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी पर एक करोड़ 13 लाख रूपये की राशि बकाया है।कोर्ट इन बकाया राशियों को छः महिने के अंदर जमा करने के आदेश देने के साथ साथ  सरकार को चार हफ्तों के अंदर अन्य खर्चों को जांच करने के भी आदेश दिये हैं और जांच में अगर अन्य सरकारी खर्चे भी पाये जातें है तो उनको भी वसूलने के आदेश कोर्ट ने सरकार को दिये हैं।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट में दायर की गयी जनहित याचिका में कहा था कि राज्य में पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकार द्वारा जो सरकारी भवन और सुविधायें दी जा रही हैं वो गलत है और याचिकाकर्ता द्वारा कोर्ट से पूर्व मुख्यमंत्रियों के पूर्व से सरकारी भवनों के प्रयोग करने की अवधि तक का भी किराये वसूलने की मांग की गयी है।उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने प्रदेश के पांच पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास का किराया चुकाने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने पांचों मुख्यमंत्रियों को छह माह के भीतर यह राशि जमा करने को कहा है। साथ ही कोर्ट ने सरकार से चार माह में अन्य खर्चो की जांच कर सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को उसका विवरण देने का निर्देश भी दिया है।

उत्तराखंड सरकार ने पांच पूर्व मुख्यमंत्रियों पर 2 करोड़ 85 लाख रुपए की धनराशि बकाया होने की रिपोर्ट न्यायालय में पेश की थी जिसके बाद हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया। सरकार ने 5 पूर्व मुख्यमंत्रियों पर 2 करोड़ 85 लाख रुपए की धनराशि बकाया होने की रिपोर्ट न्यायालय में पेश की थी जिसमें सरकार ने बताया कि पूर्व सी.एम.निशंक पर 40 लाख 95 हजार, बी.सी.खण्डूरी पर 46 लाख 59 हजार, विजय बहुगुणा पर 37 लाख 50 हजार, भगत सिंह कोश्यारी पर 47 लाख 57 हजार रुपए बकाया है, जबकी पूर्व मुख्‍यमंत्री स्व.एन.डी.तिवारी के नाम पर एक करोड़ 13 लाख रुपए की राशि बकाया है।

 

13 अगस्त 2019

त्रिवेंद्र सरकार पूर्व मुख्यमंत्रियों को राहत देने के लिए त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार अध्यादेश लेकर आई , ताकि हाईकोर्ट के आदेश से बचकर पूर्व मुख्यमंत्रियों को राहत दी जा सकेगी। इस अध्यादेश में पूर्व मुख्यमंत्रियों को सभी सुविधाएं बहाल करने का कानून पास कराया गया। इस तरह पूर्व मुख्यमंत्रियों खासकर भगत सिंह कोश्यारी और विजय बहुगुणा को राहत देने का काम किया गया।

ख़ास बात यह है इससे पहले त्रिवेंद्र सरकार ने राज्य के दायित्वधारियों के मानदेय और भत्तों मेंं तीन गुना तक की बढ़ोत्तरी कर दी। अपनों पर मेहरबानी का चंद महीनो  में यह दूसरा मामला है। इसके अलावा एक तीसरा मामला भी है जिसमे नदी तट पर अतिक्रमणकारियो को बचाने के लिए भी सरकार ने हाईकोर्ट के आदेशों के विपरीत अध्यादेश पास कराया था। इस अध्यादेश में बाहर से आकर बसे उन लोगो को सरकार ने आवास देने का वायदा किया है जो लोग रिस्पना नदी पर अतिक्रमण करके बैठे है। जबकि वर्षो से उन पहाड़ से पलायन करके आये लोगो को सरकार के पास जमीं ना होने का बहाना है जो आपदा में अपना घर बार सब बर्बाद होने के बाद मैदान में तम्बुओ में शरण लिए हुए है।

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