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हरियाणा में भाजपा पर भारी मंत्रियों के परिवार को टिकट दिलाने की जिम्मेदारी 

 

अब तक कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाने वाली भाजपा अब पूरी तरह इस मुद्दे पर खुद ही घिरती नजर आ रही है। भाजपा हरियाणा विधानसभा चुनावो को लेकर परिवारवाद के चंगुल में फस गई है। ह‍रियाणा की राजनीति में परिवारवाद का हमेशा से बाेलबाला रहा है। हरियाणा के मशहूर तीन लालों चौधरी देवीलाल, बंसीलाल और भजनलाल के परिवार के संग-संग कई राजनीतिक ‘घराने’ रहे हैं। ये राजनीतिक घराने आज भी हरियाणा की राजन‍ीति में अपना खास वर्चस्‍व रखते हैं। इनकी राह पर ही चलते हुए हरियाणा में भाजपा के दिग्गज नेताओं ने अपनी राजनीतिक विरासत संभालने के लिए पुत्रों-पुत्रियों और रिश्तेदारों को आगे करना शुरू कर दिया है।

फ़िलहाल हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 के लिए सूबे में तमाम राजनीतिक दलों में हलचल तेज हो गई है। सतारुढ़ पार्टी भाजपा में सियासी तूफान सबसे ज्यादा उफान पर है। क्योंकि सबसे ज्यादा टिकट के दावेदार भाजपा में है। दरअसल हरियाणा के 10 सांसदों में से 8 सांसद अपने परिवार के सदस्यों को विधानसभा का टिकट दिलाने में लगे हुए है। जिनमे दो केंद्रीय मंत्री खुलकर सामने आ गए है।

सांसद चाहते हैं कि मोदी लहर में उनके परिवार के सदस्य और रिश्तेदार भी चुनाव वैतरणी पार कर विधानसभा पहुंच जाएं। अपने बेटे, बेटियों, परिवार के सदस्यों तथा खास रिश्तेदारों के लिए इन सांसदों ने टिकट की लाबिंग शुरू कर दी है। बहरहाल ,विपक्षी दलों में फूट के कारण हरियाणा विधानसभा में उत्साह से लबरेज भाजपा नेतृत्व की उलझन राज्य के दो कद्दावर नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों ने बढ़ा दी है। राव इंद्रजीत सिंह अपनी बेटी तो कृष्णपाल गुर्जर अपने बेटे को टिकट दिलाने पर अड़े हुए हैं।कृष्णपाल गुर्जर के बेटे के तो फरीदाबाद में बड़े बड़े होर्डिंग भी लग गए है।

इसी दौरान राव इंद्रजीत के लगातार शक्ति प्रदर्शन से सतर्क पार्टी नेतृत्व ने इस मामले में फैसला फिलहाल टाल दिया है। दोनों केंद्रीय मंत्रियों का तर्क है कि अगर चौधरी बीरेंद्र के परिवार से तीन-तीन लोग संसद और विधानसभा में जा सकते हैं तो उनके परिवार का दूसरा सदस्य टिकट क्यों नहीं पा सकता? हालात यह हो गए कि दो दिन पूर्व पार्टी मुख्यालय में चुनाव को ले कर हुई बैठक में इस मुद्दे पर बेहद तल्ख बहस हुई। नेतृत्व का तर्क था कि चूंकि चौधरी बीरेंद्र की पत्नी विधायक हैं इसलिए टिकट के मामले में उनकी अनदेखी नहीं की जा सकती।

इस पर कृष्णपाल गुर्जर का कहना था कि उनका पुत्र देवेंद्र चौधरी भी चुना हुआ पार्षद और डिप्टी मेयर है। वहीं इंद्रजीत का कहना था कि वह भी अपनी बेटी के टिकट के लिए चौधरी बीरेंद्र सिंह की तरह केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। राव अपनी बेटी आरती राव को रेवाड़ी से टिकट दिलाना चाहते हैं। उनकी योजना अगले लोकसभा चुनाव में अपनी जगह अपनी बेटी को गुडग़ांव से लोकसभा चुनाव लड़ा कर अपनी राजनीतिक विरासत सौंपने की है।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि राव इंद्रजीत सिंह की शिकायत है कि एक तरफ उनकी बेटी के साथ-साथ उनके समर्थकों को टिकट देने में आनाकानी हो रही है। उनके समर्थकों का कहना है कि 69 वर्षीय राव के पास अपने पुत्री को अपनी राजनीतिक विरासत सौंपने का यह आखिरी मौका है। इसलिए वह किसी भी सूरत में अपनी बेटी को टिकट दिलाने पर अड़े हैं।

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