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एजूकेशन हब कोटा में फंसे बिहार के छात्रों की गुहार, भूखे मर रहे घर पहुंचाए सरकार

कोटा में फंसे बिहार के छात्रों की गुहार, भूखे मर रहे घर पहुंचाए सरकार

राजस्थान के एजुकेश हब कोटा में लाखों छात्र देश के कोने-कोने से आकर कोचिंग ले रहे थे। जो फिलहाल लॉकडाउन के चलते वहां फंसे हुए हैं। जेईई और नेट की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र लॉकडाउन हो जाने से परेशानी झेल रहे हैं।

वह यहां आए तो थे परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए पर यहां आकर फंस चुके हैं। हालांकि, वे हॉस्टल्स में रह रहे हैं। लेकिन समस्या यह है कि ज्यादातर छात्रों के मेस बंद हो चुके हैं। बहरहाल, छात्रों ने अपने-अपने घर जाने की गुहार लगाई है।

इसमें बिहार के छात्र ज्यादा परेशान हैं। बिहार के छात्रों ने अपने फंसे होने और घर जाने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से वीडियो के माध्यम से अपील की है। इसी के साथ ही छात्रों ने अपनी समस्याओं को लेकर कई वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किए हैं।

फिलहाल, यह वीडियो वायरल हो रहे हैं। इससे लग रहा है कि छात्र परेशान है। उनके सामने भूखे मरने की नौबत आ गई है। हालांकि, कोटा के जिलाधिकारी ओम कसेरा दावा करते हैं कि किसी भी छात्र को भूखा नहीं रहने दिया जाएगा। उन्हें किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होने दी जाएगी। इस बाबत कोटा के जिलाधिकारी ओम कसेरा ने भी एक वीडियो जारी किया है।

गौरतलब है कि अध्ययन के लिए कोटा में देशभर से आए करीब 60,000 छात्र-छात्राओं ने लॉकडाउन के दौरान पीजी या हॉस्टल में रहकर पढ़ाई को प्राथमिकता दी है। पूरे देशभर से यहां करीब दो लाख छात्र जेईई मेन परीक्षा और नीट की तैयारियों के लिए आए थे।

लॉकडाउन के बाद फिलहाल कोटा में मौजूद करीब 60,000 छात्र-छात्राएं अपने घर पर नहीं जा सके है और उन्हें हॉस्टल और पीजी में ही रहना पड़ रहा है।

ज्यादातर छात्र अपने दर्द को वीडियो के माध्यम से अपने दोस्तों तक बिहार में पहुंचा रहे हैं। वीडियो में भागलपुर के छात्र बताते हैं कि हर तरह की परेशानी से हम लोग जूझ रहे हैं। खाने के साथ-साथ दवा आदि लेने में भी डर का माहौल बन गया है। जरूरत के सामान भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

सबसे बड़ी बात है डर सा लगने लगा है। इस समय हमें घर एजूकेशन हब कोटा में फंसे बिहार के छात्रों की गुहार, भूखे मर रहे, घर पहुंचाए सरकार जाने की चाहत है ताकि हम लोग सुरक्षित महसूस कर सकें। इसी तरह एक छात्र ने कहा कि खाने के दिक्कत बहुत ज्यादा है। मुझे जरूरत कि सामान भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। हम लोगों को आशा है कि हमारे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कुछ व्यवस्था करेंगे और अपने राज्य बुलाएंगे।

कुछ छात्रों को खाने के लिए दिक्कत तो कुछ को दवाई आदि लेने में भी परेशानी हो रही है। सबसे बड़ी बात है की कोरोना की बढ़ती घटनाओं से डर लगने लगा है। वीडियो में एक छात्र कहते हैं कि मेस बंद है। जरूरत के अनुसार खाना भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। दहशत-सा लग रहा है।

बिहार राज्य सरकार हम लोगों के लिए कुछ व्यवस्था करें ताकि हम अपने राज्य आ सकें। जबकि एक छात्र ने बताया कि सामान उपलब्ध नहीं है। डर का माहौल बन गया है। सुरक्षित महसूस नहीं हो पा रही है। घर जाने की इच्छा है। लेकिन मजबूर हैं। आशा है कि राज्य हम लोगों के लिए कुछ करेगी।

एलन नामक कोचिंग संस्था के निदेशक नवीन माहेश्वरी की माने तो लॉकडाउन के बाद करीब 40,000 बच्चे कोटा में ही रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर दिसम्बर में कोर्स की समाप्ति पर बच्चे घर चले जाते हैं और मार्च-अप्रैल से नए सेशन में आते है।

कई बच्चे अप्रेल के बाद तक रूक कर पढ़ाई करते हैं। कुछ बच्चे 12वीं कक्षा को छोड़ कर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते हैं। कुछ बच्चे ऐसे भी हैं जो बोर्ड की परीक्षा दे रहे थे वो लॉकडाउन के बाद नहीं जा पाए थे।

साथ ही उन्होंने माना कि पीजी वाले बच्चों को कुछ दिक्कत है क्योंकि आसपास की मेस बंद हो गई हैं। इसलिए उनके घरों में खाना पहुंचाया जा रहा है ताकि वे बाहर न निकलें।

माहेश्वरी ने बताया कि छात्रों को तनाव मुक्त रखने के लिए अध्यापक दूरी बनाकर और वीडियो बनाकर उनसे काउंसलिंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोटा में 90 प्रतिशत बच्चे अलग-अलग कमरों में रहते है। 80 प्रतिशत से ज्यादा हॉस्टल और पीजी में सबके अपने अलग अलग कमरे हैं।

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