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बिकलिस बानो केस : जस्टिस डिलेड बट नॉट डिनाइड 

 

17साल बाद बिकलिस को कुछ राहत

                                                     

2002 गुजरात कांड की पीड़िता बिलकिस को 50 लाख मुआवजा और सरकारी नौकरी            27 फरवरी 2002 गुजरात दंगों में दुष्कर्म पीड़िता ‘बिलकिस बानो’ की याचिका पर गुजरात सरकार के उसे मुआवजा,सरकारी नौकरी और घर देने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को दो हफ्ते के भीतर 50 लाख का मुआवजा, सरकारी नौकरी और आवास देने के आदेश दिए हैं। बिलकिस बानो की ओर से कहा गया है कि अभी तक सरकार ने कुछ नहीं दिया है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को बानो को 50 लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया था। गुजरात सरकार से कहा गया था कि वह नियमों के मुताबिक बिलकिस बानो को एक सरकारी नौकरी और आवास भी प्रदान करे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ख़ुशी जाहिर करते हुए बिलक़ीस बानो ने कहा, “ये फैसला उनके लिए सुकून देने वाला है.”, बिकलिस बानो के पति याकूब ने भी ख़ुशी जाहिर करते हुए कहा “आज हमारे और बिलकीस के साथ न्याय हुआ है। यह बहुत अच्छा आदेश है। आज हमारा पूरा परिवार खुश है। हमारे देश की सर्वोच्च अदालत ने जो भी फैसला दिया है वो हमारे लिए बहुत खुशी की बात है।

अब बिकलिस बानो की जिंदगी का एक ही मकसद है। वो अपने बच्चों को अच्छे से पढ़ाना चाहती हैं। वो कहती हैं, “बाहर जाने में डर तो लगता है लेकिन किया क्या जा सकता है। गाँव से भी बहुत कुछ सुनने को मिलता हैं कहते हैं  कि तुमको ऐसा कर देंगे। तुमको वैसा कर देंगे, लेकिन डर कर भी क्या करे। जो हो गया है उसके साथ हमें लड़ना ही पड़ेगा, तो लड़कर ही रहेंगे.|”

 गोधरा कांड पर एक नजर :

27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा में 59 लोगों की आग में जलकर मौत हो गई थी। ये सभी ‘कारसेवक’ थे, जो अयोध्या से लौट रहे थे। 27 फरवरी की सुबह जैसे ही साबरमती एक्सप्रेस गोधरा रेलवे स्टेशन के पास पहुंची, उसके एक कोच से आग की लपटें उठने लगीं और धुंआ निकलने लगा। साबरमती ट्रेन के S-6 कोच के अंदर भीषण आग लगी थी। जिससे कोच में मौजूद यात्री उसकी चपेट में आ गए। इनमें से ज्यादातर वो कारसेवक थे, जो राम मंदिर आंदोलन के दौरान अयोध्या में एक कार्यक्रम से लौट रहे थे। आग से झुलसकर 59 कार सेवक मारे गए जिनमें अधिकांश हिन्दू थे। जिससे यह घटना बड़े राजनीतिक रूप में बदल गई, जिसने गुजरात के माथे पर एक अमिट दाग लगा दिया। जिस वक्त ये हादसा हुआ, उस वक्त वहां के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी थे। घटना के बाद शाम होते ही मोदी ने एक बैठक बुलाई। बैठक को लेकर तमाम सवाल पैदा हुए।

 

आरोप लगे कि बैठक में ‘क्रिया की प्रतिक्रिया’ होने की बात सामने आई। ट्रेन की आग लगने की घटना को साजिश माना गया। गोधरा कांड की जांच कर रहे नानावती आयोग ने भी यही  बात मानी कि ट्रेन में भीड़ द्वारा पेट्रोल डालकर आग लगायी गयी है। लेकिन गोधरा कांड के अगले ही दिन मामला अशांत हो गया। 28 फरवरी को गोधरा से कारसेवकों के शव खुले ट्रक में अहमदाबाद लाए गए।  ये घटना भी चर्चा का विषय बनी।  इन शवों को परिजनों के बजाय ‘विश्व हिंदू परिषद’ को सौंपा गया। ग्यारह साल बाद अदालत ने गोधरा कांड के 31 आरोपियों को दोषी मानते हुए इनमे से 11 को फांसी की सजा हुई।

 बिलकिस बानो :क्या है पूरा मामला

अहमदाबाद के पास रंधीकपुर गांव में 3 मार्च, 2002 को बिलकिस बानो के परिवार के परिवार पर एक भीड़ ने हमला कर दिया था। इस हमले में बिलकिस के तीन साल की बेटी सहित उसके परिवार के सात लोगों की हत्या कर दी गई थी।पांच माह की गर्भवती बिलकिस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था। हालांकि इस हमले में बिलकिस बानो और उनके परिवार के छः लोग जिंदा बच गए। उस वक्त बिलकिस बानो 19 साल की थीं। उन्होनें 4 मार्च 2002 को पंचमहल के लिमखेड़ा पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत दर्ज करायी। इस मामले की शुरुआती जांच अहमदाबाद में शुरू हुई। सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो की मांग पर 6 अगस्त, 2004 में मामले को मुंबई ट्रांसफर कर दिया।

 

बिलकिस के साथ सामूहिक बलात्कार करने और उसके परिवार के सात सदस्यों की हत्या करने के मामले में 11 लोगों को दोषी ठहराया था। अब जाकर 17 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में गुजरात सरकार को 14 दिनों के अंदर -अंदर बिकलिस बानो को पचास लाख रूपये ,सरकारी नौकरी और आवास दिए जाने का आदेश दिया।

 

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