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दिल्ली: शाहीन बाग प्रोटेस्ट बनाम प्रोजेक्ट बना भाजपा का चुनावी एजेंडा 

दिल्ली: शाहीन बाग प्रोटेस्ट बनाम प्रोजेक्ट बना भाजपा का चुनावी एजेंडा 

26 जनवरी 2020
आप और कांग्रेस ने शाहीन बाग जैसे पाकिस्तान खड़े किए हैं। जवाब में 8 फरवरी को हिंदुस्तान खड़ा होगा। जब-जब देशद्रोही भारत में पाकिस्तान खड़ा करेंगे, तब तक देश भक्तों का हिंदुस्तान खड़ा होगा।   –कपिल मिश्रा भाजपा नेता

27 जनवरी 2020
देश के गद्दारों को गोली मारो….को   –अनुराग ठाकुर, केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री

27 जनवरी 2020
ऐसा बटन दबे कि करंट सीधा शाहीन बाग में लगें। –अमित शाह, केन्द्रीय गृहमंत्री

28 जनवरी 2020
वहां (शाहीन बाग) में लाखों लोग जमा होते हैं।…दिल्ली के लोगों को सोचना होगा और फैसला करना होगा।….वह आपके घरों में घुसेगे।…आपकी बहन बेटियों के साथ मुलाकात करेंगे और उन्हें कत्ल कर देंगे।…आज ही वक्त है कल मोदी जी और अमित साहब को बचाने नहीं आ पाएंगे। –प्रवेश वर्मा, भाजपा सांसद

30 जनवरी 2020
शाहीन बाग पर होगी सर्जिकल स्ट्राइक। –तेजीन्द्र बग्गा, भाजपा उम्मीदवार, हरिनगर दिल्ली

दिल्ली में एक सप्ताह पहले सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। 8 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोर शोर से चल रही थी। आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और भाजपा चुनाव प्रचार में लगी हुई थी। इन सभी पार्टियों में आम आदमी पार्टी मजबूती के साथ उभर रही थी। 5 साल तक दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल अपने विकास कार्यो की बदौलत मतदाताओं के बीच जा रहे थे और सुर्खियां बटोर रहे थे।

हालांकि, मतदाताओं का मत अधिकतर केजरीवाल के पक्ष में दिख रहा है। इस बात को भाजपा बखूबी समझ गई और देखते ही देखते शाहीन बाग को मुद्दा बना दिया गया। भाजपा की नजर में पहले शाहिन बाग सिर्फ एक सड़क पर आंदोलनकारियों द्वारा अतिक्रमण का मामला था। जिसमें सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली जा चुकी थी और बकायदा न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को शांति व्यवस्था बनाने के आदेश दिए थे। शाहीन बाग के आंदोलनकारी एनआरसी और सीएए के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं।

गौरतलब है कि भाजपा पूरे देश में एनआरसी और सीएए को लेकर लोगों के बीच जा रही है। भाजपा ने एनआरसी और सीएए के मुद्दे पर लोकसभा और राज्यसभा में बेशक आम राय बना ली लेकिन वह आम आदमी तक अपनी बात पहुंचाने में बहुत सफल नहीं हो सकी। यहां तक कि वह लोगों को एनआरसी और सीएए के नुकसान और फायदे तक गिनाने में मुश्किल में नजर आ गयी। यही मुद्दा दिल्ली विधानसभा में भी भाजपा के सामने खड़ा था।

शाहीन बाग आंदोलन भाजपा के सामने दिनों दिन मुखर होता जा रहा है। भाजपा की केन्द्र सरकार इसमें घिरती जा रही है। इस मुद्दे को लेकर भाजपा में इतनी बेचैनी है कि वह दिल्ली में शाहीन बाग के अलावा और कोई मुद्दा नहीं उठा पा रही है। अब भाजपा के पास ले देकर दो ही मुद्दे रह गए हैं। शाहीन बाग का विरोध करना और एनआरसी एवं सीएए का समर्थन कर मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करना।

