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भाजपा-शिवसेना गठबंधन टूटना तय

नई दिल्ली, मुंबई। सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर शिवसेना ने भारतीय जनता पार्टी को जो झटका दिया और उसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की तारीफों के जो पुल बांधे उसके साफ संकेत हैं कि दोनों दलों का गठबंधन अब लंबा नहीं चलने वाला है। बहुत संभव है कि आगामी लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ेंगी। शिवसेना के सख्त तेवरों को देखते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपने कार्यकर्ताओं को कह दिया है कि वे अकेले चुनाव लडने को तैयार रहें।
मॉनसून सत्र कें दौरान विपक्षी दलों द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर शिवसेना ने सरकार का साथ नहीं दिया। यही नहीं शिवसेना नेताओं ने संसद में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भाषण की भी जमकर तारीफ की। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने लोकसभा में बीजेपी सरकार के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव के गिरने के बाद राहुल गांधी की जमकर तारीफ की है। शिव सेना के मुखपत्र ‘सामना’ में पेज 1 की हेडलाइन में राहुल की प्रशंसा में लिखा गया कि -‘भाई, तू तो छा गया…’।  राहुल के भाषण को प्रथम पृष्ठ पर भरपूर कवरेज के साथ हाइलाईट किया गया।
राहुल गांधी के भाषण और सदन में उनके सभ्य व्यवहार को लेकर सामना में जिस तरह प्रशंसा की गई है उसका भाजपा को बुरा लगना स्वाभाविक है। पार्टी नेताओं को लग रहा है कि तमाम कोशिशों के बावजूद अब शिवसेना के साथ चलना मुश्किल है। लिहाजा रविवार 23 जुलाई को  महाराष्ट्र के अपने दौरे में  भाजपा  अध्यक्ष अमित शाह ने राज्य केे बीजेपी नेताओं और सगंठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ एक बैठक भी की। बैठक में शाह ने कार्यकर्ताओं को आगामी लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र की सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने के लिए संगठन को मजबूत करने और चुनाव की तैयारी में जुट जाने के लिए कहा है। महाराष्ट्र में लोकसभा की 48 सीटें हैं और विधानसभा की 288 सीटें हैं और दोनों ही जगहों पर शिवसेना और बीजेपी के बीच तालमेल है। इतना ही नहीं बीएमसी में भी दोनों ही दलों के गठबंधन की सरकार है।

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