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कुढ़नी उपचुनाव में भाजपा के केदार गुप्ता ने मारी बाजी

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा इस साल अगस्त में भाजपा से गठबंधन तोड़ने के बाद कुढ़नी उपचुनाव का परिणाम भाजपा के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है,तो वहीं उपचुनाव के नतीजे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए बड़ा झटका है। कुढ़नी उपचुनाव में लोगों ने जनता दल यूनाइटेड को पूरी तरीके से नकार दिया है। दिलचस्प बात यह है कि भाजपा गठबंधन से बाहर होने के बाद नीतीश कुमार का यह पहला चुनाव था जहां जनता दल यूनाइटेड का सीधा मुकाबला भाजपा से था।भाजपा ने इस मुकाबले में शानदार जीत दर्ज की है। कुढ़नी उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने जनता दल यूनाइटेड के उम्मीदवार को 3632 मतों के अंतर से हराया है। भाजपा उम्मीदवार केदार प्रसाद गुप्ता ने 76648 वोट हासिल किए जबकि जेडीयू उम्मीदवार मनोज कुशवाहा को 73016 वोट मिले है।

इससे पहले नवंबर में गोपालगंज और मोकामा में उपचुनाव हुए थे जहां दोनों सीटों पर भाजपा का सीधा मुकाबला आरजेडी से था। भाजपा ने आरजेडी को हराकर गोपालगंज सीट बरकरार रखी थी, जबकि आरजेडी ने मोकामा सीट जीता था। निषाद नेता मुकेश साहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) जिसने इस सीट से भूमिहार जाति के नीलाभ कुमार को मैदान में उतारा था वो भूमिहार वोटरों को विभाजित करने में विफल रही और भाजपा को जीत मिल गई है। नीलाभ को 9988 वोट मिले हैं। इस उपचुनाव में असदुद्दीन ओवैसी का भी कोई खास जादू नहीं पाया है। ओवैसी ने भी गुलाम मुर्तजा को चुनावी मैदान में उतारा था मगर उन्हें केवल 3202 वोट मिले है। इस जीत के साथ ही विधानसभा में भाजपा विधायकों की संख्या 78 हो गई है, जो आरजेडी से सिर्फ एक कम है।इस विधानसभा चुनाव में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी मतदाताओं से जनता दल यूनाइटेड के उम्मीदवार को वोट देने की भावनात्मक अपील भी की थी और कहा था कि वह उपचुनाव में महागठबंधन की जीत की खुशखबरी अपने पिता और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद को देना चाहते थे, जिनका हाल ही में सिंगापुर में किडनी ट्रांसप्लांट का ऑपरेशन हुआ था, लेकिन ऐसा लगता है कि तेजस्वी की इस अपील का मतदाताओं पर कोई असर नहीं हुआ है।

 

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