ऐसे में भाजपा के केंद्रीय मंत्री से लेकर विधानसभा उम्मीदवार तक विवादास्पद बोल बोलने से नहीं चूके। कभी शाहिन बाग को पाकिस्तान कहकर तो कभी शाहीन बाग के आंदोलनकारियों को आतंकवादी का दर्जा देकर मां बहन की बेटियों की इज्जत लूटने जैसी बातें करके भाजपा के सांसद और मंत्रियों ने कर दी है। यहां तक कि आम आदमी पार्टी से भाजपा में गए कपिल मिश्रा ने आगामी 8 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव को भारत-पाकिस्तान का चुनाव तक कह डाला।

मामला इससे भी आगे तब बढ़ गया जब केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने रिठाला से भाजपा के उम्मीदवार मनीष चौधरी के समर्थन में एक चुनावी सभा में बहुत ही विवादास्पद बात कह डाली। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से गद्दारों को गोली मारने की भाषा का प्रयोग किया। हालांकि, उससे अगले दिन चुनाव आयोग ने अनुराग ठाकुर को नोटिस जारी कर दिया। जबकि दूसरी तरफ कपिल मिश्रा के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज हो गई। लेकिन इसके बावजूद भी भाजपा नेताओं के बिगड़े बोल पर कोई लगाम नहीं लग सकी। पिछले सप्ताह से शायद ही कोई दिन ऐसा होगा जब भाजपा नेताओं की जुबान पर साइन बाग को लेकर न फिसली हो। चुनावी पंडितों की माने तो राजनीतिक समीकरण फिलहाल केजरीवाल के पक्ष में है। यह भाजपा बखूबी जानती है।

ऐसे में भाजपा हिंदू कट्टरवाद का एजेंडा चलाकर मतों का ध्रुवीकरण करना चाहती हैं। केजरीवाल को एक वर्ग समुदाय का पक्षकार घोषित कर दिया गया है। जबकि भाजपा मतदाताओं में साहिन बाग का डर दिखाकर दिल्ली में फतेह करना चाहती है। लोगों का कहना है कि भाजपा शायद यह नहीं समझती है कि दिल्ली की पढ़ी-लिखी जनता है जो किसी के बयानों के आधार पर नहीं बल्कि विकास कार्यों के आधार पर वोट देगी।

बताया जा रहा है कि भाजपा शाहीन बाग के मुद्दे पर एक अभियान शुरू कर रही है। जिसमें वह आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की घेराबंदी करेगी। और लोगों से पूछेगी कि साइन बाग के समर्थन में हो या विरोध में। फिलहाल देश के गृहमंत्री और पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और वर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दिल्ली चुनाव की कमान संभाल रखी है। जबकि भाजपा ने बड़ी ही रणनीति के तहत देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अभी दिल्ली चुनाव से दूर ही रखा है।

फिलहाल कल से भाजपा देश के 200 सांसदों को दिल्ली में चुनाव प्रचार में उतार रही हैं। भाजपा की प्लानिंग है कि वह हर विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के तीन सांसदों को तैनात करेगी। इसके अलावा उससे अगले दिन यानी 2 फरवरी से अमित शाह के नेतृत्व में डोर टू डोर कैंपेन चला जाएगा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी दिल्ली में चुनाव प्रचार के लिए बुलाया जा रहा है। उनकी कई सभाएं प्रस्तावित है। इसके अलावा देश के सभी केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा के मुख्यमंत्री तथा पार्टी के बड़े-बड़े नेता इस कैंपेन में शामिल हो रहे है।

कुल मिलाकर भाजपा ने इस चुनाव को जीतने के लिए पुरानी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। जिसमें भाजपा का एजेंडा प्रोटेस्ट बनाम प्रोजेक्ट की तरफ घूमता दिखाई दे रहा है। इसमें मुख्य मुद्दा शाइन बाग को प्रोजेक्ट बनाते हुए भाजपा नेताओं की ओर से भड़काऊ बयान देने की रणनीति पर काम चल रहा है। पिछले 1 सप्ताह में ही भड़काऊ बयान भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों के द्वारा जनता की सभाओं में दिए जा चुके हैं। इससे लगता है कि भाजपा सिर्फ शाहीन बाग के मुद्दे पर ही अपनी पार्टी की नैया पार लगाने की जुगत में है।

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