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उत्तर प्रदेश में एमएलसी की खाली हो रही 12 सीटों को जीतने की जुगत में भाजपा

जनवरी माह के आखिर में तीन राज्यों की 15 विधान परिषद सीटों के लिए होने जा रहे चुनाव में भाजपा को बड़ी सफलता मिलने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश में 12, बिहार में दो तथा आंध्र प्रदेश में एक सीट के लिए चुनाव होना है। उत्तर प्रदेश में भाजपा को 12 में 10 सीटें मिलने के कयास लगाए जा रहे हैं। बिहार की दोनों सीटें उसके हिस्से में आ सकती हैं। वह अपने सहयोगी दलों को भी संतुष्ट कर सकती है। आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ वाईएस आरसीपी को सीट मिलनी तय है। उत्तर प्रदेश के विधान परिषद चुनाव में जो 6 सीटें खाली हो रही हैं वे अभी सपा के पास हैं। चुनावी विधानसभा गणित में सपा अब महज एक सीट जीतने की स्थिति में है। विपक्षी दल एक होने पर एक और सीट जीत सकते हैं। बसपा के लिए संभावनाएं बेहद कम हैं।

उत्तर प्रदेश के लिए भाजपा अपने उम्मीदवारों की घोषणा अगले सप्ताह कर सकती है। उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह का फिर से उम्मीदवार बनना है तय माना जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले दिनों राज्यसभा की कुछ सीटों के लिए हुए चुनावों में भाजपा और बसपा में गुपचुप तरीके से सहमति बनी थी। बसपा को ज्यादा वोटों की दरकार के मद्देनजर भाजपा ने उसके प्रत्याशी रामजी गौतम को राज्यसभा पहुंचाने में मदद की थी। नाराज बसपा के पांच विधायकों ने बगावत कर दी थी। इस पर मायावती ने यह घोषणा कर दी थी कि विधान परिषद चुनाव में वह समाजवादी पार्टी को सबक सिखाने के लिए भाजपा को समर्थन भी कर सकती है। बसपा की इस सियासी मंशा में कोई बदलाव नहीं हुआ तो भाजपा विधान परिषद की 12वीं सीट के लिए या यूं कहें 11वां एमएलसी पाने के लिए प्रत्याशी उतार सकती है।

दरअसल, यह देखने वाली बात होगी कि दोनों पार्टियों का मौजूदा रुख क्या रहेगा। बिहार में दो सीटें खाली हुई हैं। इस एक सीट सुशील मोदी के राज्यसभा सांसद चुने जाने से और दूसरी सीट विनोद नारायण झा के विधानसभा चुनाव जीत जाने के कारण खाली की गई है। भाजपा यहां इन सीटों पर खुद या अपने सहयोगी दलों को मौका दे सकती है। बिहार में अभी राज्य मंत्रिमंडल का विस्तार होना है तथा दोनों सदनों के आंकड़ों के मुताबिक एनडीए के सभी दल अपनी-अपनी दावेदारी करेंगे। भाजपा और जदयू के साथ वीआईपी और ‘हम’ भी अपना-अपना दावा कर रहे हैं।

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