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पुराने मुद्दों का मोह नहीं छोड़ पाई भाजपा

  • नई दिल्ली। आखिरकार भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2019 के लिए अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है। ‘संकल्प पत्र’ के नाम से जारी इस घोषणा पत्र के साफ संदेश है कि पार्टी के खेवनहार अब पूरी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही हैं। आडवाणी और जोशी जैसे पुराने नेताओं की छाप अब पार्टी पर  नहीं रही। इन नेताओं के चित्र भी इस बार के घोषणा पत्र में नहीं हैं। अटल बिहारी वाजपेयी, डाॅ ़ श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंड़ित दीनदयाल उपाधयाय सरीखे नेताओं के चित्र भी आखिर पन्ने पर हैं, जबकि पिछले लोकसभा चुनाव के घोषणा में इन नेताओं को दूसरे पन्ने पर स्थान दिया गया था।
‘सबका साथ और सबका विकास’ के नारे को लेकर भाजपा जनता के बीच जाती रही है। इस चुनाव में भी पार्टी इस नारे को लगा रही है। लेकिन लगता है कि खुद पार्टी के रणनीतिकारों को अंदर से भरोसा नहीं है कि महज इस नारे के बूते चुनावी भंवर में फंसी नैय्या पार लग पाएगी। फिर कांग्रेस ने बेरोजगारी, गरीबी शिक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों को अपने घोषणा पत्र में प्रमुखता दी है। ऐसे में भाजपा को लगा कि कांग्रेस या अन्य विपक्षी दलों की काट के लिए विकास और बुनियादी मुद्दों को भी प्रमुखता से लिया जाना चाहिए। राम मंदिर, धारा 370 और समान नागरिक संहिता जैसे पुराने मुद्दों को पार्टी ने इस बार भी अपने घोषणा पत्र में जगह दी है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो भाजपा के रणनीतिकारों को लग रहा है कि यदि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने उसे बेरोजगारी, शिक्षा, विकास जैसे बुनियादी मुद्दों और राफेल डील आदि पर घेरने की कोशिश की तो ऐसी स्थिति में पार्टी के पुराने मुद्दे मददगार साबित हो सकते हैं। हालांकि पुराने मुद्दों में ‘गाय’ गायब है फिर भी गौशालाओं का उल्लेख अवश्य है।
जानकारों के मुताबिक भाजपा ने अपने घोषणा पत्र को विलंब से जारी किया। संभवतः पार्टी की रणनीति थी कि पहले कांग्रेस अपना घोषणा पत्र जारी करें और उसी आधार पर उसके मुद्दों की काट की जाए। किसानों, बेरोजगारी, शिक्षा, धारा -370 आदि जिन मुद्दों को कांग्रेस ने उठाया है, उन्हीं की काट पर भाजपा का भी फोकस रहा है।

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