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दलितों पर डोरे डाल रही भाजपा, यूपी में बन रहीं यह रणनीति

केंद्र सरकार द्वारा पहली बार 14 अप्रेल के दिन अंबेडकर जयंती की सरकारी छुट्टी की घोषणा की गई है। इसके लिए बकायदा केंद्र सरकार ने गजट जारी किया है। सूत्रों की माने तो यह एक खास रणनीति के तहत किया जा रहा है ।
रणनीति यह है कि दलितों पर भाजपा डोरे डाल रही है। बहुजन समाज पार्टी से दलित दूर होता दिखाई दे रहा है ।ऐसे में भाजपा उत्तर प्रदेश में एक नया प्रयोग करने जा रही है। इसके तहत यूपी भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष किसी दलित नेता को बनाया जा सकता है।
 इसके चलते कई दलित नेताओं के नाम चर्चाओं में है । जिनमें कौशांबी से दो बार के सांसद रहे विनोद सोनकर तथा लखनऊ से विधायक विधा सागर सोनकर के नाम चर्चाओं में है। इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पुराने चेहरे रमापति शास्त्री की भी चर्चा चल रही है ।
भाजपा 2024 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर यूपी में यह प्रयोग करने को अपनी रणनीति बना रही है। गत विधानसभा चुनाव में जिस तरह से बसपा की गत हुई है और सिर्फ उसे एक ही सीट पर संतोष करना पड़ा है उससे संदेश जा रहा है कि दलित अब मायावती के वोट बैंक नहीं रहे।
इसको गत विधानसभा चुनाव में बसपा के कम होते मत प्रतिशत से भी समझा जा सकता है। विधानसभा चुनाव में बसपा का मत प्रतिशत 7‌फीसदी कम हुआ है ।पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा का मत प्रतिशत 19 फ़ीसदी था जो इस बार घटकर 12 प्रतिशत पर आ गया है।
2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा एक भी सांसद नहीं जीत पाई थी। लेकिन 2019 के सपा के साथ हुए गठबंधन में मायावती की पार्टी को 10 सांसद मिल गए थे। कहा जा रहा है कि भाजपा की निगाह अब 10 सीटों पर टिकी हुई है। इसी के तहत पार्टी अब जातीय संतुलन बनाने में जुटी हुई है ।जिसके जरिए दलित अध्यक्ष बनाकर पूरे प्रदेश में भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि वह दलितों की हित चिंतक है।

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